फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

योगी ने लगाया पारिजात का पौधा, क्या आपको पता है इस पेड़ से जुड़ी एक अधूरी प्रेम कहानी?

Mon, 05 Jun 2017 05:31 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
1 of 9
पौधरोपण करते सीएम आद‌ित्यनाथ
यूपी के सीएम आदित्यनाथ योगी ने पर्यावरण दिवस पर पारिजात का पौधा लगाया है। इतना ही नहीं पृथ्वी को बचाने के ल‌िए सभी से ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने साथ ही उनका संरक्षण करने का भी आग्रह किया। सीएम ने जो पौधा लगाया वो कोई मामूली पौधा नहीं है। इसे कल्पवृक्ष भी माना जाता है। इस पौधे के साथ पौराणिक मान्यताएं जुड़े होने के साथ कई वैज्ञानिक महत्व भी जुड़े हैं। आइए यहां जानें...
विज्ञापन

2 of 9
पार‌िजात
यूपी के बाराबंकी जिला मुख्यालय से 38 किमी दूर किंटूर गांव में स्थित गांव में पारिजात का पेड़ है। मंगलवार के दिन लोग इस पेड़ की पूजा करने और मनोकामनाएं मांगने आते हैं। हरिवंश पुराण के मुताबिक ये इसे कल्पवृक्ष माना जाता है जो सभी मनोकामनाएं पूरी करता है।

 
विज्ञापन

3 of 9
पार‌िजात
माना जाता है इस गांव का नाम किंटूर कुंती के नाम पर पड़ा था। मान्यता है कि पांडवों ने माता कुंती के साथ यहां अपना अज्ञातवास बिताया था। किंटूर में स्थित लंबे-चौड़े पारिजात की ज्यादातर शाखाएं मुड़ी हुई हैं। ये शाखाएं मुड़कर धरती को छूती हैं। आगे जानें इस पेड़ से जुड़ी बेहद रोचक मान्यताएं...

4 of 9
पार‌िजात
पारिजात वृक्ष को कल्प वृक्ष भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। शास्त्रों में कहा गया है कि मंथन से निकलने के बाद इंद्र देव ने इसे स्वर्ग में अपनी वाटिका में लगाया था।
विज्ञापन

5 of 9
पार‌िजात
इस पेड़ से जुड़ी एक और मान्यता के मुताबिक पारिजात नाम की एक राजकुमारी को भगवान सूर्य से प्यार हो गया था। बहुत कोशिशों के बाद भी सूर्य भगवान ने उसका प्यार स्वीकार नहीं किया। दुखी होकर पारिजात ने आत्महत्या कर ली। जहां पारिजात की समाधि बनाई गई वहां से एक पेड़ उगा जिसका नाम राजकुमारी के नाम पर पारिजात पड़ गया। लोग कहते है कि ये पेड़ सूर्य को देखकर खिल उठता और रात के सूर्य डूबते ही ऐसा लगता है जैसे ये पेड़ रो रहा है।
विज्ञापन

6 of 9
पार‌िजात
ऐसा माना जाता है कि परिजात के वृक्ष को जो भी इसे एक बार छू लेता है उसकी थकान मिनटों में गायब हो जाती है। हरिवंशपुराण के अनुसार इंद्र की अप्सरा उर्वशी परिजात के वृक्ष को छूकर ही अपनी थकान मिटाती थी। आगे पढ़ें कृष्ण और रुक्म‌िणी के प्यार से जुड़ी एक मान्यता...
विज्ञापन

7 of 9
पार‌िजात
पारिजात के फूलों की एक कहानी रुक्मिणी के प्रति श्रीकृष्ण के प्रेम और इस पर सत्यभामा की जलन से जुड़ी है। पौराणिक कथा के मुताबिक एक बार नारद ऋषि इन्द्रलोक से इस वृक्ष के कुछ फूल लेकर कृष्ण के पास गए। कृष्ण ने ये फूल पास बैठी रुक्मिणी को दे दिए। इस बात का पता सत्यभामा को चला तो वह नाराज हो गईं और पारिजात के फूल लाने की जिद करने लगीं।

8 of 9
पार‌िजात
सत्यभामा के रूठ जाने पर कृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ इन्द्रलोक पहुंचे। पहले तो इन्द्र ने यह वृक्ष पृथ्वी लोक के लिए सौंपने से मना कर दिया बाद में उन्हें यह वृक्ष देना पड़ा। जब कृष्ण परिजात का वृक्ष ले जा रहे थे तब गुस्साए इन्द्र ने वृक्ष को यह श्राप दे दिया क‌ि इस वृक्ष के फूल दूर जाकर गिरेंगे। इसलिए वृक्ष लगा तो सत्यभामा की वाटिका में था लेकिन फूल रुक्मिणी की वाटिका में गिरते थे। आज भी ऐसा देखा जा कि पारिजात के फूल पेड़ से दूर जाकर गिरते हैं।
विज्ञापन

9 of 9
पार‌िजात
पारिजात के पेड़ के वैज्ञानिक महत्व भी हैं। कृषि अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों डॉ. अशोक कुमार और डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि यह दुर्लभ प्रजाति का वृक्ष है। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि यह वृक्ष सेमल प्रजाति से मिलता-जुलता है। कई बार सेमल के पेड़ और फूल को लोग पारिजात समझ लेते हैं। विशेष औषधीय गुणों के चलते यह विशेष वृक्ष माना जाता है। ऐसे अन्य वृक्षों की खोज करने के साथ सूची तैयार की जा रही है। इस पेड़ की छाल से लेकर पत्तियां तक आयुर्वेद और औषधियां बनाने में इस्तेमाल की जाती हैं।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें