Pitru Paksha 2023: पितृपक्ष 29 सितंबर 2023 से शुरु हो चुके हैं। पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों का पिंडदान और श्राद्ध कर्म किया जाता है। हिंदू धर्म में पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष प्रदान करने के लिए पिंडदान व श्राद्ध कर्म किया जाता है। मृत्यु के बाद कई तरह के कर्मकांड किए जाते हैं, जिसमें श्राद्ध, अस्थि विसर्जन और पिंडदान से जुड़े रीति रिवाज शामिल हैं। इसका उद्देश्य पूर्वजों या मृतकों की आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति है।
माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने इस प्रथा की शुरुआत की। पितृपक्ष में श्राद्ध और पिंडदान करने के लिए देश में कई जगहें हैं, जो आत्मा को मोक्ष दिलाने के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं। हरिद्वार से लेकर संगम, गया और बद्रीनाथ तक में पिंडदान किया जा सकता है। आइए जानते हैं पिंडदान के लिए भारत में पांच महत्वपूर्ण जगह।