मोदी से नजदीकी घातक यूपी में दोबारा सत्ता का सपना देख रही सपा को बिहार के नतीजों ने संदेश दिया है कि मोदी और भाजपा से किसी भी प्रकार की नजदीकी या नरमी उनकी पार्टी के लिए घातक है। संदेश यह भी है कि सपा को लालू और नीतीश की तरह न सिर्फ मोदी और भाजपा से लड़ते हुए दिखना होगा।
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बिहार चुनाव के बाद यूपी में बेहद अहम साबित होंगी ये 10 बातें
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मुसलमानों को साथ रखना होगा यूपी में मुलायम के पिछड़ी जातियों के सर्वमान्य नेता होने की राह में लालू व नीतीश जैसे प्रतिद्वंदी भले ही न खड़े हो, लेकिन मुसलमानों को साथ रखने की चुनौती सामने जरूर खड़ी है। मौजूदा समीकरण के अनुसार सिर्फ पिछड़ों के सहारे मुलायम की पार्टी का सत्ता में लौटना काफी कठिन है। इसके लिए सपा को मुसलमानों को अपनी ओर करना होगा।
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कानून-व्यवस्था भी दुरुस्त करना होगा सपा को आंकड़ों के सहारे विपक्ष के आरोपों को नकारकर संतुष्ट होने के बजाय सुशासन और विकास के एजेंडे पर काम करना होगा। पिछड़ों में भी सिर्फ एक वर्ग की पैरोकारी करने की छवि बदलकर अति पिछड़ों और दलितों के लिए भी अपनी चिंता को प्रकट करना होगा। तभी सपा यूपी से भविष्य में कुछ उम्मीद कर सकती।
बिहार चुनाव के बाद यूपी में बेहद अहम साबित होंगी ये 10 बातें
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बसपा एक मात्र उम्मीद बसपा सुप्रीमो मायावती कई सालों से लगातार यह कहती आईं हैं कि वे कोई भी चुनाव गठबंधन कर नहीं लड़ेंगी, पर यूपी में सत्ताधारी सपा बिहार में मोदी विरोधी महागठबंधन से जिस तरह अलग हुई, यहां भाजपा विरोधी और गैर सपा दलों के लिए बसपा एकमात्र उम्मीद हो सकती हैं।
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पार्टी की सक्रियता बढ़ानी होंगी बसपा को यूपी में सत्ता हासिल करने के लिए अपनी पार्टी की गतिविधियां भी बढ़ानी होंगी। बसपा ने सपा के खिलाफ कानून-व्यवस्था व भ्रष्टाचार का मुद्दा तो जरूर उठाया है पर जमीन पर संघर्ष करती हुई नहीं दिखी। ऐसे में जरूरी है कि बसपा खुद को सपा का विकल्प साबित करे।
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बिना सहयोगी नहीं बनेगा काम बिहार विधानसभा नतीजों में कांग्रेस ने 4 सीटों का आंकड़ा महागठबंधन के सहारे जिस तरह 27 पर पहुंचा दिया है, उससे साफ है कि यूपी में भी उसकी गाड़ी बिना सहयोगी के आगे नहीं बढ़ सकती है। ऐसे में यूपी में भी कांग्रेस को सहयोगी की तलाश करनी होगी।
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दोस्त व दुश्मनों की पहचान करनी होगी कांग्रेस को अब यूपी में भी बिहार की तरह जल्द से जल्द सियासी लाइन साफ करनी होगी। दोस्त व दुश्मनों की पहचान करनी होगी। अभी यहां कांग्रेस भ्रम की स्थिति में है। उसने बीच का रास्ता अपनाया हुआ है। सत्ता पर आसीन सपा से उसकी दोस्ती जगजाहिर है, पर चुनाव दिखते ही वह सपा के खिलाफ सड़कों पर उतर जाती है। इसी दोहरी नीति के कारण उसके कार्यकर्ताओं में उत्साह नहीं दिखता।
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यूपी के नेताओं को आगे करना होगा 2017 के विस चुनाव के लिए बिहार के नतीजों ने भाजपा को साफ संदेश दे दिया है कि लोकसभा चुनाव जैसी सफलता विधानसभा चुनाव में हासिल करना आसान नहीं है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहारे ही चुनाव लड़ने के बजाय यूपी के ही नेताओं को आगे करना होगा।
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कम करनी होगी महंगाई बिहार चुनाव में महंगाई एक बड़ा मुद्दा था, ऐसे में जरूरी है कि केंद्र इस पर लगाम लगाने का प्रयास करे।