ब्रेस्ट कैंसर के मामले में 70 फीसदी गाइनोकॉलोाजिस्ट इलाज करने से कतराती हैं। वे इस तरह के मरीजों को रेफर करने में विश्वास रखती हैं। ऐसे में धीरे-धीरे मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है। ब्रेस्ट कैंसर की पहचान होते ही इलाज शुरू कर दिया जाए तो यह जीवन के लिए खतरा नहीं बनेगा।
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डॉ. गीतिका नंदा
- फोटो : amar ujala
यह खुलासा हुआ है केजीएमयू की सर्जरी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर गीतिका नंदा सिंह के रिसर्च में। उन्होंने लखनऊ के साथ ही कानपुर, इलाहाबाद, बरेली सहित विभिन्न शहरों में कार्यरत निजी एवं सरकारी गाइनोकॉलोजिस्ट से बातचीत कर उनकी कार्यप्रणाली पर शोध किया है।
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doctor
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खास बात यह है कि पुरुष गाइनोकॉलोजिस्ट तो पूरी तरह से इस तरह के केस रेफर कर देते हैं। इसका दूसरा पहलू यह भी है कि पुरुष गाइनोकॉलोजिस्ट से महिलाएं ब्रेस्ट संबंधी बीमारियों के बारे में बात नहीं करती हैं। इससे उनका मर्ज बढ़ता जाता है और फिर स्थिति बेहद खराब हो जाती है। उन्होंने ब्रेस्ट कैंसर की जानकारियों को लेकर गाइनोकॉलोजिस्ट की जागरूकता और जानकारी को भी परखा।
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सांकेतिक तस्वीर
152 सवालों का लिया जवाब
डॉ. गीतिका नंदा ने बताया कि विभिन्न शहरों के करीब 184 गाइनोकॉलोजिस्ट से बातचीत की। इसके लिए 152 सवाल तैयार किए गए। रिसर्च के दौरान पता चला कि करीब 82 फीसदी गाइनोकॉलोजिस्ट बीमारियों के बारे में वाकिफ हैं। वे नई तकनीक से भी वाकिफ हैं, लेकिन इलाज से परहेज करते हैं। महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर खुद कैसे पहचानें और कौन सी जांच कराएं ये भी नहीं बताती हैं। इस रिसर्च में उन्हीं गाइनोकॉलोजिस्ट को शामिल किया, जो करीब पांच से 15 साल से मरीजों का इलाज करने का अनुभव रखते हैं।
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जानकारी को रखा अलग-अलग कैटेगरी में
रिसर्च में पाया गया कि ब्रेस्ट कैंसर को लेकर करीब 26.3 फीसदी गाइनाकॉलोजिस्ट अति उत्तम जानकारी रखते हैं। 58.6 फीसदी बहुत अच्छा, 8.6 फीसदी अच्छा और 9.2 कमजोर जानकारी रखते हैं। इनमें 84 फीसदी खुद स्वीकार करते हैं कि समय पर इलाज नहीं मिलने की वजह से ब्रेस्ट कैंसर के मामले गंभीर हो जाते हैं, जबकि, 61.2 फीसदी ने कहा कि ब्रेस्ट संबंधी दिक्कत होने पर तत्काल विशेषज्ञ को दिखाया जाना चाहिए। मेमोग्राफी जांच कराने के बाद सिर्फ 25 फीसदी ही सलाह देते हैं। डॉ. गीतिका से साथ इस रिसर्च में डॉ. आशा अग्रवाल, डॉ. विनोद जैन, डॉ. प्रीति कुमार शामिल हैं।
महिलाएं खुद ही कर सकती हैं जांच
डॉ. गितिका नंदा सिंह ने बताया कि 21 से 30 वर्ष की महिलाओं को हर माह अपने ब्रेस्ट की जांच खुद करनी चाहिए। वे अपने ब्रेस्ट को अंगुलियों के बीच दबाने के बजाय चपटे हाथ से कांख तक बारी-बारी दबाकर देखें। किसी प्रकार की गांठ दिखे तो डॉक्टर से सलाह दें। पीरियड्स के दसवें दिन ब्रेस्ट जरूर चेक करें। किसी भी प्रकार का दर्द होने पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए। उन्होंने बताया कि 31 से 40 साल की उम्र की महिलाओं को खासतौर से जांच करानी चाहिए।