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CWG: बर्मिंघम में चमके यूपी के आठ सितारे, राष्ट्रमंडल खेलों में इन 13 खिलाड़ियों ने किया देश का नाम रोशन

Tue, 09 Aug 2022 03:08 PM IST
ishwar ashish अनुराग वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
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कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लेने वाले यूपी के सितारे। - फोटो : amar ujala
ऐतिहासिक प्रदर्शन के साथ भारत ने बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में जो धाक जमाई उसमें यूपी के खिलाड़ियों ने चार चांद लगा दिए। पैदल चाल में प्रियंका गोस्वामी तो अन्नू रानी ने जैवलिन थ्रो में पदक जीत सुनहरे भविष्य की उम्मीदों को जगा दिया। उनके पदक का रंग जो भी रहा हो, मगर एथलेटिक्स में देश का रुतबा बढ़ाने में ‘बड़ा’ पदक साबित हुआ। जूडोका विजय यादव और पहलवान दिव्या काकरान ने मुश्किल परिस्थितियों से उबरते हुए पदक के साथ खुद को साबित किया तो पुरुष हॉकी में रजत और महिला हॉकी में देश को कांस्य पदक दिलाने में यूपी के खिलाड़ियों ललित उपाध्याय और वंदना कटारिया ने समां बांध दिया। वहीं क्रिकेट में सोना जीतने से बस कुछ पीछे रह गई टीम में यूपी की खिलाड़ियों दीप्ति शर्मा व मेघना सिंह ने अलग ही छाप छोड़ी।

2018 के गोल्डकोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों से तुलना करें तो इस बार भी यूपी के हिस्से में सात पदक आए। मगर यह उपलब्धि इसलिए बड़ी हो जाती है क्योंकि तब निशानेबाजी में लखनऊ के जीतू राई ने स्वर्ण व मेरठ के रवि कुमार ने कांस्य जीता था। इस बार इन खेलों में निशानेबाजी को शामिल नहीं किया गया था। अनुराग बाजपेई की रिपोर्ट

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प्रियंका गोस्वामी। - फोटो : amar ujala
10 किमी वॉक में भी स्टार वॉकर का कोई जोड़ नहीं
पैदल चाल में अलग पहचान बनाने वाली प्रियंका गोस्वामी ने राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल 10 किमी वॉक में सभी पूर्वानुमानों को झुठलाते हुए रजत पदक अपने नाम किया। ओलंपिक और एशियन गेम्स में शामिल 20 किमी वॉक ही प्रियंका की मुख्य स्पर्धा है, लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों में 10 किमी वॉक होने के कारण स्टार एथलीट ने पहली बार इसमें भाग लिया और कमाल का प्रदर्शन करते हुए 43.38.83 मिनट का सर्वश्रेष्ठ समय निकालते हुए रजत पदक पर कब्जा जमाया। बताते चले कि टोक्यो ओलंपिक में भी 20 किमी वॉक रेस के दौरान प्रियंका शुरुआती 12 किमी तक शीर्ष छह स्थान पर रही थी। वहीं से लगा कि कम दूरी वाली वॉक में बेहतर परिणाम सामने आ सकता है और बर्मिंघम में ठीक वैसा ही हुआ। प्रियंका गोस्वामी (मेरठ- 10 किमी वॉक- रजत पदक)
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ललित उपाध्याय। - फोटो : amar ujala
चांदी सी चमकी हॉकी टीम में अपने फारवर्ड का जलवा
टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम का चमकदार प्रदर्शन राष्ट्रमंडल खेलों में भी जारी रहा, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ  फाइनल में टीम का तालमेल पूरी तरह बिखर गया। लीग दौर में भी इंग्लैंड ने भारत को 4-4 से रोककर तगड़ा झटका दिया था। बावजूद इसके भारतीय टीम खिताबी मुकाबले तक का सफर तय करने में सफल रही। टीम से वाराणसी के अनुभवी खिलाड़ी ललित उपाध्याय ने मिडफील्ड और फारवर्ड के रूप में दोहरी भूमिका से पूरी तरह न्याय किया। छह मैचों में दो गोल करने वाले ललित का प्रदर्शन पूरी प्रतियोगिता के दौरान शानदार रहा। ललित उपाध्याय (वाराणसी- हॉकी- रजत पदक)

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दीप्ति शर्मा व मेघना सिंह। - फोटो : amar ujala
पहली बार शामिल महिला क्रिकेट में दिलाया रजत
राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पहली बार महिला क्रिकेट के टी-20 फारमेट को शामिल किया गया। इसमें भारतीय महिलाओं ने अपनी ख्याति के अनुसार शानदार खेल दिखाया और उपविजेता बनने का गौरव हासिल किया। टीम में बतौर हरफनमौला खिलाड़ी शामिल अनुभवी दीप्ति शर्मा ने कुछ एक मौकों पर गेंद और बल्ले से अच्छा प्रदर्शन करते हुए जीत में योगदान दिया। प्रदर्शन के मामले में मेघना थोड़ी पीछे रह गई। हालांकि उन्होंने सभी छह मुकाबलों में टीम के अक्रमण की बागडोर संभाली, लेकिन विकेट चटकाने में उनका प्रदर्शन साधारण ही रहा। क्रिकेट टीम रजत- दीप्ति शर्मा (आगरा) और मेघना सिंह (बिजनौर)
 
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विजय यादव। - फोटो : amar ujala
पदक दिलाने वालों की फेहरिस्त में जूडोका भी शामिल
नेशनल चैंपियन बनने के बाद विजय यादव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदकों की झड़ी लगा दी, लेकिन चार साल के अंतराल पर होने वाले ओलंपिक, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में उनकी पदक जीतने की ख्वाहिश अधूरी रही। भारत सरकार की टॉप्स स्कीम में शामिल रहे जूडोका ने राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य जीतकर यह कसक दूर कर दी। मूल रूप से वाराणसी के रहने वाले जूडोका विजय यादव का खेल लखनऊ साई सेंटर में कोच सुषमा अवस्थी की ट्रेनिंग में निखरा। यहां चार साल तक रहकर उन्होंने पहले जूनियर और फिर सीनियर वर्ग में पदक जीतकर चमक बिखेरनी शुरू कर दी। विजय यादव (वाराणसी- जूडो- कांस्य पदक)
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अन्नू रानी। - फोटो : amar ujala
60 मीटर थ्रो ने दिलाया ‘बड़ा’ पदक
मेरठ की स्टार जैवलिन थ्रोअर अन्नू रानी ने वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाकर यह आशा जगा दी थी कि वे राष्टमंडल खेलों में पदक दिला सकती हैं। ठीक वैसा ही हुआ, अन्नू ने 60 मीटर की दूरी नापते हुए जैवलिन थ्रो में पदक जीतने वाली पहली महिला एथलीट बनने का गौरव हासिल किया। हालांकि अन्नू का कॅरिअर चोटों से भरा रहा। टोक्यो ओलंपिक के दौरान घुटने की चोट के कारण उन्हें लंबे समय तक बाहर रहना पड़ा। मैदान में उनकी वापसी शानदार रही, लेकिन वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने से अन्नू का आत्मविश्वास बढ़ गया और परिणाम कांस्य के रूप में सामने आया। अन्नू रानी (मेरठ- भाला फेंक- कांस्य पदक)
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दिव्या काकरान। - फोटो : amar ujala
पहली हार से हारी नहीं
राष्ट्रमंडल खेलों में महिला पहलवानों के चमकदार प्रदर्शन में यूपी की दिव्या काकरान का नाम भी शामिल रहा। मूल रूप से मुजफ्फरनगर की रहने वाली पहलवान का सामना पहले दौर में टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता नाइजीरिया की ब्लेसिंग से हो गयाए जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ाए लेकिन ब्लेसिंग द्वारा स्वर्ण जीतने पर दिव्या को रेपचेस में मौका मिला। यहां दिव्या ने शानदार खेल दिखाया और अगले दोनों मुकाबले आसानी से जीतने हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। प्रदर्शन के लिहाज से दिव्या अपने प्रदर्शन में सुधार करने से चूक गईं और पिछले गोल्डकोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों की तरह कांस्य ही जीत पाई। दिव्या काकरान (मुजफ्फनगर- कुश्ती- कांस्य पदक)
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वंदना कटारिया। - फोटो : amar ujala
महिला हॉकी टीम को 16 साल बाद दिलाया कांस्य
बर्मिंघम में भारतीय महिला टीम में सबसे अनुभवी खिलाड़ी के तौर पर भाग लेने गई वंदना कटारिया ने शानदार खेल दिखाया। फारवर्ड के रूप में वंदना ने टीम की अग्रिम पंक्ति की बेहतरीन ढंग से अगुवाई की, जिसकी बदौलत टीम 16 साल बाद कांस्य पदक जीतने में सफल रही। मेरठ की रहने वाली वंदना ने टीम से सभी छह मैच खेलकर चार गोल दागे। इसके अलावा उन्होंने टीम के लिए कई ऐसे मूव भी बनाएए जिसकी बदौलत भारत गोल करने में भी सफल रहा। आगे भी महिला टीम प्रबंधन को वंदना से लगातार ऐसे ही प्रदर्शन की उम्मीद होगी। वंदना कटारिया (मेरठ- हॉकी कांस्य)

बर्मिंघम में भाग लेने वाले अन्य खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर एक नजर
सीमा पुनिया (मेरठ)- डिस्कस थ्रो में पांचवां स्थान
पूनम यादव (वाराणसी)- वेटलिफ्टिंग (76 किग्रा) में कोई स्थान नहीं
पूर्णिमा पांडेय (वाराणसी)- वेटलिफ्टिंग (87+ किग्रा) में छठा स्थान
रोहित यादव (मिर्जापुर)- भाला फेंक में छठा स्थान
सरिता सिंह (अमरोहा)- हैमर थ्रो में 13वां स्थान

राष्टमंडल खेलों में प्रतिभाग और पदक विजेता के लिए यूपी सरकार की घोषणा
(व्यक्तिगत और टीम वर्ग में समान राशि का प्रावधान)
प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ी को पांच लाख रुपये
कांस्य जीतने पर 50 लाख रुपये
रजत जीतने पर 75 लाख रुपये
स्वर्ण जीतने पर डेढ़ करोड़ रुपये
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