फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आज का योग: ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं यह योगासन, आप भी कीजिए रोजाना अभ्यास

Mon, 15 Nov 2021 11:45 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 4
स्तन कैंसर से करें बचाव - फोटो : Pixabay
पिछले दो दशकों में तमाम तरह के कैंसर के मामलों में इजाफा देखा गया है। इसमें भी स्तन कैंसर के केस सबसे तेजी से बढ़े हैं। अमेरिकी महिलाओं में यह सबसे आम कैंसर बन गया है, आंकड़ों से पता चलता है कि हर 8 में से 1 महिला इस कैंसर का शिकार हो जाती है। स्तन कैंसर, अन्य प्रकार के ही कैंसर की तरह जानलेवा माना जाता है, इससे बचाव बहुत आवश्यक होता है। 

राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार, योग के माध्यम से इस कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। योग उन हार्मोन (इंसुलिन और एस्ट्रोजन सहित) के स्तर को भी कम करने में सहायक होते हैं, जिनके चलते स्तन कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। अध्ययनों का कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर के निदान के बाद शारीरिक गतिविधि और योग के माध्यम से इसकी जटिलताओं और गंभीरता को कम किया जा सकता है। आइए स्तन कैंसर में फायदेमंद ऐसे ही कुछ योगासनों के बारे में जानते हैं। 
विज्ञापन

2 of 4
कैट काउ पोज के लाभ - फोटो : istock
कैट काउ पोज
ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए कैट काउ पोज का अभ्यास फायदेमंद हो सकता है। यह पीठ के निचले हिस्से को मजबूती देने के साथ कूल्हे के दर्द को कम करने और रीढ़ की गतिशीलता के साथ-साथ रीढ़ की हड्डी में द्रव परिसंचरण को बढ़ाता है। इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले अपनी कलाइयों और घुटनों की मदद से चौपाया जानवरों जैसी मुद्र बना लें। अब गहरी श्वास लें और छोड़ें। इसके बाद सांस लेते हुए छत की ओर देखें और सांस छोड़ें। इस योग को रोजाना 5-10 मिनट तक करें।
विज्ञापन

3 of 4
मत्सयासन का अभ्यास - फोटो : Pixabay
मत्स्यासन पोज
मत्स्यासन योग को हार्ट ओपनर योग भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि यह आपकी छाती, पसलियों, फेफड़े और पीठ के ऊपरी हिस्से को खोलती है। यह स्तनों और पेक्स में लिंफेटिक ड्रेनेज को उत्तेजित करके ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करता है। योग विशेषज्ञों के मुताबिक इस योग के नियमित अभ्यास से इम्यूनिटी को भी बढ़ाया जा सकता है, जो कैंसर को जोखिम को कम करती है। 
विज्ञापन

4 of 4
रोज कीजिए प्राणायाम - फोटो : iStock
प्राणायाम
गहरी सांस लेने वाले योग आपके डायाफ्राम का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने में मदद करते हैं। डायाफ्राम को मजबूत करके ऑक्सीजन के संचार को बढ़ाया जा सकता है। स्तन कैंसर के उपचार के दौरान और बाद में भी इसका अभ्यास करना फायदेमंद हो सकता है। गहरी सांस लेने से मन को शांत करने में मदद मिलती है। महिलाओं को इसका नियमित अभ्यास जरूर करना चाहिए।



------------------
नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें