पहली बार में नहीं जुटा पाए हिम्मत
अशफाक ने पुलिस को बताया कि वह कमलेश के ऑफिस में वह करीब 20 मिनट रुके थे। इस दौरान वहां मौजूद कर्मचारी (सौराष्ट्रजीत सिंह) के सामने ही कमलेश उनसे बातचीत करते रहे। हालांकि, दोनों बेहद घबराए हुए थे। मोइनुद्दीन ने बताया कि इससे पहले उसने कभी चींटी तक नहीं मारी थी और सामने वह व्यक्ति बैठा था, जिसे जान से मारना था। यह सोचकर ही उसके हाथ-पैर ढीले हो रहे थे। अशफाक की हालत भी कुछ ऐसी ही थी।
उसने घबराहट दूर करने के लिए सिगरेट मांगी तो कमलेश ने सौराष्ट्रजीत से सिगरेट लेकर आने को कहा। सौराष्ट्रजीत के जाते ही दोनों को वह मौका मिल गया जिसकी तलाश कर रहे थे। जिस कमलेश तिवारी को हलाक करने का इरादा अशफाक करीब चार साल से मन में पाले थे, वह उसके सामने अकेला और निहत्था मौजूद था। दोनों के पास उन्हें ठिकाने लगाने का पूरा मौका और इंतजाम था, फिर भी वह हिम्मत नहीं जुटा सके।