राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी और सरकार ने मंगलवार को यहां दिन भर मनन-मंथन के बाद योगी सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल किए जाने वाले चेहरों को मंजूरी दे दी है। पहले मंत्रिमंडल विस्तार के जरिये न सिर्फ जातीय बल्कि क्षेत्रीय संतुलन साधने की तैयारी है बल्कि भाजपा की झोली में अच्छी संख्या में सीटें डालने के बावजूद मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी पाने से वंचित रहे आगरा और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों से भी मंत्री बनाकर लोगों को यह संदेश देने का भी प्रयास है कि पार्टी को मजबूत बनाने वालों की अनदेखी नहीं की जाएगी। साफ-सुथरी और परिणाम देने वाली कुछ चेहरे संगठन से भी सरकार में भेजने की तैयारी है, वहीं कुछ चेहरों को बाहर का रास्ता दिखाने का भी फैसला किया गया है। इनमें से कुछ ने तो त्यागपत्र भी दे दिया है। कुछ के बुधवार सुबह तक त्यागपत्र हो जाने के संकेत हैं।
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अनुप्रिया पटेल (भाजप-अपना दल गठबंधन), रामचरित्र निषाद (गठबंधन) और ललितेशपति त्रिपाठी (कांग्रेस)
- फोटो : अमर उजाला
अपना दल को भी हिस्सेदारी
जानकारी के मुताबिक, एक दर्जन से अधिक नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा तो आधा दर्जन से ज्यादा मंत्रियों को तरक्की देकर कैबिनेट और राज्यमंत्री बनाने का फैसला किया गया है। इनमें पांच स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्रियों को तरक्की देकर कैबिनेट तथा तीन-चार राज्यमंत्रियों को तरक्की देकर स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री बनाने का निर्णय किया गया है। एक राज्यमंत्री को भी कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। लगभग आधा दर्जन ऐसे मंत्रियों जिनके कामकाज को लेकर विवाद रहे हैं या जिनका प्रदर्शन ठीक नहीं रहा है, उन्हें विदाई देने की जानकारी है। सरकार से बाहर जाने वाले चेहरे छह हो सकते हैं। विस्तार में अपना दल के कार्यकारी अध्यक्ष आशीष सिंह पटेल को भी कैबिनेट मंत्री बनाने के संकेत हैं।
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स्वतंत्रदेव सिंह
- फोटो : सोशल मीडिया
इनको हिस्सेदारी देने की तैयारी
योगी सरकार के गठन के समय बुंदेलखंड से दो मंत्रियों को शामिल किया गया था। स्वतंत्रदेव सिंह के त्यागपत्र के बाद यहां से सिर्फ एक मंत्री सरकार में है जबकि बुंदेलखंड की सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा है। इस क्षेत्र को अहमियत देने का संदेश देने के लिए यहां से दो और मंत्री बनाने की तैयारी है। जानकारी के मुताबिक इनमें चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय का नाम तय हो चुका है। इसके अलावा रामरतन कुशवाहा और जवाहर राजपूत में भी किसी को मंत्री बनाया जा सकता है। आगरा और मुजफ्फरनगर की सभी सीटों पर जीत के बावजूद मंत्रिमंडल में अभी तक यहां की हिस्सेदारी नहीं थी। विस्तार में दोनों ही स्थानों से दो-दो चेहरों को शामिल करने की तैयारी है। आगरा की कैंट सीट से विधायक जीएस धर्मेश और फतेहपुर सीकरी से विधायक चौधरी उदयभान को मंत्रिमंडल में लेने की जानकारी मिली है। धर्मेश के जरिये जहां मंत्रिमंडल में जाटव बिरादरी को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश है तो उदयभान के जरिये जाट समाज का प्रतिनिधित्व बढ़ाने का फैसला किया गया है।
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सीएम को पत्र देतीं विधायक नीलिमा कटियार
मुजफ्फरनगर से विजय कश्यप और कपिल देव अग्रवाल को मंत्रिमंडल में लेकर न सिर्फ इस जिले को हिस्सेदारी देने की तैयारी है बल्कि अगड़ा और पिछड़ा समीकरण को भी और दुरुस्त किया जाएगा। बुलंदशहर से अनिल शर्मा को भी मंत्रिमंडल में जगह देकर पश्चिमी क्षेत्र के समीकरण दुरुस्त करने का फैसला किया गया है। कानपुर की गोविंदनगर सीट से विधायक और योगी सरकार में मंत्री सत्यदेव पचौरी के सांसद चुने जाने के कारण कानपुर कोटे के मंत्रियों में आई कमी को दूर करने के लिए गोविंदनगर के बगल की कल्याणपुर सीट से विधायक नीलिमा कटियार को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। काशी क्षेत्र के वाराणसी उत्तरी से विधायक रवींद्र जायसवाल को मंत्री बनाने की चर्चा है। मिर्जापुर के मड़िहान से रमाशंकर पटेल का भी मंत्री बनना तय माना जा रहा है।
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पंकज सिंह
इन्हें भी मिल सकता है इनाम
भाजपा के प्रदेश महामंत्री और एमएलसी अशोक कटियार को मंत्री बनाकर मंत्रिमंडल में गुर्जर प्रतिनिधित्व देने की तैयारी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में रहने वाली इस जाति का अभी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं है। नोएडा से विधायक और पार्टी महामंत्री पंकज सिंह, विजय बहादुर पाठक और विद्यासागर सोनकर के भी नाम चर्चा में हैं। हालांकि इनकी पुष्ट नहीं हो पाई है। ब्रज क्षेत्र में यादव परिवार के गढ़ मैनपुरी को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति के तहत यहां की भोगांव सीट से विधायक रामनरेश अग्निहोत्री और लोकसभा चुनाव में बदायूं संसदीय सीट भाजपा की झोली में डालने का इनाम देने के लिए बदायूं से विधायक महेश गुप्त को भी मंत्रिमंडल में शामिल करने की जानकारी मिली है। ब्रज क्षेत्र के ही अलीगढ़ से विधायक संजीव राजा को भी मंत्री बनाया जा सकता है।
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आनंद स्वरूप शुक्ल
- फोटो : ballia
वहीं, अवध क्षेत्र में रायबरेली के दलबहादुर कोरी को मंत्री बनाकर भाजपा कांग्रेस के इस गढ़ में विकास और सरोकार की चिंता का संदेश दे सकती है। गोरखपुर क्षेत्र में विधानसभा चुनाव के दौरान 2017 में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय को पराजित करने वाले सतीश द्विवेदी का भी मंत्री बनाकर इनाम देने का फैसला किया गया है। गोरखपुर क्षेत्र की ही बलिया सदर सीट से विधायक आनंद स्वरूप शुक्ल को भी मंत्रिमंडल में शामिल करने का फैसला किया गया है। गोरखपुर की चौरीचौरा सीट से विधाययक संगीता यादव को भी मंत्री बनाने की तैयारी है। गोरखपुर क्षेत्र में ही संतकबीरनगर में घनघटा सीट से विधायक श्रीराम चौहान को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा रहा है। कानपुर क्षेत्र में फर्रुखाबाद से सुशील शाक्य को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। इसके अलावा फतेहपुर की कृष्णा पासवान, विपिन डेविड के नाम की भी चर्चा है।
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मंत्री सुरेश राणा
- फोटो : Amar Ujala
इन्हें मिल सकती है तरक्की
राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार सुरेश राणा, उपेंद्र तिवारी, चौधरी भूपेंद्र सिंह, डॉ. महेंद्र सिंह और अनिल राजभर को तरक्की देकर कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। जयप्रकाश निषाद, गिरीश यादव, नीलकंठ तिवारी, संदीप सिंह सहित कुछ राज्यमंत्रियों को स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री बनाकर इन क्षेत्रों को महत्व देने का संदेश दिया जा सकता है। इससे पहले संघ के सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार और आलोक कुमार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा सहित कुछ अन्य प्रमुख लोगों ने चिनहट में एक होटल में दिन भर विचार-विमर्श कर नामों को अंतिम रूप दिया।
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एमएलसी आशीष सिंह पटेल और अनुप्रिया
जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश
भाजपा ने योगी सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। पांच मंत्रियों के इस्तीफे के बाद उनकी जाति और क्षेत्रों को संतुष्ट करने पर फोकस किया है। लोधी जाति के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह से इस्तीफा लेकर अनिता लोधी को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा रहा है। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल का इस्तीफा लेकर वाराणसी शहर उत्तरी से विधायक रवीन्द्र जायसवाल को मंत्रिमंडल में जगह दी जा रही है। वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल का इस्तीफा लेकर महेश चंद गुप्ता और कपिलदेव अग्रवाल को मंत्रिमंडल में जगह देकर वैश्य समाज को संतुष्ट करने की कोशिश की गई है। कन्नौज की अर्चना पांडेय से इस्तीफा लेकर विधायक सुशील शाक्य को मंत्री बनाया जा रहा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के इस्तीफे केबाद कुर्मी समाज की भाजपा प्रदेश महामंत्री नीलिमा कटियार, अपना दल के आशीष पटेल और रामशरण पटेल को भी मंत्रिमंडल में शामिल कर कुर्मी समाज को साधा गया है।
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पीएम मोदी का स्वागत करते सीएम योगी
- फोटो : ANI
साफ-सुथरी सरकार के एजेंडे के लिए कड़ी सर्जरी का संदेश
योगी सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार को कई मायने में अहम माना जा रहा है। योगी करीब ढाई वर्ष के कार्यकाल में लगातार साफ-सुथरी सरकार के दावे पर सरकार के भीतर से ही चुनौती पा रहे थे। कभी ब्यूरोक्रेशी से तो कभी अपने मंत्रिपरिषद के सहयोगियों से। लोकसभा चुनाव के बाद सीएम ने ब्यूरोक्रेशी के खिलाफ जो कार्रवाई शुरू की थी वह मंत्रिपरिषद के भीतर बड़ी सर्जरी के साथ सामने आई है। इसे सरकार के बाकी कार्यकाल के लिए बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
भाजपा सरकार के सत्ता में आने पर लोगों ने बड़ी उम्मीदें की थीं। सरकार ने उन उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए तमाम बड़े बदलाव किए। इसमें भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की जांच और कार्रवाई की पहल की। लेकिन बीच-बीच में ऐसे घटनाक्रम होते रहे जिससे सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त सरकार के दावों पर सवाल उठे। मसलन, कई मंत्रियों के निजी सचिवों की अनपेक्षित गतिविधि की शिकायतें मिलीं। मंत्रियों ने कोई कार्रवाई नहीं की तो उनकी भूमिका पर भी संदेह बढ़ा। आखिरकार योगी के निर्देश पर कई मंत्रियों के निजी सचिव हटाए गए। कई मंत्रियों के निजी सचिवों का स्टिंग हुआ। इसमें सरकार की काफी किरकिरी हुई। कई निजी सचिव स्टिंग के बाद जेल तक चले गए।
अब योगी ने इनमें से दो मंत्रियों का इस्तीफा ले लिया है। सिंचाई विभाग में सब कुछ ठीक न होने की चर्चा थीं। लेकिन मंत्री इससे बेपरवाह रहे। सीएम ने चर्चित छवि के मंत्रियों को हटाकर अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों को साफ संकेत कर दिया है कि ‘पब्लिक परसेप्शन’ उनके लिए काफी अहम है। जनता के बीच विभाग व व्यक्ति की अच्छी छवि सबसे ऊपर है। यह बदलाव इस बात का भी संकेत है कि सरकार की छवि के लिए जिम्मेदार लोगों से योगी अब किसी भी स्तर पर मुरव्वत नहीं बरतेंगे। शिकायत पर सरकार पूरी सख्ती करेगी। गवर्नेंस में सुधार व बेहतर बदलाव की रफ्तार पर ध्यान देने वाले ही सरकार के साथ चल पाएंगे।