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संवाद में बोले अधिवक्ता, बेटियों को शुरू से ही दें कानूनी जानकारी, छेड़छाड़ का दें करारा जवाब

Wed, 09 Jan 2019 06:19 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
कानून एक ऐसा हथियार है जिसके माध्यम से बेटियां अपने प्रति हो रहे शोषण के खिलाफ सशक्त तरीके से आवाज बुलंद कर सकती हैं। कानून की बेसिक पढ़ाई स्कूल स्तर पर अनिवार्य कर देनी चाहिए। ताकि अच्छे व बुरे की पहचान बचपन से ही हो। इससे कोई अपराध करने से पहले सौ बार सोचेगा। अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत मंगलवार को कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में जुटे हाई कोर्ट के अधिवक्ताओं ने कानून की सहायता से बेटियों को सशक्त बनाने पर बल दिया। 
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अमर उजाला संवाद - फोटो : amar ujala
साथ ही उन्होंने पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों को व्यवहारिक तौर पर प्रशिक्षित करने की पुरजोर वकालत की। 
 
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अखिलेश अवस्थी - फोटो : amar ujala
विवेचना और लॉ एंड ऑर्डर विभाग अलग हो
अपराध के बाद की विवेचना प्रक्रिया ही काफी कमजोर रहती है। यही वजह है कि पीड़िताओं को जल्द न्याय नहीं मिल पाता। करीब 60 फीसदी विवेचनाएं गलत होती हैं। पुलिस पर काम का काफी दबाव रहता है। ऐसे में पुलिस की विवेचना प्रक्रिया और लॉ एंड ऑर्डर विभाग अलग-अलग होना चाहिए। विवेचना प्रक्रिया को ज्यादा सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। 
- अखिलेश अवस्थी, पूर्व चेयरमैन, बार काउंसिल ऑफ यूपी
 

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अमर उजाला संवाद - फोटो : amar ujala
लड़कियों को मिले सब्सिडी
जिस तरह का हमारा सामाजिक परिवेश है उसमें लड़कियों को औरों से ज्यादा अच्छी परवरिश व शिक्षा की आवश्यकता है। साथ ही सरकारी मशीनरी को चाहिए कि वह बेटियों पर आयकर और शिक्षा में छूट दे। महिलाओं से संबंधित किसी भी प्रकार के मामलों में उन्हें मुआवजा का प्रावधान होना चाहिए। लड़कियों को सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण अनिवार्य कर देना चाहिए। 
- संजीव पांडेय, सेक्रेट्री, सेंट्रल बार एसोसिएशन
 
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अमर उजाला संवाद - फोटो : amar ujala
संवेदनशीलता, एकजुटता जरूरी
बेटियों के प्रति संवदेनशील बनने, उनको एकजुट करने और ताकतवर बनाने की आवश्यकता है। लड़कियों, महिलाओं के साथ व्यवहार कैसे किया जाए, इसके लिए पुलिस व न्यायिक प्रक्रिया के नुमाइंदों को भी प्रशिक्षित करना होगा। 
- मेहा रश्मि, अधिवक्ता
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अमर उजाला संवाद - फोटो : amar ujala
संसाधनयुक्त अच्छी शिक्षा दें
लड़कियों को अच्छी शिक्षा देने की आवश्यकता है। ऐसा नहीं कि लड़का है तो इंजीनियर बनेगा और लड़की है तो महज बीए करा दो। लड़कियों को अपनी पढ़ाई करने और लक्ष्य तय करने की आजादी देनी होगी। - नेहा जयसवाल, अधिवक्ता

कमजोर तबके को उबारने की जरूरत
आर्थिक रूप से कमजोर तबके को ज्यादा जागरूक करने की जरूरत है। यहां पर लड़कियों व महिलाओं को सबसे ज्यादा प्रताड़ित किया जाता है। नैतिक शास्त्र व नागरिक शास्त्र पाठ्यक्रम में शामिल हो। बच्चों को शुरू से बताना होगा कि अपराध की क्या-क्या सजाएं हैं। - रंजना श्रीवास्तव, अधिवक्ता
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अमर उजाला संवाद - फोटो : amar ujala
घर से करें बदलाव की शुरुआत
हर किसी को शुरुआत अपने घर से करनी है। आज बेटियों को डर किससे है। जिससे है उन्हें घर में ही संस्कार देना होगा। लड़कों में लड़कियों के प्रति सम्मान व आदर का भाव जगाना होगा। लड़कियों के मन से डर व झिझक निकालनी होगी।
- फरहा सिद्दीकी, अधिवक्ता

शिक्षा से बढ़ेंगी बेटियां
समाज के नजरिए में दो तरीके से बदलाव आएगा। पहले तो शुरुआत घर से करनी है। अगर घर में बेटी है, उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें और बेटों को उनका सम्मान करने की शिक्षा दें। लड़कियों को हर तरह से शिक्षित करें। 
- सुचिता वर्मा, अधिवक्ता
 

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जागरूक नागरिक बनें
बेटियां को दबने की नहीं, जागरूकता की जरूरत है। यह सब तभी खत्म होगा, जब समाज का हर नागरिक जागरूक होगा। अपराध का ग्राफ नीचे गिरेगा।
- सुहेल अहमद सिद्दीकी, अधिवक्ता

पाठ्यक्रम में हो बेसिक कानूनी पढ़ाई 
नैतिक मूल्यों की पढ़ाई के साथ कानून की बेसिक पढ़ाई को भी स्कूली स्तर पर अनिवार्य करना चाहिए। ताकि बच्चों को शुरू से ही अच्छे और बुरे की पहचान हो सके। 
- अखिलेश जायसवाल, अधिवक्ता
 

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अमर उजाला संवाद - फोटो : amar ujala
अधिवक्ता भी करें सहयोग
बेटियां आवाज कैसे उठाएं, इसकी जानकारी देना भी बहुत जरूरी है। खासकर ग्रामीण क्षेत्र में अधिवक्ताओं को साथ लेकर जागरूकता शिविर लगाने चाहिए।
- आसिफ रिजवी, अधिवक्ता 

बेटी जागरूक तो परिवार जागरूक 
हम कानून के जानकार हैं। हम समाज को बेहतर तरीके से जागरूक कर सकते हैं। बेटियां जितनी जागरूक होंगी उतनी ही वे सशक्त होंगी और परिवार भी जागरूक होगा। 
- ध्रुव कुमार सिंह, अधिवक्ता

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अमर उजाला संवाद - फोटो : amar ujala
अंतिम पक्ति तक हो पहुंच
जागरूकता फैलाने का काम कई स्तर पर चल रहा है। इसमें सरकारी मशीनरी की ज्यादा भागीदारी की जरूरत है। सरकार को चाहिए वह समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचे। 
- अमरेश पाल सिंह, अधिवक्ता

छेड़खानी को ने करें नजरअंदाज
बेटियां छेड़खानी के 99 फीसदी मामलों को नजरअंदाज कर देती हैं। यहीं पर जवाब देनी की आवश्यकता है। इससे अराजकता को बल मिलता है। 
- नीरज कुमार यादव, अधिवक्ता
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पुलिस सिस्टम में सुधार हो
महिलाओं के प्रति अपराध इसलिए भी बढ़ रहे हैं कि पुलिसिंग की प्रक्रिया काफी कमजोर है। कोई घटना होती है तो पहले महिला उसकी रिपोर्ट करने से डरती है और जब रिपोर्ट कराने जाती है तो उसके साथ सही व्यवहार नहीं किया जाता। 
- राकेश कुमार सिंह, अधिवक्ता


सबको मिलकर करना होगा प्रयास
सामाजिक नजरिए में बदलाव लाने के लिए समाज के हर वर्ग को मिलकर प्रयास करना होगा। पुलिस, कानून, समाजसेवी संस्थाएं, शिक्षण संस्थान सभी को साथ मिलकर प्रयास करना होगा। 
- मो. फरहान सिद्दीकी, अधिवक्ता
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