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आज का योग: यूरिक एसिड के लेवल को कम कर सकते हैं ये योगासन, दर्द और जटिलताओं से मिलेगी राहत

Tue, 01 Feb 2022 12:18 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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यूरिक एसिड के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Pixabay
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलन बहुत आवश्यक है, चाहे वह शरीर को हो या फिर शरीर में मौजूद रसायनों और पोषक तत्वों का। किसी भी प्रकार के असंतुलन के कारण कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। यूरिक एसिड के साथ भी ऐसा ही है, शरीर में इसकी मात्रा बढ़ जाने से दर्द और कई तरह अन्य समस्याएं हो सकती हैं। यूरिक एसिड एक एंटी-ऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है और हमारी रक्त वाहिकाओं के अस्तर को नुकसान होने से रोकने में मदद करता है। लेकिन रक्त में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाना हानिकारक माना जाता है। 

यूरिक एसिड एक रसायन है जो तब बनता है जब शरीर प्यूरीन नामक पदार्थ का ब्रेक डाउन करता है। प्यूरीन आमतौर पर शरीर में निर्मित होते हैं और कुछ खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों में भी पाए जाते हैं। यूरिक एसिड के बढ़ने के कारण हड्डी, जोड़ और ऊतक क्षति, किडनी और हृदय रोग का खतरा हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के उपाय किए जाने चाहिए, इसके लिए योग एक अच्छा विकल्प माना जाता है। कई तरह के योगासन यूरिक एसिड के स्तर को कम करने में सहायक हो सकते हैं, आइए ऐसे ही योगासनों के बारे में जानते हैं।
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प्राणायाम के स्वास्थ्य लाभ - फोटो : Pixabay
कपालभाति प्राणायाम
योग विशेषज्ञों के मुताबिक कपालभाति प्राणायाम का नियमित रूप से अभ्यास करने से न सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य में लाभ मिलता है, साथ ही यह शरीर में रसायनों को संतुलित रखने में भी मददगार मानी जाती हैं। कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास करने से यूरिक एसिड के लेवल को कम  करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा इस प्राणायाम का अभ्यास करना मस्तिष्क के स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है।
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उष्ट्रासन योग के लाभ - फोटो : Istock
उष्ट्रासन योग का करिए अभ्यास
यूरिक एसिड के बढ़ जाने के कारण कमर, गर्दन, घुटने आदि में तेज दर्द होता है। कुछ स्थितियों में इसके कारण रोजाना के काम करने में भी कठिनाई महसूस हो सकती है। इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए उष्ट्रासन योग के अभ्यास को लाभदायक माना जाता है। पेट के निचले हिस्से से अतिरिक्त चर्बी कम करने के साथ कमर और कंधों को मजबूत बनाने में भी इस योग को काफी लाभदायक माना जाता है।
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गोमुखासन योग के स्वास्थ्य लाभ - फोटो : iStock
गोमुखासन का अभ्यास
पीठ एवं बांहों की मांसपेशियां को मजबूत बनाने के साथ-साथ बढ़े हुए यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए गोमुखासन योग का अभ्यास करना लाभदायक  हो सकता है। यूरिक एसिड बढ़ने के कारण होने वाली जटिलताओं को कम करने में भी इस योग के अभ्यास को लाभदायक माना जाता है। इसके नियमित अभ्यास से  थकान, तनाव और चिंता भी कम होती है। 


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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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