फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सड़क किनारे बिक रहे दुर्लभ कछुए, वन विभाग की टीम ने मारा छापा, एक को दबोचा

Mon, 26 Nov 2018 03:08 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
1 of 5
बरामद पचेड़ा देशी कछुए - फोटो : amar ujala
घरों में एक्वेरियम में सजाने के लिए बेचे जाने वाले दुर्लभ प्रजाति के कछुओं की खेप लखनऊ के इंदिरानगर में रविवार को पकड़ी गई। खुफिया ऑपरेशन में वन विभाग की टीम ने छापा मारा और विक्रेता को दबोच लिया। वन विभाग की टीम को सूचना मिली थी कि शहर में कई स्थानों पर प्रतिबंधित कछुए बेचे जा रहे हैं। वन विभाग ने पुलिस के साथ मिलकर मुंशीपुलिया के पास छापा मारकर सीतापुर निवासी राधेश्याम को धर दबोचा।
विज्ञापन

2 of 5
बरामद पछेड़ा देशी कछुए - फोटो : amar ujala
आरोपी सड़क किनारे कांच के जार में मछलियों के साथ प्रतिबंधित कछुए बेच रहा था। उसके पास से टीम ने  ‘कछुगा टेक्टा-पंगशुरा टेक्टा (पचेड़ा देशी नाम) प्रजाति के 10 नर कछुए बरामद किए हैं। उसके दो सहयोगी टीम के पहुंचते ही मौका देखकर भाग निकले। सभी बरादम कछुए 6 से 8 सेमी. तक के आकार के हैं और व्यस्क हैं। इनकी उम्र दो साल से अधिक बताई जा रही है।
 
विज्ञापन

3 of 5
बरामद पचेड़ा देशी कछुए - फोटो : amar ujala
सीतापुर के गांव से लाए जाते हैं 
पकड़े गए राधे श्याम ने वन अधिकारियों को बताया कि वो कछुए सीतापुर के गांवों से लेकर आता था, यहां सिसगोमती और ट्रंासगोमती के एक्वेरियम वाले 500 से 800 रुपये प्रति पीस तक खरीदते थे। 
पकड़े गए तो सात साल की जेल
डीएफओ अवध मनोज कुमार सोनकर ने बताया कि पकड़ी गई खेप दुर्लभ प्रजाति की है, जिन्हें शेड्यूल वन श्रेणी में रखा गया है। लोग इन्हें पालकर अनजाने में अपराध करते चले जा रहे हैं। वन विभाग की जांच में मामला पकड़े जाने पर ऐसे मामले में सात साल की जेल की सजा का प्रावधान है।
 

4 of 5
बरामद पचेड़ा देशी कछुए - फोटो : amar ujala
अब होगी शहर भर में जांच, फिर कार्रवाई
डीएफओ अवध मनोज कुमार सोनकर ने बताया कि अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि सभी एक्वेरियम-मछली विक्रेताओं की जांच की जाए। पूछताछ में सामने आया है कि लखनऊ में इसकी बड़ी मांग रहती है। खासतौर पर मछली विक्रेताओं के यहां से। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
बरामद पचेड़ा देशी कछुए - फोटो : amar ujala
बढ़ा कछुए पालने का शौक
कछुओं केसंरक्षण पर लंबे समय से काम कर रही विशेषज्ञ अरुणिमा सिंह के मुताबिक कछुओं की तस्करी-बिक्री महानगरों के अलावा विदेशों में भी बढ़ी है, क्योंकि इन्हें लोग कुत्तों, बिल्लियों, मछलियों और पक्षियों की ही तरह पालने लगे हैं। प्रजाति के हिसाब सेलोग इनके लिए 20 से 30 हजार तक के दाम चुकाते हैं। कछुगा टेक्टा-पंगशुरा टेक्टा प्रजाति तो आकार के लिहाज से खास है, क्योंकि इनका साइज बहुत ही छोटा रहता है। ऐसे में घरों में छोटे एक्वेरियम में रखे जा सकते हैं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें