इनका यही कहना था कि काम कुछ भी करवा लो, लेकिन नौकरी दे दो। वो बिना गमबूट के ही नाला साफ करने के लिए उतर गए।
कभी वह पल्लू संभाल रही थीं तो कभी झाड़ू। सफाई कर्मी का इंटरव्यू देने के लिए गोंडा से आई रुचि शर्मा को जब झाड़ू देकर सड़क पर सफाई करने को कहा गया तो उनकी यही स्थिति थी। उनके पति रामकुमार शर्मा भी उनके साथ आए थे।
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उन्होंने झाड़ू पकड़ तो ली, लेकिन जब सड़क पर लगाने को कहा गया तो झिझक उनके चेहरे पर साफ देखी जा सकती थी। दो बार मौका देख उन्होंने झाड़ू को किनारे टिकाया भी, पर जब देखा कि फोटो खींची जा रही है, तो वह फिर झाड़ू लेकर जुट ही गईं।
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वहीं दूसरी तरफ समाजशास्त्र से एमए करने वाली अंजू निषाद को भी जब झाड़ू पकड़ाई गई तो वह झिझकी मगर बात सरकारी नौकरी की थी तो फिर वह पीछे नहीं हटीं। बीए के साथ आईटीआई करने वाले अमित सोनी भी पहले तो नाला की सफाई से हिचके मगर कोई और विकल्प न देख फिर सफाई में लग गए।
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नगर निगम में संविदा सफाई कर्मचारियों के 3140 पदों पर भर्ती के लिए गुरुवार से परीक्षा शुरू हो गई। नौकरी के लिए पांच लाख लोगों ने आवेदन किया है। पहले दिन 200 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। 128 अभ्यर्थी ही पहुंचे और इनमें से पांच ने उपस्थिति तो दर्ज कराई लेकिन नाला सफाई से पहले परीक्षा छोड़ चले गए।
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भर्ती के लिए बनाए गए नियम के तहत पुरुष अथ्यर्थियों को नाले की सफाई करनी है और महिला अभ्यार्थ्यों को झाड़ू लगाकर दिखानी है। परीक्षा के लिए चार स्थान बनाए गए थे। इनमें प्राग नारायन रोड पर जयप्रकाश नगर, बीएन रोड पर इस्लामिया कॉलेज के पास, लाटूश रोड पर शिवपुरी और सदर में सुग्गा देवी मार्ग शामिल है।
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प्राइवेट नौकरी का कोई भरोसा नहीं
समाजशास्त्र से एमएकरने वाली अंजू निषाद का कहना है कि उन्होंने कई जगह ट्राई किया, पर सफलता नहीं मिली। प्राइवेट नौकरी का कोई भरोसा नहीं। सफाई कर्मचारी पद केलिए आवेदन करने से पहले कई बार सोचा। फिर परिवार में बात की। सब तैयार हो गए तो आवेदन किया। अब डिग्री का क्या करें, नौकरी मिले तो उनका मतलब है। सफाई कर्मी की ही सही कम से सरकारी नौकरी तो होगी।
परिवार चलेगा और कोचिंग की फीस भी निकल जाएगी
सीतापुर निवासी ज्ञानेंद्र कुमार बीए पास हैं। हिंदी, इंग्लिश और अर्थशास्त्र विषय से इन्होंने डिग्री ली है। कहते हैं कि पिता किसान हैं। रोजगार का और कोई जरिया नहीं है इसलिए आगे पढ़ाई नहीं हो पा रही है। नौकरी न मिलने से संकट और बढ़ गया है। ऐसे में यदि सफाई कर्मचारी की नौकरी ही मिल जाएगी तो परिवार चल जाएगा और कोचिंग की फीस भी निकल जाएगी।