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महेंद्र को अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने यूपी में खेला ब्राह्मण कार्ड, जानें- उनसे जुड़ी खास बातें

Thu, 31 Aug 2017 10:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजााला, लखनऊ
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- फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय को भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। वह वर्तमान अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य का स्थान लेंगे। चंदौली से सांसद डॉ. पांडेय पार्टी के 18वें अध्यक्ष हैं। यह जिम्मेदारी संभालने वाले वे 13वें व्यक्ति हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि वाले डॉ. महेंद्र को यूपी भाजपा की जिम्मेदारी देकर पार्टी ने ब्राह्मण कार्ड खेला है। साथ ही सरकार और संगठन के बीच सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है।

मूलरूप से गाजीपुर के सैदपुर के पखनपुर गांव के निवासी 60 वर्षीय डॉ. पांडेय लंबे समय से पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रहते हैं। वहीं उनकी पढ़ाई-लिखाई भी हुई। वह रामजन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय रहे और जेल भी गए। उन पर रासुका भी लगाई गई।
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आपातकाल में जेल, पत्रकारिता की डिग्री
आपातकाल के खिलाफ आंदोलन में जेल तक जाने वाले डॉ. पांडेय ने हिंदी में पीएचडी करने के साथ पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की है। उनकी छवि मृदुभाषी व मिलनसार नेता की है। वे भाजपा और संबंधित संगठनों में अलग-अलग कई जिम्मेदारियां उठा चुके हैं। केशव मौर्य को प्रदेश का डिप्टी सीएम बनाए जाने के बाद से ही नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। कई तरह के समीकरणों पर कयास लग रहे थे।
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दो बार विधायक व मंत्री भी रहे
छात्र राजनीति से निकले डॉ. महेंद्र 1973 में वाराणसी के सीएम बंगाली इंटर कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए। 1978 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के छात्रसंघ महामंत्री रहे। वर्ष 1991 और 1996 में सैदपुर से भाजपा के टिकट पर विधायक बने। तत्कालीन सरकारों में नगर, आवास विभागों के राज्यमंत्री तथा नियोजन और पंचायती राज विभागों के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री भी रह चुके हैं।
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नाराजगी थामने की कोशिश
कहा जा रहा है कि पिछले महीने लखनऊ यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं की शिकवा-शिकायतों को देखते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने डॉ. महेंद्र को अध्यक्ष बनाकर सरकार और मंत्रियों को लेकर पनप रही नाराजगी थामने की कोशिश की है। उन्हें अध्यक्ष बनाकर शाह ने यह साफ कर दिया है कि लखनऊ यात्रा के दौरान जो कुछ उन्होंने देखा और समझा, उससे यह जरूरी हो गया था कि कार्यकर्ताओं को अपनी बात कहने का एक मंच उपलब्ध हो और उनकी बात ऊपर तक आ सके।
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