पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग सैलानियों के लिए मंगलवार से खुल चुका है। यहां घूमने वाले हिरनों के झुंड, गेरुआ नदी में उछल कूद करती डाल्फिनें, धूप सेंकते घड़ियाल, बाघ व तेंदुओं और जंगल का मनोरम दृश्य हर किसी का मन मोह रहा है।
इसकी शुरूआत बलहा विधायक सरोज सोनकर व वन विभाग के अफसरों ने की है। जिले में 551 वर्ग किलोमीटर में फैले कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग वैसे तो टाइगर प्रोजेक्ट के रूप में जाना जाता है पर इसकी शोहरत लुभावने प्राकृतिक पर्यटन स्थल के रूप में है।
यहां कदम-कदम पर नैसर्गिक झुरमुटों और वन कुंजों में प्रवास पाने वाले बाघ और तेंदुए के कुनबे जहां सैलानियों को आकर्षित करेंगे वहीं गेरुआ नदी में उछाल मारने वाली गैंजाइटिक डाल्फिन, मगरमच्छों व घड़ियालों के परिवार रेतीले टीलों पर धूप
सेंकते नजर आएंगे।
यहां बाघ और तेंदुओं के साथ हिरन, सांभर, पाढ़ा, बारहसिंहा, नीलगाय, कांकड़, लंगूरी बंदर झुंड के झुंड देखे जा सकते हैं। पर्यटन के इरादे से आने वाले सैलानियों को 15 नवंबर से 15 जून तक वन्य व जलीय जीवों की सुखद और सहज उपस्थिति देखने को मिलेगी।