जिस घर से जुड़ी थी जिंदगी भर की यादें, उसको खाली करते भर आईं आंखें
भीखमपुर में बुधवार को नजारा बदला था। घर खाली करते लोगों के लिए ये बेहद भावुक क्षण था। जिस घर में बच्चे जन्मे, बड़े हुए, शादी-ब्याह हुए, उसकी यादों को छोड़कर जाना किसी के लिए आसान नहीं था। दिल भारी था, आंखें नम थीं। कई परिवार तो ऐसे हैं, जो यहां 60-70 साल से रह रहे थे।
-टूटने वाले घरों से पूरे दिन परिवार दरवाजा-चौखट, खिड़की आदि निकालते रहे। इसी बीच सहानुभूति जताने नाते-रिश्तेदार भी पहुंचे, जो घरों की दुर्दशा को देख करके रोते-बिलखते नजर आए।
- घर छूटने से आहत कपिल मौर्या ने बताया कि हमें तो अब बच्चों की पढ़ाई की चिंता है। यहां रहने वाले परिवारों के बच्चे महानगर, इदिरानगर, गोमतीनगर, हजरतगंज क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ते हैं। नए घर से ये इलाके काफी दूर हैं। ऐसे में उनकी पढ़ाई कैसे होगी? वहीं, कुछ लोग अफसोस जताते दिखे कि जिनको वोट दिया वे मदद के लिए नहीं आए।