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Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर करना है भगवान भोलेनाथ के प्रसिद्ध मंदिरो के दर्शन तो करें ये काम

Wed, 26 Feb 2025 06:20 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

इस महाशिवरात्रि के मौके पर अगर आप प्रसिद्ध शिव मंदिरों या ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का विचार बना रहे हैं तो कुछ बातें पहले से ही जान लें ताकि दर्शन आसानी से मिल जाएं और शिव मंदिरों की यात्रा भी सफल बन जाए।
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महाशिवरात्रि पर शिव मंदिरों के दर्शन से पहले करें ये काम - फोटो : iStock
Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 26 फरवरी 2025 को मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह हुआ था। इस मौके पर भक्त भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष पूजन करते हैं और गृहस्थ जीवन का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस उपलक्ष्य में उपवास किया जाता है और भगवान शिव के मंदिरों में दर्शन व पूजा-अर्चना की जाती है।   

देशभर में कई प्राचीन और चमत्कारी मान्यताओं वाले शिव मंदिर व शिवालय हैं। इसके साथ ही 12 ज्योतिर्लिंग हैं। ज्योतिर्लिंग वह स्थान है, जहां भगवान शिव ज्योति के रूप में प्रकट हुए और लिंग स्वरूप में स्थापित हैं। ये 12 ज्योतिर्लिंग देशभर में अलग-अलग राज्यों और शहरों में हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश के वाराणसी से लेकर मध्य प्रदेश के उज्जैन और महाराष्ट्र के नासिक का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

इस महाशिवरात्रि के मौके पर अगर आप प्रसिद्ध शिव मंदिरों या ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का विचार बना रहे हैं तो कुछ बातें पहले से ही जान लें ताकि दर्शन आसानी से मिल जाएं और शिव मंदिरों की यात्रा भी सफल बन जाए।
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त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग - फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि में कहां जाएं 

सबसे पहले तो वह मंदिर, या तीर्थ स्थान तय कर लें, जहां आप जाना चाहते हैं। यात्रा की योजना बनाने के लिए इस बात का ध्यान रखें कि आपका बजट कितना है और सफर के लिए आपको कितने दिन की छुट्टी मिल सकती है। यदि एक या दो दिन की छुट्टी है तो आसपास के शिव मंदिरों या ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पर जाने का निर्णय कर सकते हैं। 

पहले से यात्रा की प्लानिंग करें

महाशिवरात्रि के दिन मंदिरों में भारी भीड़ होती है, इसलिए पहले से यात्रा की योजना बनाएं। होटल और परिवहन की बुकिंग पहले ही कर लें, ताकि परेशानी न हो। अगर किसी तीर्थस्थान जैसे काशी या उज्जैन जा रहे हैं, तो वहां के विशेष नियमों और दर्शन समय की जानकारी प्राप्त करें।
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काशी में भक्तों की कतार - फोटो : अमर उजाला
मंदिर जल्दी पहुंचे

महाशिवरात्रि पर दर्शन करने के लिए मंदिर समय से पहले पहुंच जाएं। जल्दी मंदिर पहुंचेंगे तो कम भीड़ मिल सकती है और लंबी कतार में आपको अधिक समय बिताना नहीं पड़ेगा। सुबह या देर रात के समय दर्शन करना ज्यादा सुविधाजनक होता है, क्योंकि दिन में भीड़ बहुत बढ़ जाती है। कई मंदिरों में विशेष आरती और जलाभिषेक के लिए अलग समय निर्धारित होता है, इसलिए पहले से जानकारी लें।

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काशी में महाकुंभ का पलट प्रवाह - फोटो : अमर उजाला
यातायात नियम और भीड़ के लिए रहें तैयार

किसी प्रसिद्ध या प्राचीन मंदिरों के दर्शन के लिए जा रहे हैं तो यहां अत्यधिक भीड़ की संभावना के चलते यातायात नियमों और मार्गों में बदलाव किए जा सकते हैं।  ट्रैफिक और दर्शन की लंबी कतारों के लिए तैयार रहें। बड़े शिव मंदिरों के आसपास महाशिवरात्रि के दिन ट्रैफिक जाम की संभावना रहती है, इसलिए वैकल्पिक मार्गों की जानकारी रखें। कई स्थानों पर निजी वाहनों की बजाए सार्वजनिक वाहनों से गंतव्य तक पहुंचना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। इसका विकल्प भी तलाश लें। VIP दर्शन या ऑनलाइन दर्शन सुविधा का लाभ उठा सकते हैं, अगर उपलब्ध हो।
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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram
मंदिर परिसर में नियम

कई मंदिरों में चमड़े की वस्तुएं, कैमरा और मोबाइल फोन ले जाना मना होता है, इसलिए इन्हें बाहर जमा करने की सुविधा की जानकारी रखें। मंदिर में साफ-सफाई और अनुशासन बनाए रखें।
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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram
महाशिवरात्रि पर किन शिव मंदिरों के दर्शन करें?

काशी विश्वनाथ मंदिर

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख काशी विश्वनाथ धाम है। यह सबसे प्राचीन शिव मंदिर माना जाता है।

महाकालेश्वर मंदिर

मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर स्थित है। यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जहां कि भस्म आरती प्रसिद्ध है।

सोमनाथ मंदिर

12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात में समुद्र तट पर स्थित भव्य मंदिर है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर

महाराष्ट्र में 4 ज्योतिर्लिंग हैं जिसमें से एक नासिक में है। ये ज्योिर्लिंग त्र्यंबकेश्वर के नाम से प्रसिद्ध है क्योंकि इस शिवलिंग में तीन स्वरूप (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) दर्शाए जाते हैं।

बैद्यनाथ धाम

झारखंड के देवघर में बैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिंग। इसे 'कामना लिंग' कहा जाता है, यहाँ भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।

ओंकारेश्वर और ममलेश्वर

मध्य प्रदेश में महाकालेश्वर के अलावा एक और ज्योतिर्लिंग है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच स्थित द्वीप पर स्थापित प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग है।
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