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आज का योग: फैटी लिवर की समस्या से परेशान लोगों के लिए कारगर हैं ये तीन योगासन, इन अंगों को भी मिलेगा लाभ

Sun, 20 Mar 2022 12:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फैटी लिवर का खतरा - फोटो : iStock
शरीर के बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए लिवर को स्वस्थ रखना बहुत आवश्यक होता है। लिवर को शरीर का पावरहाउस माना जाता है, जो भोजन के पाचन को बेहतर बनाए रखने के साथ कई ऐसे हार्मोन्स का उत्पादन करता है जिन्हें शरीर के लिए काफी आवश्यक माना जाता है। हालांकि पिछले कुछ समय में आहार और जीवनशैली की गड़बड़ी के कारण लिवर संबंधित कई तरह की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है, फैटी लिवर की समस्या उनमें से एक है।

फैटी लिवर की समस्या से परेशान लोगों के लिए आहार का विशेष ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है। आहार के साथ दैनिक जीवन में कुछ योगासनों को शामिल करना भी काफी फायदेमंद हो सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में ऐसे ही कारगर योगासनों के बारे में जानते हैं।
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बालासन योग के हैं कई फायदे - फोटो : Pixabay
बालासन योग का अभ्यास
बालासन या चाइल्ड पोज का नियमित अभ्यास करना आपके लिवर को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक हो सकता है। लिवर सहित पेट के तमाम अंगों की मालिश और उनमें रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देने में चाइल्ड पोज योगासन करने के लाभ हो सकते हैं। बालासन योग आपकी रीढ़, जांघों, कूल्हों और टखनों की बेहतर स्ट्रेचिंग करने के साथ पीठ के ऊपरी हिस्से को मजबूत करता है। रीढ़ और हैमस्ट्रिंग के लिए भी इस योग का अभ्यास करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। 
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शलभासन योग है कई तरह से फायदेमंद - फोटो : istock
शलभासन योग
शलभासन योग का नियमित अभ्यास आपके पेट के तमाम अंगों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है।  लिवर से हार्मोन्स के उत्पादन और पाचन को बढ़ावा देने में इस योग के अभ्यास को काफी मददगार माना जाता है। लिवर के अलावा शलभासन योग रीढ़ की हड्डी, पीठ और कोर की मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग और मजबूती के लिए सहायक हो सकती है। यह छाती को खोलता है, पेट के अंगों को उत्तेजित करके उनके कार्यों को आसान बनाने में मदद करता है।
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धनुरासन योग लिवर के लिए है फायदेमंद - फोटो : Pixabay
धनुषासन योग
फैटी लिवर की समस्या से परेशान लोगों के लिए नियमित रूप से धनुषासन योग का अभ्यास करना लाभदायक हो सकता है। इस योग के अभ्यास से लिवर का कार्य आसान होता है साथ ही यह आसन पेट की चर्बी को कम करने में मदद करता है। फैटी लिवर के लक्षणों को कम करने में भी इस योग के अभ्यास के लाभ हो सकते हैं। लिवर के साथ यह योगासन पीठ, जांघों, बाहों और छाती की सेहत को भी व्यवस्थित रखने में काफी सहायक माना जाता है। 

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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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