क्या आपको पता है दुनिया का सबसे बड़ा चीनी यात्री हुएनसांग अपनी भारत यात्रा के दौरान हरिद्वार भी गया था। हुएनसांग ने देवभूमि उत्तराखंड की यात्रा की थी। वो यहां की यात्रा करके बेहद चकित हुआ था और उसने हरिद्वार और उत्तराखंड को अलग-अलग नाम दिया था। हुएनसांग हर्षवर्धन के शासन काल में भारत आया था। वो 630 ईसवी से लेकर 643 ईसवी तक भारत में रहा। हुएनसांग ने छह साल तक नालंदा विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण की थी। अगली स्लाइड में पढ़िए हरिद्वार को दिया था क्या नाम
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हुएनसांग चीनी लेखक था। दरअसल, भारत आने वाले सभी चीनी लेखक बौद्ध धर्म के अनुयायी थे और वो इस धर्म के बारे में ज्यादा जानकारी लेने के लिए भारत आए थे। इन्हीं में से एक हुएनसांग था, जो अपनी भारत यात्रा के दौरान उत्तराखंड भी गया था।
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uttrakhand
हुएनसांग ने अपने यात्रा वृतांत में उत्तराखंड को ब्रह्मपुर नाम दिया था। यानी उसने अपने यात्रा वृतांत में उत्तराखंड का जिक्र ब्रह्मपुर नाम से किया है। वहीं हरिद्वार का वर्णन हुएनसांग ने मोयूली (मयुरपुर) नाम से किया है।
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haridwar
हरिद्वार को हरि का द्वार यानी विष्णु का द्वार भी कहा जाता है। अगला कुंभ मेला हरिद्वार में ही लगने वाला है। यह नगरी उत्तराखंड की प्रसिद्ध धार्मिक स्थली के तौर पर जानी जाती है। हरिद्वार हिंदुओं की धार्मिक आस्था का केंद्र है। बड़ी तादाद में श्रद्धालु हर की पौड़ी में गंगा आरती में भाग लेने के लिए जाते हैं। यहां कई सिद्धपीठ, शक्तिपीठ और प्राचीन मंदिर है।
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mansadevi
हरिद्वार में आप मनसा देवी के दर्शन कर सकते हैं। यहां माया देवी शक्तिपीठ है। भारत के पौराणिक ग्रंथों और उपनिषदों में हरिद्वार को 'मायापुरी' कहा गया है। मान्यता है कि समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत यहां गिरा था। इसी कारण यहां कुंभ का मेला आयोजित किया जाता है।
हरिद्वार का शाब्दिक अर्थ है- हरि तक पहुँचने का द्वार है। इसे धर्म नगरी भी कहा जाता है। यहां का शांत वातावरण न सिर्फ श्रद्धालुओं को बल्कि पर्यटकों को भी बेहद लुभाता है।