सरकारी कार्यालयों में सोमवार से सभी अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति के साथ काम शुरू हो गया। हर कार्यालय ने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए हैं। कहीं सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए कुर्सियों की संख्या घटा दी गई है तो कहीं जूतों को भी सैनिटाइज कराया जा रहा है। कार्यालय में सभी के लिए मास्क तो अनिवार्य है ही। नगर निगम जैसे कार्यालय जहां पहले से कर्मचारी तो आ रहे थे, लेकिन सोमवार को उनकी उपस्थिति लगभग शत प्रतिशत रही। जिन विभागों के कार्यालय छोटे हैं, वहां सोशल डिस्टेंसिंग के लिए छोटे-छोटे केबिन बनवा दिए गए हैं। इतना ही नही एकेटीयू में कर्मचारियों के वाहनों को भी सैनिटाइज करने के बाद ही परिसर में प्रवेश दिया जा रहा है।
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वाहनों का भी हो रहा सैनिटाइजेशन
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) की पूरी कार्यप्रणाली में ही बदलाव हुवा है। विवि के गेट पर हर कर्मचारी की थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। वहीं उनके मोबाइल में आरोग्य सेतु ऐप अनिवार्य है। इसके साथ ही दो-चार पहिया वाहनों का भी सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। सौ फीसदी कर्मचारी होने के बाद भी कार्यालय में सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने को खाली कमरों का भी प्रयोग किया जा रहा है। मीटिंग पूरी तरह से ऑनलाइन हो रही है। परिसर में आगंतुकों का प्रवेश नहीं हो रहा है। वहीं बीबीएयू में भी सोमवार से 100% कर्मचारियों के साथ काम शुरू हुआ। यहां भी सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने के लिए खाली कमरों का प्रयोग हो रहा है। सचिवालय में चहल-पहल
सवा दो महीने बाद सोमवार को पूरी क्षमता के साथ सचिवालय खुला। मंत्री और अफसर पहले से ही सचिवालय आ रहे थे। शत-प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति से सचिवालय की रौनक लौट आई। कर्मचारियों की उपस्थिति सुबह 9 से 10 बजे के बीच सर्वाधिक रही। दिन में करीब 10 से शाम पांच बजे तक लगभग 7 घंटे तक लगभग पूर्ण संख्या में कर्मचारियों की उपस्थिति से जगह-जगह सोशल डिस्टेंसिंग पर असर नजर आया। हालांकि सचिवालय गेट पर थर्मल स्कैनिंग, कई जगह सैनेटाइजर की व्यवस्था नजर आई।
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मदरसा बोर्ड में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए बनवा दिए केबिन
मदरसा बोर्ड में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए कमरों में छोटे-छोटे केबिन बनाए गए हैं। मदरसा बोर्ड का कार्यालय जवाहर भवन और इंदिरा भवन में कई तलों पर है। छोटे कमरे होने की वजह से विभाग में केबिन बनाकर कर्मचारियों के बीच दूरी बनाई गई है ताकि कर्मचारी सुरक्षित माहौल में काम कर सकें। वहीं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में भी कर्मचारियों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए काम निपटाए। संयुक्त सचिव अल्पसंख्यक कल्याण एसएन पांडे ने बताया कि विभाग में पहले से ही कर्मचारियों के लिए अलग केबिन बने हुए हैं।
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पूरे स्टाफ के साथ खुले सरकारी दफ्तरों की वजह से राजधानी के सभी मुख्य सरकारी भवन जैसे लोकभवन, विधान भवन, बापू भवन, इंदिरा भवन, जवाहर भवन पूरी तरह गुलजार रहे। सुबह 9 से 11 बजे और शाम पांच बजे से सात बजे के बीच राजधानी में हजरतगंज की अपेक्षा बापू भवन चौराहे पर यातायात का अधिक दबाव नजर आया। वजह आसपास अधिक सरकारी दफ्तर होना था।
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95 फीसदी से भी अधिक रही उपस्थिति
नगर निगम में सोमवार को कर्मचारियों की उपस्थिति 95 प्रतिशत से भी अधिक रही। सोमवार को वे कर्मचारी भी पहुंचे जो पिछले दो महीने से कार्यालय नहीं आ रहे थे। नगर निगम के प्रवक्ता अशोक सिंह ने बताया कि नगर निगम में पहले भी ज्यादातर कर्मचारी आ रहे थे, लेकिन सोमवार को कर्मचारियों की उपस्थिति लगभग शत प्रतिशत रही। उन्होंने बताया कि लिपिक शैलेंद्र वर्मा दो महीने से नहीं आ रहे थे, वह भी आ गए हैं। यहां ऑफिस स्टाफ पहले से ही दूर-दूर या केबिन में ही बैठता था। सैनिटाइजेशन और स्क्रीनिंग के भी पूरे इंतजाम किए गए हैं। सोशल डिस्टेंसिंग के लिए हटवाईं कुर्सियां
जिला प्रशासन से जुड़े कलेक्ट्रेट, सीडीओ, जिला पूर्ति व एफएसडीए कार्यालयों में एंट्री गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही बाहरी लोगों को प्रवेश दिया गया। डीएम के निर्देश पर अफसरों के कमरों में सिर्फ तीन कुर्सियां ही रखी गई हैं। एक समय मे सिर्फ दो लोगों को ही मास्क लगाकर अधिकारी से मिलने की अनुमति दी जा रही है। हैंड सैनिटाइजेशन का भी इंतजाम है।
दूरी बनाए रखने को बदला सिटिंग प्लान
शिक्षा भवन में जिला विद्यालय निरीक्षक, जेडी, डीडीआर, मुख्य शिक्षा अधिकारी और एडी बेसिक का कार्यालय है। कर्मचारियों को तीन शिफ्टों में विभाजित कर बुलाए गया था। कार्यालय के अंदर का सिटिंग प्लान इस तरह बनाया गया ताकि कर्मचारियों के बीच पर्याप्त दूरी रहे। स्क्रीनिंग और सेनिटाइजर लगाने के बाद ही कर्मचारियों को कार्यालय में प्रवेश दिया गया। करीब ढाई महीने बाद सभी कर्मचारी कार्यालय में उपस्थित रहे। कर्मचारी पेंडिंग फाइलें निपटाने में जुटे रहे। इस दौरान आम आदमी को कार्यालय से दूर ही रखा गया।