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Bahraich: बाघ व हिरनों की चहलकदमी के बीच पर्यटकों के लिए खुला कतर्नियाघाट, मनोरम दृश्यों के बीच ये है खास

Tue, 15 Nov 2022 05:27 PM IST
ishwar ashish संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
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- फोटो : amar ujala
पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग सैलानियों के लिए मंगलवार से खुल चुका है। यहां घूमने वाले हिरनों के झुंड, गेरुआ नदी में उछल कूद करती डाल्फिनें, धूप सेंकते घड़ियाल, बाघ व तेंदुओं  और जंगल का मनोरम दृश्य हर किसी का मन मोह रहा है।

इसकी शुरूआत बलहा विधायक सरोज सोनकर व वन विभाग के अफसरों ने की है। जिले में 551 वर्ग किलोमीटर में फैले कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग वैसे तो टाइगर प्रोजेक्ट के रूप में जाना जाता है पर इसकी शोहरत लुभावने प्राकृतिक पर्यटन स्थल के रूप में है।

यहां कदम-कदम पर नैसर्गिक झुरमुटों और वन कुंजों में प्रवास पाने वाले बाघ और तेंदुए के कुनबे जहां सैलानियों को आकर्षित करेंगे वहीं गेरुआ नदी में उछाल मारने वाली गैंजाइटिक डाल्फिन, मगरमच्छों व घड़ियालों के परिवार रेतीले टीलों पर धूप
सेंकते नजर आएंगे।

यहां बाघ और तेंदुओं के साथ हिरन, सांभर, पाढ़ा, बारहसिंहा, नीलगाय, कांकड़, लंगूरी बंदर झुंड के झुंड देखे जा सकते हैं। पर्यटन के इरादे से आने वाले सैलानियों को 15 नवंबर से 15 जून तक वन्य व जलीय जीवों की सुखद और सहज उपस्थिति देखने को मिलेगी।
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- फोटो : amar ujala
बोटिंग की है सुविधा
सुबह-शाम बोटिंग के लिए मोटरबोट भी उपलब्ध है और बच्चों के मनोरंजन के लिए पालतू हाथी भी। वन विभाग ने सैलानियों के लिए यहां डारमेट्री, टाइगर कैंप व घड़ियाल सेंटर भी बना रखा है। चंपाकली और जयमाला सैलानियों को सैर कराएंगी।
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- फोटो : amar ujala
जंगल के बीचोंबीच बर्दिया गांव में थारू होम स्टे बनाया गया है। यहां पर गांवों वालों के बीच फूस की झोपड़ी में पर्यटकों को रहने का मौका दिया जाएगा। यहां पर पर्यटकों को थारू संस्कृति देखने के साथ व्यंजन चखने का भी मौका मिलेगा। थारू होम स्टे में रूकने वाले एक पर्यटक को सात सौ रूपये किराया अदा करना होगा। इसके अलावा 500 रूपये शुल्क अदा करने पर थारू लोक गीत व लोक नृत्य देखने का भी मौका मिलेगा।

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- फोटो : amar ujala
इस बार महंगी हो गई इंट्री
कतर्नियाघाट में इंट्री करने के लिए प्रति व्यक्ति शुल्क 300 रुपये कर दिया गया है, जबकि पिछले वर्ष प्रति व्यक्ति शुल्क 100 रुपये निर्धारित किया गया था। जंगल सफारी, बोटिंग, हाथी की सवारी व डाक्यूमेंट्री फिल्म का भी शुल्क बढ़ा दिया गया है। कतर्नियाघाट, निशानगाड़ा, मुर्तिहा, ककरहा, मोतीपुर रेंज में बने वन विश्राम गृह, डारमेट्री, स्विस काटेज, थारू हट में विश्राम के लिए इस बार दामों में वृद्धि हुई है।
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Katarniaghat - फोटो : amar ujala
जंगल का मुख्य आकर्षण
बाघ- 30 वन विभाग के आंकड़े में (वास्तविक स्थिति करीब 55 बाघ)
चीतल- 8,000, तेंदुए- 110
सांभर- 55
नीलगाय-3000
काकड़-350
गैंडा- 14,
लंगूर-11,000
डाल्फिन-110
घड़ियाल-700
पालतू हाथी-दो
बारहसिंहा-85,
जंगली हाथी- 80
जंगली सुअर- 6,200 व जंगल के बीच पेड़ों के 60 फीट बने ट्री हट।
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