हाथरस में दुष्कर्म पीड़िता का रात में अंतिम संस्कार कराने पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अफसरों से इसका जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने डीएम समेत अन्य अफसरों को इस मुद्दे पर आड़े हाथ लिया। डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने अदालत को बताया कि जिले में कानून-व्यवस्था को नियंत्रण में रखने के लिए रात में अंतिम संस्कार कराने का निर्णय किया गया।
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कोर्ट में जाते हुए पीड़िता के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
इसके लिए सरकार का कोई दबाव नहीं था। हालांकि कोर्ट ने राज्य सरकार को इस संदर्भ में जवाबी हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने बिटिया के परिजनों का पक्ष भी सुना। मामले की अगली सुनवाई दो नवंबर को होगी। उस दिन कोर्ट ने एडीजी कानून-व्यवस्था और गृह विभाग के किसी विशेष सचिव स्तर के अफसर को पेश होने का निर्देश दिया है।
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पीड़िता की वकील सीमा कुशवाह
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यह मांग रखी... सीबीआई जांच की रिपोर्ट गुप्त रखी जाए, सुनवाई यूपी के बाहर हो
हाईकोर्ट पहुंची सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सीमा कुशवाहा ने खुद को पीड़ित पक्ष का वकील बताते हुए परिवार की सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने कहा कि रेप पीड़िता के परिवार की सुरक्षा के इंतजाम कराना बहुत जरूरी है। उन्होंने पूरे मामले की सुनवाई मुंबई या दिल्ली कोर्ट में कराने और विवेचना के तथ्य गोपनीय रखने की बात कही। इसके लिए वह कोर्ट में जल्द पीड़ित परिवार की तरफ से हलफनामा दाखिल करेंगी।
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कोर्ट में जाते हुए पीड़िता के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि परिवार ने कहा है कि पुलिस ने शुरू से ही सही जांच नहीं की। हमें परेशान किया। हमारी कोई मदद नहीं की थी। शुरू में तो एफआईआर तक नहीं लिखी। बेटी का अंतिम संस्कार भी बिना हमारी सहमति के रात में कर दिया। उसके अंतिम संस्कार में भी हमें शामिल नहीं किया। हमें तो पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं। डीएम ने भी परिवार पर अनुचित दबाव बनाया। इसके साथ ही मामले के पूरी तरह से समाप्त होने तक परिवार को कड़ी सुरक्षा में रखने की मांग की है।
डीजीपी ने भी लिया हालात का जायजा
हाथरस प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने खुद हाईकोर्ट बिल्डिंग पहुंचकर हालात का जायजा लिया। डीजीपी ने हाईकोर्ट बिल्डिंग पहुंचकर वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों से पीड़ित परिवार की सुरक्षा और सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। बैरीकेडिंग के इंतजाम परखे। कुछ देर रुकने के बाद डीजीपी लौट गए।