नक्सलियों से मुठभेड़ में शहीद हुए अमेठी के सपूत अनिल कुमार मौर्य का शव रविवार को जब उनके पैतृक निवास अमेठी के गांव पूरे खोझवा गया तो जनसैलाब उमड़ पड़ा।
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शहीद अनिल कुमार मौर्य
- फोटो : amar ujala
सीआरपीएफ के जवान क्षेत्र में जब पार्थिव शरीर को लेकर पहुंचे, गगन भेजी नारे गूंज उठे। ग्रामीणों ने 'जब तक सूरज चांद रहेगा, अनिल तुम्हारा नाम रहेगा' के खूब नारे लगाए। अनिल की अंतिम यात्रा में हर कोई भावुक हो उठा।
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मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अफसरों की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ शहीद के शव का अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के छोटे भाई अजय कुमार मौर्य ने शव को मुखाग्नि दी।
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इस दौरान प्रभारी मंत्री मोहसिन रजा, विधायक गरिमा सिंह, विधायक राकेश प्रताप सिंह, भाजपा नेता अनंत विक्रम सिंह, सीआरपीएफ डीआईजी, कमाडेंट, डीएम, एसपी, एएसपी ने भी उन्हें पुष्प अर्पण कर श्रद्धांजलि दी।
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शहीद अनिल कुमार मौर्य
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शोकाकुल बूढ़े माता-पिता, पत्नी और बच्चों को देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईँ। विधायक गरिमा सिंह और डीएम शुकंतला गौतम शहीद की पत्नी और मां से मिलने पहुंचीं तो खुद को भी रोक नहीं सकीं।
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शहीद अनिल कुमार मौर्य
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शहीद की मां श्यामलली का बुरा हाल है। वे बीमार हैं। उन्हें सांत्वना देते-देते विधायक गरिमा सिंह और डीएम के भी आंसू बह निकले। खुद को संभालते हुए किसी तरह उन्होंने बुजुर्ग मां को शांत कराया। फिर वह बेसुध से पड़ी अनिल की पत्नी प्रभावती से मिलने पहुंचीं तो वह फफक पड़ी।
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शहीद की पत्नी की दहाड़ को देख विधायक और डीएम भी अपने आंसू नहीं रोक सकीं। किसी तरह प्रभावती को समझाया गया।
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प्रभारी मंत्री मोहसिन रजा ने शहीद की पत्नी को 20 लाख रुपये और माता-पिता को पांच लाख रुपये का चेक दिया।
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बता दें कि अमेठी कोतवाली क्षेत्र के गांव पूरे खोझवा मजरे नरैनी निवासी अनिल कुमार कुमार मौर्य (50) पुत्र राम पियारे मौर्य छत्तीसगढ़ प्रांत के सुकमा में सीआरपीएफ 212 बटालियन के यूनिट सात में एएसआई के पद पर तैनात थे।
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शुक्रवार रात सर्च ऑपरेशन के दौरान घात लगाए बैठे नक्सलियों ने इनकी टुकड़ी पर हमला कर दिया। करीब एक घंटे तक नक्सलियों और जवानों के बीच मुठभेड़ चली। मुठभेड़ में चार जवान गंभीर रूप से जख्मी हो गए और एएसआई अनिल की गोली लगने से मौत हो गई।
वर्ष 1985 में भर्ती हुए थे अनिल
प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में अमेठी में अर्धसैनिक बल की खुली भर्ती हुई थी। उसी में अनिल मौर्य का चयन हुआ था। इनकी नियुक्ति 30 सितंबर 1985 को सैनिक के पद पर हुई थी।