कहते हैं सबसे खतरनाक वह चांद होता है, जो हर मौत के बाद वीरान हुए आंगन में चढ़ता है और उससे भी ज्यादा पीड़ा देती है वह मुर्दा शांति जो चांद को निहारती किन्हीं अपनों की पथराई आंखों से झांकती है। बात जब जिगर के टुकड़े की आती है तो वह तड़प खामोशी बन घर के कोने-कोने से चीखती है और तड़प कर, टूट कर रह जाते हैं उसे जन्म देने वाले।
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दरवाजे पर खनखन करते विंड चाइम। साफ-सुथरे कमरे में टेडी बियर का ढेर और करीने से सजी किताबें, टेबल और शो केस में रखीं गौरी की बनाई पेंटिग्स। यह है गौरी का कमरा, जहां फाइलों में रखे ढेरों सर्टिफिकेट, जिन्हें शिशिर एक-एक कर हर किसी को दिखाते हैं। डबडबाई आंखों और बिटिया के गम में लड़खड़ाती आवाज में वह कहते हैं कि अब तो बस इस वीरान कमरे में उसकी यादें ही बची हैं।
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ड्राइंग रूम में सजी कई ट्रॉफियां दिखाते हुए पिता कहते हैं कि पढ़ने के साथ-साथ मेरी बेटी डांस में भी अव्वल थी। नृत्य का उसे बहुत शौक था, वह इसमें भी परफेक्ट होना चाहती थी।
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उसका पिगी बैंक दिखाते हुए शिशिर कहते हैं कि बड़ी हो गई थी, लेकिन पैसे लेकर गुल्लक में जमा करती थी। कहती थी, पापा आप पर बोझ न बनूंगी।
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'हे लिव लाइफ हैप्पी, बी हैप्पी। डान्ट बी सीरियस एवरी टाइम...बी लाइक गौरी। कॉल मी व्हेन यू नीड मी'। ये वही पंक्तियां हैं जो गौरी के रूम के दरवाजे पर लिखी हैं।
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रोते-बिलखते तृप्ता कहती हैं कि जरा सी चोट लगती थी, तो पूरा घर सिर पर उठा लेती थी मेरी बेटी। दरिंदों ने तो उसे काट डाला। कितना तड़पी होगी मेरी बच्ची, कितना दर्द हुआ होगा उसे, कितना आवाज दी होगी उसने मुझे...।
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पिता शिशिर श्रीवास्तव बताते हैं कि गौरी कहती थी कि मैं ऐसे लड़के से शादी करूंगी, जो मम्मी-पापा के साथ रहेगा। मैं आप लोगों को छोड़ कर कभी नहीं जाऊंगी। पर वह इस तरह हमेशा के लिए छोड़ जाएगी हमने तो सोचा भी नहीं था। अभी तो मेरी बच्ची के लिए मैंने ठीक से सपने भी नहीं संजोए थे। दरिंदों ने उसे हमसे छीन लिया।
गौरी के पिता ने उसके कमरे में रखी छोटी से छोटी चीज के पीछे की कहानी बताई। शिशिर ने बताया कि ये वो पहली पेंटिंग है जो गौरी ने अपने हाथों से बनाई थी। (स्टोरीः रोली खन्ना, फोटोः अमित सिंह)