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आज का योगासन: इन स्वास्थ्य समस्याओं में बहुत कारगर है पश्चिमोत्तानासन योग का अभ्यास, जानिए विशेषज्ञों की सलाह

Mon, 11 Apr 2022 11:06 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पश्चिमोत्तानासन योग के फायदे - फोटो : Pixabay
योगासनों का दैनिक रूप से अभ्यास आपकी सेहत को गजब का बूस्ट दे सकते हैं। ये न सिर्फ आपके मूड के बेहतर बनाए रखने में सहायक हैं, साथ ही शरीर को भी स्वस्थ बनाए रखने में काफी मददगार हो सकते हैं। पश्चिमोत्तानासन योग ऐसा ही एक अभ्यास है, जिसे विशेषज्ञ दैनिक अभ्यास में शामिल करने की सलाह देते हैं। पश्चिमोत्तानासन एक क्लासिक योग मुद्रा जिसे 'सीटेड फॉरवर्ड बेंड' के रूप में भी जाना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक मानसिक स्वास्थ्य में लाभ के साथ इस मुद्रा का अभ्यास हैमस्ट्रिंग और आपकी रीढ़ सहित पूरे शरीर की बेहतर स्ट्रेचिंग में सहायक हो सकता है।

योग विशेषज्ञ कहते हैं, पश्चिमोत्तानासन योग के लिए मानसिक रूप से केंद्रित होने और लचीलापन की अधिक आवश्यकता होती है। शुरुआत में इसका अभ्यास थोड़ा कठिन हो सकता है, पर समय के साथ आप इसमें अभ्यस्त होते जाते हैं। संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर रखने में पश्चिमोत्तानासन योग का दैनिक अभ्यास आपकी मदद कर सकता है। आइए इसके अभ्यास से शरीर को होने वाले फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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रोजाना कीजिए पश्चिमोत्तानासन योग - फोटो : Pixabay
पश्चिमोत्तानासन योग का अभ्यास कैसे करें?
पश्चिमोत्तानासन योग एक मध्यम स्तरीय अभ्यास है, जिसका मतलब है कि इसे करने के लिए आपको परिपक्वता की आवश्यकता है। शुरुआत में इसका अभ्यास थोड़ा कठिन हो सकता है, ऐसे में किसी विशेषज्ञ से इसको करने के सही तरीके के बारे में जान लेना बहुत आवश्यक होता है। 
पश्चिमोत्तानासन योग करने के लिए सबसे पहले दोनों पैरों को फैलाकर जमीन पर बैठ जाएं। अब गहरी सांस लेते हुए शरीर को आगे की ओर झुकाएं। हाथों को पैरों के तलवे को और नाक को घुटनों से स्पर्श कराएं। कुछ देर तक इस स्थिति में बने रहे और फिर पूर्ववत स्थिति में आ जाएं।
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सेहत के लिए कई तरह से लाभप्रद है पश्चिमोत्तानासन योग - फोटो : istock
पश्चिमोत्तानासन योग के क्या फायदे होते हैं?
योग विशेषज्ञ बताते हैं, पश्चिमोत्तानासन योग आपके शरीर की सभी बड़ी मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग के साथ, रक्त प्रवाह में सुधार करने, शरीर का लचीलापन बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य में विशेष लाभकारी हो सकता है। रोजाना इसका अभ्यास करना आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है।
  • इस अभ्यास के दौरान शरीर को आगे की ओर झुकाना होता है जिससे पाचन अंगों पर दबाव पड़ता है। ऐसे में यह इन अंगों को टोन करने और पाचन में सुधार करने में विशेष लाभकारी हो सकता है। कब्ज, गैस और अपच की समस्याओं में इस योग के अभ्यास के लाभ होते हैं। 
  • यह अभ्यास छाती को फैलाने और पेट के अंगों को उत्तेजित करने के साथ श्वसन क्षमता में सुधार करता है।
  • मधुमेह के रोगियों, लिवर और किडनी के रोगियों के लिए इसका अभ्यास बेहद फायदेमंद माना जाता है। 
  • मासिक धर्म संबंधी विकारों से राहत दिलाने में सहायक योगासन है।
  • मस्तिष्क के स्वास्थ्य में सुधार करके चिंता-तनाव को कम करने में मदद करता है।
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गर्भवती महिलाएं बरतें सावधानी - फोटो : istock
इन लोगों के बरतनी चाहिए सावधानी
यदि पीठ, हाथ, टखनों या कूल्हे में चोट लगी है, तो इस योग मुद्रा का अभ्यास कुछ दिनों तक न करें। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी इसका अभ्यास न करने की सलाह दी जाती है। वहीं जिन लोगों को स्लिप डिस्क की दिक्कत है, उन्हें विशेषज्ञ की सलाह पर ही इस योग का अभ्यास करना चाहिए। 

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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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