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लखनऊ में एक शाम सरेआम हुआ ये सब...

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सुनसान रास्ते पर एक अकेली युवती के साथ हो रहे दुष्कर्म को जवान देखता है और उसका विरोध करने लगता है। ये नजारा है लखनऊ में हुए एक नाटक का।
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लखनऊ में एक शाम सरेआम हुआ ये सब...

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प्रोटेक्शन के प्रोविजन कानून को बदलने की मांग पुरजोर ढंग से उठाता नजर आता है नाटक ‘दोषी कौन’। इस नाटक में लड़कियों के साथ आए दिन होने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं को दिखाया गया।
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नाटक में दिखाया गया कि दरिंदे किसी महिला से बलात्कार का प्रयास कर रहे होते हैं और ऐसे में कोई व्यक्ति महिला की मदद के लिए आगे आता है और उसे बचाने की जद्दोजहद में बलात्कारियों को शारीरिक क्षति पहुंचाता है तो मदद करने वाले शख्स को सजा में कोई रियायत नहीं मिलती।

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नाटक का मंचन सोमवार को संगीत नाटक अकादमी (एसएनए) के संत गाडगे प्रेक्षागृह में एक्यूरेट लीगल सॉल्यूशन के सहयोग से संकेत संस्था की ओर से किया गया।
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देश की न्याय प्रणाली विसंगतियों की ओर सत्ता व समाज का ध्यान आकर्षित करने के मकसद से मंचित नाटक ‘दोषी कौन’ की कहानी शौर्य चक्र से सम्मानित एक बहादुर जवान के इर्द-गिर्द घूमती है।
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एक अकेली युवती के साथ हो रहे दुष्कर्म को जवान देखता है और उसका विरोध करने लगता है। इस दौरान बलात्कारी जवान पर हमला कर देते हैं और वह आत्मरक्षा में उनको मार देता है, जिसके बाद सेना उसका कोर्ट मार्शल कर देती है।
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एडवोकेट विजय कृष्ण के लिखे नाटक का निर्देशन संजीव वर्मा व सबिता लाहिड़ी का रहा जबकि परिकल्पना अमित पाण्डे की रही।
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विधायिका से नियमों में उचित परिवर्तन की मांग के साथ ही नाटक का अंत होता है। खास बात यह रही कि मंच पर अधिकतर कलाकार नए व वकालत के पेशे से जुड़े थे।
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