चौधरी चरण सिंह हमेशा आम आदमी से जुड़े रहे। वह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उन्हें यह देखकर बड़ी कोफ्त होती थी कि नौकरशाही और मंत्री जनता की तकलीफ को बड़े हल्के में लेते थे। कई बार तो ये अधिकारी चौधरी साहब से ही उलझ जाते। चौधरी साहब इन अधिकारियों पर तंज कसते हुए ‘बूढ़ा बच्चा’ कहा करते थे।
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चौधरी चरण सिंह
चौधरी साहब के साथ काम करने वाले अधिकारी सुरेंद्र तिवारी ने अपने संस्मरण में लिखा है, ‘मैं एक दिन रात में 11 बजे मुख्यमंत्री आवास पहुंचा तो देखा कि चौधरी साहब अपने कमरे में अकेले गहरी सोच में बैठे थे। मैंने सहमते हुए पूछा, ‘सर! क्षमा करें तो एक बात पूछना चाहता हूं।’
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चौधरी चरण सिंह
वह बोले, ‘बोलो।’ मैंने पूछा, ‘आज आप काफी उदास नजर आ रहे हैं।’ वे थोड़ी देर जैसे कहीं खो गए। फिर बोले, ‘तिवारी, काश! मैं दस साल और छोटा होता। तब मैं उन लोगों की सेवा और सक्रिय रूप से कर सकता था जो कष्ट में हैं। जिनकी कोई सुनने वाला नहीं है।’
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चौधरी चरण सिंह
यह कहते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए। मैं उन्हें चकित होकर ताकने लगा। मुझे पता चला कि रात में 10 बजे कोई बूढ़ी औरत मुख्यमंत्री आवास आई थी। उसके साथ पुलिस ने ज्यादती की थी। मैं कुछ कहने की स्थिति में नहीं था। देर रात कुछ अधिकारी पूरी रिपोर्ट लेकर आए।
सुबह होते-होते उस बूढ़ी औरत के साथ ज्यादती करने वाले पुलिस के लोग न सिर्फ निलंबित हो गए बल्कि उनके खिलाफ जांच भी बैठ गई। यह कार्रवाई करने के बाद ही चौधरी साहब आराम करने गए।’