केजीएमयू में एक तरफ कोरोना पॉजीटिव मरीज भर्ती हैं तो दूूसरी तरफ ट्रामा सेंटर में मरीजों की भीड़ लगी रहती है। शोध को बढ़ावा संग शैक्षिक विकास को भी गति देनी है। ऐसे में यहां व्यवस्था से जुड़े चिकित्सा विशेषज्ञों की दिनचर्या बदल गई है। मरीजों के इलाज में लगे चिकित्सकों के लिए ग्लव्स से लेकर पीपीईटी किट, मरीजों की दवाओं की उपलब्धता, भविष्य में मरीजों के बढ़ने पर आने वाली चुनौतियों से निपटने की रणनीति बनाने में इनका सुबह से शाम तक का वक्त निकल जाता है। मरीजों के इलाज में लगी टीम का हौसला बढ़ाने, क्वारंटीन में गए कर्मचारी और डॉक्टर दोबारा ड्यूटी के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें, इसके लिए भी यह टीम लगातार पसीना बहा रही है। टीम के सदस्यों में कौन, क्या कर रहा, इसकी पड़ताल करती रिपोर्ट।
विज्ञापन
2 of 14
केजीएमयू के कुलपति प्रोफेसर डॉ. एमएलबी भट्ट
- फोटो : amar ujala
मरीजों का हाल जानने के बाद जाते घर
केजीएमयू के कुलपति प्रोफेसर डॉ. एमएलबी भट्ट सुबह ऑफिस पहुंचते ही मरीजों का ब्यौरा लेते हैं। किसकी सेहत में सुधार, किसकी हालत बिगड़ी, इसकी जानकारी के बाद इलाज में लगी मुख्य टीम के साथ आगे की रणनीति बनाते हैं। इसके बाद परिसर में चल रही तैयारियों की जानकारी लेकर अगले दिन की कार्ययोजना पर चर्चा करते हैं। सीएमएस व एमएस सहित अन्य विभागाध्यक्षों के साथ मंत्रणा कर संसाधनों के विकास की रणनीति बनाते हैं। शोध व शैक्षिक विकास की रणनीति बनाने में देर शाम हो जाती है। शाम को मरीजों की स्थिति जानने के बाद परिसर छोड़ते हैं।
सामग्री की गुणवत्ता पर नजर
न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. आरके गर्ग विश्वविद्यालय के रिसर्च डीन हैं। कोरोना के नियंत्रण के लिए देश- दुनिया में अपनाई जा रही रणनीति व उसके नतीजों, शोध की विधाओं पर इनकी नजर रहती है। अब इन्हें लॉजिस्टिक कमेटी की भी जिम्मेदारी मिली है। ऐसे में यहां आने वाली हर सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता और उसकी गुणवत्ता जांचने का भी जिम्मा है। क्योंकि ग्लव्स की गुणवत्ता खराब होने पर पूरी टीम की जान जोखिम में पड़ सकती है।
4 of 14
ओपीडी के प्रभारी डॉ. नितिन भारद्वाज
- फोटो : amar ujala
ताकि सामग्री की न हो कमी
ओपीडी के प्रभारी डॉ. नितिन भारद्वाज भी उपकरणों की खरीद व उसके प्रबंधन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यहां आने वाले वेंडर और उनके सामान की गुणवत्ता देखते हैं। जरूरत के हिसाब से यूनिवर्सिटी में किट, सैनिटाइजर व अन्य सामान की उपलब्धता तय करते हैं।
इस वक्त प्रशिक्षण काफी अहम
मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. वीरेंद्र आतम अहम भूमिका में हैं। कोरोना मरीजों के इलाज में इस विभाग की भूमिका फ्रंट फाइटर की है। ऐसे में समन्वय के साथ सभी डाक्टरों, नर्सिंग स्टाफ को प्रशिक्षण की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इलाज में बरती जाने वाली सावधानी पर लगातार अपडेट देते रहते हैं।
विज्ञापन
6 of 14
प्रोफेसर डॉ. एसएस मल्होत्रा
- फोटो : amar ujala
गुणवत्ता में चूक न होने पाए
न्यूरोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. एसएस मल्होत्रा भी लॉजिस्टिक मैनेजमेंट कमेटी में शामिल हैं। यहां आने वाली पीपीई किट की स्थितियों पर बारीक निगाह रखते हैं। सुरक्षा उपकरणों के लिए शासन से तय की गई गुणवत्ता में कहीं कोई चूक न होने पाए, इसलिए सप्लाई में आने वाले प्रत्येक उपकरण को जांचते हैं।
विज्ञापन
7 of 14
प्रोफेसर डॉ. राजीव गर्ग
- फोटो : amar ujala
संदिग्ध मरीजों की जांच का जिम्मा
रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर डॉ. राजीव गर्ग को भी ट्रायग एरिया की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह यहां आने वाले संदिग्ध मरीजों की जांच करने और फिर उन्हें क्वारंटीन में भेजने की व्यवस्था कराते हैं। यदि कोई पॉजीटिव मरीज है तो उसे तत्काल कोरोना वार्ड में भेजवाते हैं।
8 of 14
एडिशनल प्रोफेसर डॉ. आदर्श त्रिपाठी
- फोटो : amar ujala
बढ़ाते हैं टीम का हौसला
मानसिक रोग विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. आदर्श त्रिपाठी भी ट्रेनिंग कमेटी में शामिल हैं। टीम का हौसला बढ़ाने, उनकी हर झिझक को दूर करने, भय के माहौल से निकालने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। सुबह आते ही वार्ड में तैनात चिकित्सकों का हालचाल लेते हैं।
9 of 14
प्रोफेसर डॉ. एसके सोनकर
- फोटो : amar ujala
व्यवस्थाओं पर रखते हैं नजर
मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एसके सोनकर से मरीजों का पहला वास्ता होता है। ओपीडी में आने वाले मरीजों के इलाज के दौरान अपनाए जाने वाले तरीके टीम को बताते हैं। ओपीडी की स्वच्छता से लेकर ओपीडी की व्यवस्थाओं पर निगाह रखते हैं।
10 of 14
प्रोफेसर डॉ. कौसर उस्मान
- फोटो : amar ujala
कोरोना मरीजों को लेकर सतर्क
मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. कौसर उस्मान को ट्रायग एरिया की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यहां आने वाले मरीजों की जांच करने और उन्हें क्वारंटीन में भेजने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों से वह टीम को वाकिफ कराते हैं।
11 of 14
प्रोफेसर डॉ. प्रशांत गुप्ता
- फोटो : amar ujala
सावधानियों की देते हैं जानकारी
माइक्रोबायोलाजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रशांत गुप्ता प्रतिदिन डॉक्टर व कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान खुद की सुरक्षा की तकनीक समझाते हैं। पीपीई किट पहनते व उतारते समय बरती जाने वाली सावधानी। मरीज के बेड से लौटने के बाद ग्लव्स उतारने के तरीके सहित वार्ड की धुलाई-सफाई के बारे में प्रशिक्षित करते हैं।
12 of 14
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आनंद श्रीवास्तव
- फोटो : amar ujala
कई कमेटियों के हैं सदस्य
रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आनंद श्रीवास्तव के पास उप कुलसचिव की भी जिम्मेदारी है। वह कोरोना मरीजों के इलाज के लिए बनी विभिन्न कमेटियों में शामिल हैं। कमेटी के सदस्यों और कुलपति व कुलसचिव कार्यालय के बीच पुल की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
13 of 14
डॉ. संजीव कुमार
- फोटो : amar ujala
ओपीडी का प्रबंधन है अहम
जनरल सर्जरी विभाग में चेस्ट सर्जन डॉ. संजीव कुमार ओपीडी प्रबंधन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ओपीडी में रेजीडेंटों और अन्य कर्मचारियों की तैनाती का लेखाजोखा, उन्हें ड्यूटी के दौरान सजग करने और मरीजों को सही तरीके से सलाह दी जा रही है या नहीं, इस पर निगाह रखते हैं।
रिवाॅल्विंग फंड का भी जिम्मा
माइक्रोबायोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शीतल को ट्रायग एरिया की जिम्मेदारी दी गई है। वह यहां के प्रबंधन, स्वच्छता की निगरानी करती हैं। इसके अलावा हॉस्पिटल रिवाल्विंग फंड भी संभाल रही हैं। यह सुनिश्चित करती हैं कि एचआरएफ के स्टोर में दवाओं की कमी न होने पाए और मरीजों को सस्ती दर पर दवाएं मिलती रहें।