चार साल पहले मुंबई में हुए स्कूली क्रिकेट टूर्नामेंट (हैरिशशील्ड कप) में 546 रन की मैराथन पारी खेलकर सुर्खियों में आए पृथ्वी शा ने दलीप ट्रॉफी फाइनल में भी अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे। अभी तक कॅरिअर में महज दो प्रथम श्रेणी मैच खेलने वाले 17 वर्षीय इस युवा क्रिकेटर ने इशांत शर्मा, पंकज सिंह, जयदेव उनादकट जैसे पेसर के अलावा भार्गव भट्ट जैसे सरीखे स्पिनर को आसानी से खेलते हुए शतक (154 रन) ठोककर इंडिया रेड के लिए बड़ी आधारशिला रखी।
दूसरे छोर पर कप्तान कार्तिक ने बेहतरीन अंदाज में शतक (111 रन) जड़कर ब्ल्यू के कप्तान सुरेश रैना को सोचने पर मजबूर कर दिया। हालांकि बाद मे ये दोनों ही बल्लेबाज महज 15 गेंदों के बीच आउट हो गए। मैच के अंतिम 15 मिनट में ब्ल्यू के खिलाड़ियों ने दमदार वापसी की और कार्तिक, पृथ्वी शा, बाबा इंद्रजीत को आउट करने में सफलता हासिल की। पहले दिन का खेल खत्म होने तक इंडिया रेड ने पांच विकेट खोकर 317 रन बना लिए। इकाना स्पोर्ट्स स्टेडियम में मुकाबले के पहले दिन इंडिया ब्ल्यू के कप्तान दिनेश कार्तिक ने टास जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया।
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सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शा के साथ अखिल हरवाडेकर ने सधी हुई शुरुआत की। लेकिन हरवाडेकर और शा के बीच रन को लेकर कुछ गलतफहमी हुई और यहां उनादकट ने फुर्ती दिखाते हुए हरवाडेकर को रनआउट कर दिया। तीसरे क्रम पर बल्लेबाजी करने आए कुछ खास नहीं कर पाए और आठ रन के निजी योग पर भट्ट की गेंद पर स्लिप पर रैना द्वारा लपके गए।
89 रन पर दो विकेट खोने के बाद कप्तान कार्तिक मैदान पर उतरे और पृथ्वी के साथ थोड़ी मुश्किल दिख रही विकेट पर टिककर बल्लेबाजी करते हुए रैना के लिए मुश्किलें बढ़ा दी। इस दौरान पृथ्वी ने 137 गेंदों पर 12 चौके और एक छक्के की मदद से अपना शतक पूरा किया। दूसरे छोर पर दिनेश कार्तिक ने अपना शतक पूरा करने के लिए 149 गेंदों का सामना किया और 10 चौके जड़े।
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इस दौरान ब्ल्यू के गेंदबाज पूरी तरह बेदम दिखे, जिसका फायदा उठाते हुए पृथ्वी शा ने डेढ़ सौ का आंकड़ा पार कर लिया। मैच के आखिरी पांच ओवर रेड के लिए बुरे सपने की तरह रहे। यहां पहले दिनेक कार्तिक (111 रन), पृथ्वी शा (154 रन) और बाबा इंदरजीत (4 रन) एक के बाद एक करके पवेलियन लौट गए। ब्ल्यू की ओर से भार्गव भट्ट सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने 83 रन देकर तीन विकेट हासिल किए।