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रंगदारी न देने पर बिल्डर के भाई को गोली मारी, भीड़ ने हमलावर को जमकर पीटा

Wed, 08 Feb 2017 01:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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कैंट के निलमथा भगवंतनगर में रंगदारी न देने पर बदमाशों ने बिल्डर राज किरण पाल बाल्मीकि के भाई धीरज और साले विकास पर तीन गोलियां चलाकर हड़कंप मचा दिया। एक गोली धीरज के दायें हाथ पर लगी है। फायरिंग सुनकर इलाके के लोग जुट गए और बाइक से भाग रहे हमलावरों को खदेड़ लिया। घेराबंदी कर एक हमलावर नई बस्ती निवासी दीपू को दबोच लिया जबकि उसके तीन साथी भाग निकले। दीपू की पिटाई करने के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया। धीरज व दीपू को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बिल्डर की तहरीर पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।
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राज ने बताया कि दुर्गापुरी और भगवंतनगर में उसका मकान है। कुछ दिन से दुर्गापुरी में साइट पर निर्माण चल रहा है। सप्ताहभर पहले दीपक उर्फ दीपू व उसका साथी राहुल साइट पर आए और हर महीने एक लाख रुपये रंगदारी मांगी। इन्कार पर राज की दीपू से कहासुनी हुई। बकौल राज, दबंग ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी थी।
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मंगलवार सुबह राज का भाई धीरज और साला विकास बाइक लेकर घर से निकले थे। इलाके में ही गुड्डू की दुकान के सामने दीपू व उसके साथी राहुल, राजू व शुभम ने उन्हें रोक लिया। रुपया न देने पर दीपू गाली-गलौज करने लगा तो धीरज ने विरोध किया। इस पर दीपू ने तमंचा निकालकर गोली चला दी जो धीरज के दायें हाथ पर लगी। इस बीच विकास ने तमंचा छीनने का प्रयास किया तो दीपू ने दो फायर और किए। हालांकि विकास बाल-बाल बच गया।

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फायरिंग सुनकर लोग शोर मचाते हुए दौड़े तो दीपू व उसके साथी बाइक से भागने लगे। बाइक सवार लोगों ने बदमाशों को खदेड़ लिया और दीपू को दबोच लिया। जबकि उसके साथी भाग निकले। लोगों ने दीपू की पिटाई करने के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया। एएसपी उत्तरी विजय ढुल, सीओ कैंट डॉ. धर्मेंद्र यादव, इंस्पेक्टर कैंट दीपन यादव फोर्स संग घटनास्थल पर पहुंच गए। पुलिस को एक कारतूस मिला है। (घायल युवक)
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छह महीने जेल में रहा है आरोपी दीपू
इंस्पेक्टर ने बताया कि दीपू ने इससे पहले एक बिल्डर दिनेश पांडेय से भी रंगदारी मांगी थी। इन्कार पर दीपू ने दिनेश को उसके घर के पास ही घेरकर ताबड़तोड़ गोलियां मारी थीं। गंभीर रूप से घायल दिनेश की तहरीर पर पुलिस ने हत्या की कोशिश की रिपोर्ट दर्ज की थी। दीपू को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। छह महीने जेल में रहने के बाद वह एक महीने पहले ही जमानत पर रिहा हुआ और फिर से अपने गिरोह के गुर्गों को सक्रिय कर रंगदारी मांगनी शुरू कर दी।
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