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Yoga Tips: पीठ, कोर और रीढ़ की मजबूती के लिए कीजिए शलभासन योग का अभ्यास, इसके अन्य लाभ भी जानिए

Tue, 23 Aug 2022 12:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शलभासन के फायदे - फोटो : istock
शरीर के संपूर्ण फिटनेस के लिए सभी अंगों की सेहत पर ध्यान देना आवश्यक माना जाता है। छोटी से छोटी हड्डी या मांसपेशियों में होने वाली किसी भी तरह की समस्या का असर पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है, यही कारण है कि सभी लोगों को नियमित रूप से योगासनों के अभ्यास की सलाह दी जाती है। योग मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की समस्याओं को ठीक रखने के साथ मांसपेशियों पर होने वाले तनाव को कम करते हैं, जिससे शरीर के कई अंगों में होने वाली दर्द की समस्या से आसानी से राहत पाया जा सकता है। 

योग विशेषज्ञ बैक, कोर और रीढ़ की मजबूती के लिए शलभासन योग के अभ्यास को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं। छाती की बेहतर स्ट्रेचिंग के साथ रीढ़ में होने वाले दर्द को कम करने के लिए रोजाना इस योग का अभ्यास करके लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

आइए आगे जानते हैं कि यह योगासन शरीर के लिए किस प्रकार से लाभकारी हो सकता है, साथ ही इसके अभ्यास के दौरान किन बातों का ध्यान रखा जाना आवश्यक है?
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शलभासन योग करने का तरीका - फोटो : Twitter
कैसे किया जाता है शलभासन का अभ्यास

शलभासन का अभ्यास थोड़ा कठिन होता है जिसके लिए आपको एकाग्रता और निरंतर अभ्यास करते रहने की आवश्यकता होती है। इस योग को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। अब सांस लेते हुए अपने पैरों और धड़ को ऊपर उठाएं। अपने घुटनों को सीधा रखते हुए पैर को ऊपर की ओर उठाएं। हथेलियों को नीचे की ओर रखें। आपका वजन आपके पेल्विक हिस्स, पेट और निचली पसलियों पर होना चाहिए। कुछ देर तक इसी मुद्रा में बने रहें, फिर सांस छोड़ते हुए अपने पैरों और सिर को धीरे-धीरे नीचे फर्श पर ले आएं।

अपने शरीर को आराम दें और इसी प्रक्रिया को 2-3 बार दोहराएं।
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रीढ़ के लिए फायदेमंद योगासन - फोटो : Getty Images
शलभासन अभ्यास के क्या लाभ हैं?

शलभासन योग का अभ्यास कई प्रकार से आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। 
  • यह पेट की चर्बी को कम करने और पेट को टोन करने में मदद करता है।
  • यह अभ्यास आपकी पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने में सहायक है।
  • इससे आपकी गर्दन की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, सर्वाइकल की समस्याओं में इस योग के अभ्यास से लाभ पाया जा सकता है।
  • यह आंतों की गतिविधि में सुधार करके बेहतर पाचन में मदद करता है।
  • मूत्र विकारों को ठीक करने में भी इसे फायदेमंद अभ्यास माना जाता है।
  • यह प्रजनन प्रणाली को मजबूती देता है और गर्भाशय की कई समस्याओं में भी इससे लाभ पाया जा सकता है।
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गर्भावस्था में योग करने के लाभ - फोटो : Pixabay
शलभासन अभ्यास के दौरान सावधानियां

वैसे तो शलभासन योग को सभी के लिए फायदेमंद माना जाता है पर कुछ स्थितियों में इस अभ्यास को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। जिन लोगों को  पीठ में गंभीर दर्द या स्लिप डिस्क की दिक्कत है उन्हें इस मुद्रा से बचना चाहिए। गंभीर साइटिका वाले लोगों को भी इस योग को न करने की सलाह दी जाती है। मासिक धर्म या गर्भावस्था के दौरान भी इस योग का अभ्यास न करें। जिन लोगों को ब्लड प्रेशर की समस्या है उन्हें विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर ही इसका अभ्यास करना चाहिए। 


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नोट:
यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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