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'चक्रव्यूह' में नजर आए महाभारत में कृष्ण बने नीतीश भारद्वाज, सीएम योगी ने भी देखा नाटक, तस्वीरें

Mon, 26 Nov 2018 04:23 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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नीतीश भारद्वाज - फोटो : amar ujala
अभिमन्यु चक्रव्यूह में अपने रण कौशल से प्रवेश तो कर जाता है, पर उससे निकल नहीं पाता है। महाभारत में चक्रव्यूह तो महज एक उदाहरण भर है। यह संसार एक चक्रव्यूह है। अभिमन्यु की तरह हर इंसान इसमें फंसा हुआ है। घर, परिवार, समाज, नौकरी, रिश्तों और ऐसे ही तमाम सरोकारों में हम फंसे रहते हैं। इससे उबरने की कोशिश नहीं छोड़नी चाहिए। यह सार है लखनऊ महोत्सव के सांस्कृतिक पंडाल में रविवार को मंचित नाटक चक्रव्यूह का। अतुल सत्य कौशिक के निर्देशन में मंचित इस नाटिका में मुख्य भूमिका अभिनेता नीतीश भारद्वाज ने निभाई। नीतीश महाभारत में चर्चित कृष्ण के किरदार से प्रसिद्धि पाई है।
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नीतीश भारद्वाज - फोटो : amar ujala
 खास बात यह है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाटक का एक दृश्य देखा। मंच पर पहले दृश्य में नीतीश नजर आते हैं, जो कुरुक्षेत्र की धरती से बातचीत करते हैं। कहते हैं- ‘कुरुक्षेत्र की धरती तुझ को नींद नहीं आती क्या, कितना रक्त पिएगी तेरी जीभ थक नहीं जाती क्या’। ‘तेरी व्याकुलता कुछ कम होगी क्या, रक्त पीने की आतुरता कुछ कम होगी’। संवादों को आगे बढ़ाते हुए कहानी युद्ध की रणनीति पर पहुंचती है, जहां दुर्योधन, शकुनि आदि के साथ बैठकर विचार-विमर्श करता है। बेहतरीन लाइटिंग और संगीत के साथ नाटक आगे बढ़ता है।
 
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नीतीश भारद्वाज - फोटो : amar ujala
युद्ध के दौरान भीष्म पितामह को बाण लगने के संवाद का भी मंचन हुआ। ‘आज महाभारत के रण की एक और शाम गुजरी, अर्जुन ने भी बिन गिनती बाण मुझ पर चलाए’। ‘सबने इन बाणों से पीड़ा ली, मगर मैंने सुख पाया’। इस संवाद में अर्जुन के बाणों से घायल भीष्म के चेहरे पर युद्ध की विभीषिका नजर आई। इसके बाद मंच पर युद्ध के दृश्य दिखाए गए। चक्रव्यूह में फंसे अभिमन्यु का द्वंद्व और कौशल का प्रदर्शन हुआ। मंच पर कृष्ण की भूमिका में नीतीश भारद्वाज के अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया। 

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नीतीश भारद्वाज - फोटो : amar ujala
इसके अतिरिक्त अभिमन्यु के रोल में साहिल छाबड़ा, दुर्योधन के किरदार में भानु प्रताप सिंह, युदिष्ठिर के रोल में भरत शर्मा और उत्तरा की भूमिका में सुष्मिता मेहता सहित 15 कलाकारों ने अभिनय किया। बता दें कि नाटक के 80 से अधिक मंचन हो चुके हैं। संसद में भी इसे मंचित किया जा चुका है। 
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लखनऊ महोत्सव - फोटो : amar ujala
 मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने रविवार को ‘लखनऊ महोत्सव-2018’ का उद्घाटन करते हुए कहा कि महोत्सव का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन करना नहीं, बल्कि परंपराओं से जुड़ने का माध्यम है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महोत्सव तो हर साल होता है, लेकिन इस बार का आयोजन खास है, क्योंकि यह अटलजी को समर्पित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ महोत्सव जैसे कार्यक्रमों में प्रदेश के विकास और भावी योजनाओं की झलक भी दिखनी चाहिए। साथ ही ऐसी थीम को भी तरजीह मिलनी चाहिए, जिसके माध्यम से नई के साथ पुरानी परंपराओं के बारे में भी यहां आने वाले लोगों को जानकारी मिल सके।
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लखनऊ महोत्सव - फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री आशियाना स्थित मान्यवर कांशीराम स्मृति उपवन में आयोजित दस दिवसीय लखनऊ महोत्सव का उद्घाटन करने के बाद दर्शकों को संबोधित कर रहे थे। 5 दिसंबर तक चलने वाले इस महोत्सव की विशिष्टता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अटलजी का इस शहर से खास लगाव था। लखनऊ से अटलजी के इसी आत्मीय रिश्ते का सम्मान करते हुए इस वर्ष यह महोत्सव अटलजी की स्मृति में आयोजित हो रहा है। इसीलिए इस बार महोत्सव की थीम ‘अटल संस्कृति, अटल विरासत’ रखी गई है। उन्होंने कहा महोत्सव की थीम ऐसे होनी चाहिए, जिसकी झलक पूरे देश को देखने को मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन हर जिले में होने चाहिए।
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लखनऊ महोत्सव - फोटो : amar ujala
इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित, मुख्यमंत्री, पर्यटन मंत्री प्रो. रीता बहुगुणा जोशी, विधि एवं कानून मंत्री बृजेश पाठक, प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन, मेयर संयुक्ता भाटिया व महिला कल्याण राज्य मंत्री स्वाति सिंह ने दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का उद्घाटन किया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। प्रो. रीता बहुगुणा जोशी ने विधानसभा अध्यक्ष व मुख्यमंत्री समेत सभी अतिथियों का स्वागत किया। अपर मुख्य सचिव पर्यटन अवनीश अवस्थी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
 
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