भगवान श्रीराम आ रहे हैं। उनके लिए अयोध्या का आंगन सज रहा है। उनके घर का नए सिरे से निर्माण हो रहा है। देश-विदेश के वास्तुविद, शीर्षस्थ कंपनियों के इंजीनियर और दूसरी विधाओं के विशेषज्ञ इसको आकार दे रहे हैं। सामान्य मंदिरों से इतर गहरी नींव, मजबूत आधार के साथ यह केवल पत्थरों से बना होगा। महज कुछ साल तक चलने वाली सीमेंट जैसे दूसरे पदार्थों का रंचमात्र प्रयोग नहीं हो रहा। रामलला का घर भूकंपरोधी होगा। एक हजार साल से ज्यादा समय तक अक्षुण्ण रहेगा। उत्तर और मध्य भारत में प्रचलित मंदिरों की नागर शैली में सरयू के किनारे बन रहा राममंदिर भौतिक विशिष्टताओं की खान है। हर किसी के मन में राममंदिर की विशेषताएं जानने का कौतूहल है। तो आइए, आपको राममंदिर की एक-एक विशेषता से परिचय कराते हैं। राममंदिर को लेकर अब तक क्या कुछ हुआ, और क्या कुछ होने होने वाला है- पढ़िए ये रिपोर्ट।
तीन तल, पांच गुंबद, 161 फीट ऊंचाई
राममंदिर पूर्व मुखी है। मंदिर में कुल तीन तल हैं। कुल ऊंचाई 161 फीट है। प्रत्येक तल की ऊंचाई 20 फीट होगी। पूरब और पश्चिम दिशा में मंदिर 350 फीट लंबा होगा। उत्तर-दक्षिण दिशा में 235 फीट चौड़ा होगा। मंदिर में पांच गुंबद यानी मंडप होंगे, जिसमें से अब तक तीन मंडप तैयार हो चुके हैं। चौथे मंडप का काम चल रहा है।
3500 मजदूर दे रहे मंदिर को आकार
राममंदिर निर्माण में 3500 कारीगर व मजदूर लगाए गए हैं। ये मजदूर राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र, हैदराबाद आदि राज्यों के हैं। राममंदिर निर्माण का काम रात में भी होता है। इसके लिए दो शिफ्ट में आठ-आठ घंटे मजदूरों की ड्यूटी लगाई जाती है। हैदराबाद के कारीगर रामसेवकपुरम में राममंदिर के दरवाजों का निर्माण कर रहे हैं।