सरकारें शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती हैं लेकिन इन बच्चों की लगन के आगे सरकार की कोशिशें कमजोर दिखती हैं। यूपी सरकार इन दिनों बच्चों को स्कूल भेजने के लिए स्कूल चलो अभियान चला रही है। ये बच्चे भले ही इस अभियान के बारे में न जानते हों पर अपनी लगन के पक्के हैं। दरअसल, ये दृश्य सीतापुर जिले का है।
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शारदा व घाघरा में आई बाढ़ का कहर स्कूलों पर भी पड़ा है। स्कूल जाने के रास्तों में पानी भरने से विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सीतापुर के रेउसा विकासखंड के चार परिषदीय विद्यालय बाढ़ के पानी की गिरफ्त में आ गए हैं। हालांकि, इन स्कूलों में पानी नहीं भरा है। इससे शिक्षक व नौनिहाल जान जोखिम में डालकर स्कूल तक पहुंच रहे हैं।
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वहीं, लगातार हो रही बारिश से अवध के इलाकों में बाढ़ से हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। गोंडा के करनैलगंज में घाघरा खतरे के निशान से 35 सेमी ऊपर बह रही है। गुरुवार को तहसील के 9 और मजरे बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इस वजह से बाढ़ से प्रभावित गांवों की संख्या बढ़कर 136 हो गई है। (गढ़मुक्तेश्वर में पशुओं के लिए चारा लेकर जातीं महिलाएं।)
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अयोध्या में उफनाई सरयू का जलस्तर गुरुवार को पिछले 24 घंटे से स्थिर रहा। बैराजों से पानी छोड़ने में आई कमी से लाल निशान से चार सेमी. नीचे उफान तो थम गया, मगर कटान जारी है। इससे रुदौली और सदर तहसील इलाकों में सैकड़ों बीघे खेती की भूमि व दर्जनभर मकानों के कटने का खतरा बढ़ गया है।
बहराइच में घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। महसी के साथ कैसरगंज तहसील के 19 गांव अब भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। लोग पलायन कर रहे हैं। कटान भी चल रही है। कटान के कारण महसी तहसील के गोलागंज गांव का अस्तित्व खत्म हो गया।