जमा लोगों की भीड़ व मौजूद एसपी सिटी (फाइल फोटो)
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24 घंटे भी नहीं निभा सके साथ
एक-दूजे का हाथ थामकर संग जीने-मरने की कसमें खाने वाले जोड़े अपने इन वचनों को 24 घंटे भी नहीं निभा सके। वैवाहिक जीवन में प्रवेश करते ही सुहाग बचा न सुहागन। अब बंद कमरे में हुई इन मौतों का जवाब कौन देगा, हर किसी के जेहन में यही सवाल है।
मुरावन टोला निवासी भग्गन की मौत काफी पहले हो गई थी। उनके बेटों दीपक और प्रदीप के कंधों पर जिम्मेदारियां बचपन से आ गईं। दीपक ने ट्रक मैकेनिक का काम शुरू किया तो प्रदीप ने टाइल्स लगाना सीखा। मेहनत से दोनों ने गरीबी को मात दी और परिवार की माली हालत सुधारी।