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लखनऊ में शूटिंग से लोकल कलाकारों की बल्ले-बल्ले, ठेले वालों समेत इनकी भी है काफी डिमांड

Tue, 02 Jul 2019 04:41 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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शूटिंग के दौरान लोकल कलाकारों के बीच मिर्जा बने अमिताभ बच्चन - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ की सड़कों, गलियों और खूबसूरत लोकेशनों पर इन दिनों शूटिंग का दौर शबाब पर है। शूटिंग के चलते अगले डेढ़ से दो महीनों तक बड़े कलाकारों के साथ लोकल कलाकारों की भी बल्ले-बल्ले रहेगी। अमिताभ बच्चन, आयुष्मान खुराना, पंकज त्रिपाठी जैसे बड़े कलाकारों की शूटिंग के साथ ही नगर के तमाम लोकल और क्राउड आर्टिस्ट जून से व्यस्त है और अगले दो माह तक व्यस्त रहेंगे। उधर, कई अनाम फिल्मों को लेकर गुपचुप तरीके से ऑडिशन का दौर भी जारी है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक अगस्त तक के शूटिंग शिड्यूल में हर दिन औसतन 50 से 80 क्राउड आर्टिस्ट की डिमांड कई प्रोडक्शन क्रू की ओर से आ रही है। जैसे-जैसे फिल्में बढ़ती जाएंगी, इनमें इजाफा होता जाएगा।
 
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अमिताभ बच्चन - फोटो : amar ujala
बच्चन की मूवी के लिए हर दिन घट-बढ़ रही डिमांड
पुराने शहर में अमिताभ बच्चन-आयुष्मान खुराना की फिल्म की शूटिंग जारी है। इनके साथ रोजाना 10 से 12 सीनियर आर्टिस्ट भी इनडोर और आउटडोर शूटिंग में काम कर रहे हैं, जो नगर के जाने माने थियेटर, मूवी, टीवी धारावाहिक चेहरे हैं। इनके अलावा हर दिन क्राउड के लिए भी 40 से 50 कलाकारों की जरूरत होती है। क्रू यूनिट के मुताबिक चूंकि मुख्य किरदार अमिताभ बच्चन हैं तो जब उनका आउटडोर शूट होता है तो उसी के अनुसार निर्देशक के कहने पर बैकग्राउंड फ्रेम भरना रहता है। अभी शूट का जून का शिड्यूल पूरा हुआ है। शूट जुलाई, अगस्त में शहर की इधर-उधर की लोकेशन पर होगा तो डिमांड और बढ़ेगी।
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शूटिंग - फोटो : अमर उजाला
वेबसीरीज के लिए हर दिन 100 से अधिक क्राउड कलाकार की डिमांड
बॉलीवुड में कालीन भैया के नाम से चर्चित हो चुके पंकज त्रिपाठी, अली फजल की हिट वेबसीरीज के दूसरे भाग का शूट जारी है। इसके लाइन प्रोड्यूसर का काम देख रहे सुधांशु सावंत के मुताबिक शहर के वरिष्ठ कलाकार भी इसमें शामिल हैं। अब अधिकतर शूटिंग आउटडोर में होगी। इसमें रोजाना 80 से 100 क्राउड आर्टिस्ट की जरूरत पड़ेगी। जैसे-जैसे शूट आगे बढ़ेगा ये डिमांड 25 से 40 तक और बढ़ेगी। शूटिंग महीने भर चलेगी। कुछेक सीन के लिए तो 200 से 300 लोगों की जरूरत पड़ेगी।

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अमिताभ बच्चन - फोटो : amar ujala
कम बजट की मूवी आगे हुई शिफ्ट
शहर में चल रही दो बड़े प्रोजेक्ट की मूवी में लगातार क्राउड आर्टिस्ट की डिमांड के चलते कम बजट की आधा दर्जन से अधिक मूवी की शूटिंग शिड्यूल आगे शिफ्ट किया गया है। मुंबई से जुड़े कुछ प्रोडक्शन हाउस अप्रैल-मई में ऑडिशन कर चुके थे और जुलाई में शूटिंग शुरू करनी थी, लेकिन लोकल व क्राउड आर्टिस्टों की कमी के चलते फिल्म की शूटिंग अगस्त में शिफ्ट कर दी गई है। युवा रंगकर्मी मुकेश वर्मा ने बताया कि उन्हें अपनी कला फिल्म की शूटिंग लखनऊ में ही करनी है। मुख्य किरदारों के अलावा क्राउड कलाकारों की भी इसमें जरूरत पड़ेगी। लेकिन इन दिनों लोकल कलाकारों की व्यवस्तता के चलते अपना शिड्यूल आगे सरकाना पड़ा। अब कुछ हफ्तों बाद काम शुरू करवाया जाएगा, बात नहीं बनी तो किसी और शहर की लोकेशन पर भी जाना पड़ सकता है।
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अमिताभ बच्चन - फोटो : amar ujala
ठेले वालों से तांगे वालों तक की डिमांड
एक बड़े प्रोडक्शन हाउस से जुड़े सहायक लाइन प्रोड्यूसर हैदर बताते हैं कि क्राउड आर्टिस्ट (मुख्य कलाकार के साथ भीड़ व बैकग्राउंड में दिखने वाले) वो कलाकार हैं, जिनसे शायद ही शूट के दौरान मुख्य कलाकार से सीधा संवाद हो। वे फ्रेम में रहेंगे या नहीं रहेंगे, बोलेंगे या नहीं बोलेंगे, हिलेंगे या नहीं... सिवाय निर्देशक के किसी को कुछ नहीं पता होता। कितनी समय के लिए इनकी जरूरत होगी, यह भी निर्देशक तय करता है। ऐसे कलाकारों की इन दिनों काफी डिमांड है। इनका एक दिन का चार्ज भी एक से तीन हजार तक पहुंच गया है। हाल ही में एक शूट में चार दर्जन इक्के तांगे, ठेले वालों का इंतजाम अचानक करना था। चार घंटों के लिए दूसरे स्थान पर उनके अड्डे से उन्हें वहां बुलाकर लाया गया। भले ही उन्होंने कैमरा फेस न किया हो, लेकिन वो अपना काम छोड़कर आए, चार्ज तो लेंगे ही।
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शूटिंग - फोटो : अमर उजाला
रजनीकांत, संजय दत्त, अक्षय कुमार भी सैकड़ों के साथ कर चुके हैं शूट
बीते साल रजनीकांत और संजय दत्त की मूवी की शूटिंग हुई। दोनों ही कलाकारों की फिल्मों में सीन की मांग कुछ ऐसी थी कि रात के एक सीन में तो रजनीकांत के साथ 500 से अधिक क्राउड आर्टिस्ट ने काम किया। अक्षय कुमार अभिनीत मूवी में दो से ज्यादा वकीलों की जरूरत थी तो आग्रह पर कचहरी के असली वकील भी हिस्सा बने। संजय दत्त की फिल्म में हड़ताल, प्रदर्शन, छात्र आंदोलन, पार्टी वर्कर्स का हुजूम को लेकर 200 से 400 की डिमांड हुई। एक बड़ी फिल्म में काम कर चुके लाइन प्रोड्यूसर के मुताबिक जैसे सीन चेहरों की डिमांड होती है उसी के हिसाब से स्कूल-कॉलेज से या फिर लेबर ठेकेदार, बाजार से लोगों को बुला लिया जाता है, काम चल जाता है। बाकी सीन की डिमांड से कई बार थियेटर से जुड़े लोगों की मदद भी ली जाती है।
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