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मुख्यमंत्री योगी ने महाभारत के पात्रों से की यादव परिवार की तुलना, बोले- पहले चाचा-भतीजे में बंटती थीं सरकारी नौकरियां

Sat, 13 Mar 2021 04:10 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा शासनकाल को भर्तियों में भ्रष्टाचार, परिवारवाद, जातिवाद और योग्यता की उपेक्षा का काल बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में सरकारी पदों पर होने वाली नियुक्तियां एक खानदान के सदस्यों के बीच बांटी जाती थीं। एक नियुक्ति प्रक्रिया कोई चाचा देखता था तो दूसरी किसी भतीजे, मामा या नाना को आवंटित हो जाती थीं। जाति, धर्म और रुपयों की हैसियत ही नौकरी का पैमाना थी। युवा हताश और निराश था। इस खानदान की तुलना महाभारत के पात्रों से करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि जैसे उस काल में काका-मामा-नाना जैसों ने भारत की प्रगति को अवरुद्ध किया, ठीक वैसे ही यह खानदान उत्तर प्रदेश की उन्नति में बाधक बना रहा। उन्होंने कहा है कि आज के उत्तर प्रदेश में केवल योग्यता और मेरिट ही सरकारी नौकरी का आधार है। कोई भी यह नहीं कह सकता कि उसने रुपये देकर या सिफारिश से नौकरी पाई है।
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- फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को लोकभवन में आयोजित बेसिक शिक्षा परिषद में नवचयनित 271 खंड शिक्षा अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में युवाओं से मुखातिब थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से अब तक चार साल में चार लाख सरकारी पदों पर नियुक्तियां हुई हैं। यह 1950 से अब तक किसी भी लगातार चार साल में सर्वाधिक है। कई राज्यों में तो दशकों में इतनी नियुक्तियां नहीं हुई होंगी। अकेले 1.20 लाख नौकरियां केवल बेसिक शिक्षा परिषद में ही हुई हैं। इसी तरह पुलिस विभाग में 1.37 लाख पदों पर नियुक्तियां हुईं। पिछली सरकारों ने पीएसी की 54 कंपनियां बन्द कर दीं, जबकि सुदृढ़ कानून-व्यवस्था के लिए संकल्पित वर्तमान सरकार ने इनके साथ-साथ महिलाओं की भी 03 पीएसी कंपनियां स्थापित कीं।
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- फोटो : amar ujala
बहाल हुई चयन आयोगों व भर्ती बोर्डों की गरिमा
शुचितापूर्ण ढंग से नियुक्ति पाकर बेसिक शिक्षा परिषद में शामिल हुए नवनियुक्त खंड शिक्षा अधिकारियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने चार वर्ष पूर्व तक प्रदेश के विभिन्न चयन आयोगों व भर्ती बोर्डों में भ्रष्टाचार का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर नियुक्ति जाति-मजहब देखकर होती थी। कई बार तो नौकरी देने के साथ-साथ यह लोग अपनी बेटियों-बहनों के लिए वर की तलाश भी कर लेते थे। इन आयोगों की छवि तार-तार हो गई थी। वर्तमान सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी कि उन्हें अपने कार्य के लिए पूर्ण स्वतंत्रता होगी, लेकिन अगर अनियमितता की शिकायत मिली तो पूरे आयोग पर कार्रवाई होगी। इन प्रयासों का नतीजा है कि आज कोई भी यह नहीं कह सकता कि उसने जुगाड़ से नौकरी पाई है।

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- फोटो : amar ujala
कार्यक्रम में सीएम ने युवाओं से पूरी चयन प्रक्रिया के दौरान कहीं भी घूस देने अथवा सिफारिश करने की जरूरत के बारे में भी जानकारी ली, लेकिन सभी युवाओं ने एक स्वर से इस तरह की जरूरत को नकार दिया। नियुक्ति पत्र देते हुए सीएम ने खंड शिक्षाधिकारियों से कहा कि एक प्रतियोगी छात्र के रूप में उन्होंने शासन से जिस कार्यप्रणाली की अपेक्षा की थी, अब सिस्टम का हिस्सा होने के बाद स्वयं उसी अनुरूप कार्य करें।  उन्होंने कहा कि नौकरी ईमानदारी से मिली है तो काम में भी ईमानदारी होनी चाहिए।
 
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योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
अब प्रॉक्सी टीचर नहीं, प्राथमिक शिक्षा का हो रहा कायाकल्प
नवनियुक्त बीईओ को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि टीमवर्क से बीते चार सालों में प्राथमिक शिक्षा का कायाकल्प हुआ है। आज प्रॉक्सी टीचर जैसी समस्या खत्म हो गई है। शिक्षकों का प्रशिक्षण हो रहा है। स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास हुआ है, साढ़े 05 लाख नए बच्चे स्कूल आये हैं। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। अब इन कार्यों को आगे बढ़ाने का काम बीईओ का है।
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- फोटो : amar ujala
उन्होंने कहा कि विकास खंड आपका कमांड एरिया है, वहां की हर शैक्षिक गतिविधि की जिम्मेदारी आप की है। सीएम ने कहा कि बीईओ अपने नवाचारों और अच्छे कार्यों की जानकारी उच्चाधिकारियों को भी दें। उन्होंने कहा कि बीईओ सतत निरीक्षण करते हुए बच्चों-अभिभावकों से सम्पर्क भी बनाएं। बच्चों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का भाव विकसित करें।
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