कई लोगों की आंखें, त्वचा और नाखूनों में असामान्य रूप से आपने भी पीलापन देखा होगा। ऐसी स्थिति को पीलिया रोग कहा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक लिवर के ठीक से काम न करने के कारण लोगों को इस तरह की दिक्कत होती है। पीलिया को अंग्रेजी में जॉन्डिस कहा जाता है, यह फ़्रांसिसी शब्द 'जावने' से लिया गया है जिसका अर्थ होता है पीलापन। आइए इस रोग के बारे में विस्तार से जानते हैं, साथ ही इस लेख में हम जानेंगे कि पीलिया के लक्षणों को कम करने में योग आसन किस तरह से फायदेमंद हो सकते हैं?
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लिवर संबंधी दिक्कतों के कारण होती है पीलिया की दिक्कत
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क्यों होती है पीलिया की समस्या?
विशेषज्ञ कहते हैं कि जब हमारा लिवर सही से काम नहीं कर रहा होता है तो रक्त में बिलुरुबिन नाम के केमिकल की मात्रा बढ़ जाती है। सामान्य स्थितियों में लिवर इस रसायन को मल- मूत्र के माध्यम से शरीर से बाहर निकाल देता है। रक्त में बिलुरुबिन की मात्रा बढ़ जाने के कारण लोगों की हाथों, त्वचा, नाखूनों, आंखों और पेशाब का रंग पीला हो जाता है, जिसे सामान्य भाषा में पीलिया के नाम से जाना जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि सामान्य तौर पर दूषित भोजन या पानी का सेवन करने से पीलिया का खतरा रहता है। इसके अलावा जो लोग ज्यादा तेल , मिर्च मसाले और भारी भोजन करते हैं उनमें भी इस समस्या का खतरा बढ़ जाता है।
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पीलिया में कई योग हैं फायदेमंद
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क्या योग से मिल सकता है पीलिया में लाभ
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि कई सारे ऐसे आसन हैं जिनको करने से न सिर्फ पीलिया को खत्म किया जा सकता है, साथ ही यह आसन लिवर को बेहतर रखने में भी सहायक हो सकते हैं। पीलिया के शुरुआती एक हफ़्ते ही योग मुद्रा का अभ्यास काफी कारगर हो सकता है। योग मुद्रा का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले शांत मुद्रा में बैठ जाएं और शरीर को एकदम सीधा रखें। इसके बाद आगे की स्लाइडों में बताए जा रहे आसनों को करें, इससे पीलिया में काफी लाभ मिलता है।
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योग करने से लिवर को मिलती है मजबूती
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भस्त्रिका प्राणायाम आसन
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले ध्यानपूर्वक शांत अवस्था में बैठ जाएं और शरीर को एकदम से सीधा रखें। हाथों को ज्ञान मुद्रा बनाकर दोनों घुटनों पर रखें। कोहनी और कंधों को ढ़ीला रखें। अब धीरे-धीरे लम्बी और गहरी श्वास लें और छोड़ें। इसके 30-30 स्ट्रोक के दो बार अभ्यास करें।
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कपालभाति के तमाम फायदे
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कपालभाति प्राणायाम से भी लाभ
इस आसन को करने के लिए भी सबसे पहले ध्यानपूर्वक शांत अवस्था में बैठ जाएं और शरीर को एकदम से सीधा रखें। इसके बाद पहले अपनी नाक के दोनों छिद्रों के माध्यम से एक गहरी श्वास लें। अब इसे नाक से तेजी से छोड़ें, इसमें झटके से पेट को अंदर की ओर ले जाएं। सांस छोड़ते समय नाक से छक की आवाज़ होगी। इस क्रिया को कम से कम 10 मिनट तक करते रहें।
अनुलोम विलोम प्राणायाम सभी के लिए जरूरी
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अनुलोम विलोम प्राणायाम
इस आसन को करने के लिए भी सबसे पहले ध्यानपूर्वक शांत अवस्था में बैठ जाएं औऱ शरीर को एकदम से सीधा रखें। बाएं हाथ की ज्ञान मुद्रा बनाकर दाएं हाथ के अंगूठे से दाईं नासिका को बंद करें और बाईं नासिका से श्वास भरें। अब बाई नासिका बंद करें और दाईं नासिका से श्वास छोड़ें। इस क्रिया को नासिका की दोनों ओर से करें। शुरुआत में इस आसन को 15 से 20 चक्र तक कर सकते हैं। बाद में इसे बढ़ा लें।
--------------------- नोट: यह लेख योगाचार्य की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। योग आसनों की उचित जानकारी के लिए योगाचार्य से संपर्क करें या उनके वीडियो देखें।