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अध्ययन: क्या अब प्लास्टिक के कचरे से बनेगी वनीला फ्लेवर आइसक्रीम? वैज्ञानिकों ने ढूंढ लिया तरीका

Tue, 22 Jun 2021 01:02 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, एडिनबर्ग
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay/Amarujala
प्लास्टिक कचरा धीरे-धीरे पर्यावरण के लिए नासूर बनता जा रहा है। प्लास्टिक और पॉलीथीन की वजह से जल तो प्रदूषित हो ही रहा है, इसके साथ-साथ हवा भी प्रदूषित होती जा रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्लास्टिक कचरे के कारण हर साल तकरीबन एक लाख से अधिक जलीय जीवों की मौत हो जाती है, क्योंकि नदियों से लेकर समुद्र तक प्लास्टिक और उससे निर्मित वस्तुओं के ढेर लगे हैं और ऐसे में समुद्री जीव भी हर दिन प्लास्टिक निगलने को विवश हैं। हालांकि अब लगता है कि वैज्ञानिकों ने इसके सही इस्तेमाल का तरीका ढूंढ लिया है। वैज्ञानिकों ने पहली बार प्लास्टिक के कचरे से आइसक्रीम में मिलाया जाने वाला वनीला फ्लेवर तैयार करने में सफलता हासिल की है। प्लास्टिक कचरे को वनीला फ्लेवर में बदलने के लिए जेनेटिकली मोडिफाइड बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया गया है। एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा किया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि हो सकता है भविष्य में वनीला आइसक्रीम प्लास्टिक के कचरे से बने। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ग्रीन केमिस्ट्री नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, प्लास्टिक कचरे से वनीला फ्लेवर बनाने के लिए सबसे पहले वैज्ञानिकों ने ई-कोली बैक्टीरिया के जीनोम में बदलाव किया। फिर प्लास्टिक से तैयार टेरिप्थेलिक एसिड को बैक्टीरिया की मदद से वेनिलीन में बदला। दरअसल, वेनिलीन एक कंपाउंड होता है, जो वनीला की तरह महकता है और स्वाद पैदा करता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेनिलीन का इस्तेमाल खाने-पीने की चीजों में तो किया ही जाता है, साथ ही कॉस्मेटिक में भी इसका उपयोग किया जाता है। वहीं, फार्मा इंडस्ट्री, साफ-सफाई करने वाले उत्पाद और हर्बीसाइड को तैयार करने में भी यह उपयोग होता है।  

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कैसे तैयार होता है वेनिलीन? 
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनियाभर में जितनी भी वेनिलीन की सप्लाई होती है, उसका 85 फीसदी हिस्सा जीवाश्म ईंधन से प्राप्त रसायनों से तैयार किया जाता है, जबकि बाकी का 15 फीसदी दूसरे तरीकों से बनाया जाता है। दुनियाभर में इसकी मांग बहुत ही ज्यादा है। साल 2018 में इसकी मांग 37 हजार टन थी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के स्टीफन वॉलेस कहते हैं कि हमारी इस रिसर्च से यह साबित होता है कि प्लास्टिक का कचरा एक समस्या नहीं है। वहीं, प्रोफेसर जोएना सैडलर कहती हैं कि प्लास्टिक के कचरे से वेनिलीन बनाने का यह पहला उदाहरण है। इसकी मदद से कई उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। 

स्रोत और संदर्भ: 
Microbial synthesis of vanillin from waste poly(ethylene terephthalate) 
https://pubs.rsc.org/en/content/articlelanding/2021/GC/D1GC00931A#!divAbstract 

अस्वीकरण नोट: यह लेख ग्रीन केमिस्ट्री नामक पत्रिका में प्रकाशित स्टडी के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। 
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