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Guru Gobind Singh Jayanti 2020: इस गुरुद्वारे में आज भी मौजूद हैं पांच खास चीजें, आप भी दर्शन कर आएं

Thu, 02 Jan 2020 04:47 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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Guru Gobind Singh, Patna sahib Gurudwara - फोटो : Amar ujala
सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह की आज जयंती है। उनका जन्म बिहार की राजधानी पटना में हुआ था। प्रकाशोत्सव के अवसर पर हर साल यहां बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। पटना में स्थित तख्त श्री पटना साहिब या श्री हरमंदिर जी पटना साहिब, सिखों की आस्था से जुड़ा एक ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल है। बिहार के पटना साहिब गुरुद्वारा में संगतों की भारी भीड़ उमड़ती है। यहां आज भी गुरु गोविंद सिंह से जुड़ी खास चीजें संभाल कर रखी हुई हैं, जिनका दर्शन करने सिख अनुयायी जाते रहते हैं। आइए इसके बारे में जानते हैं विस्तार से:
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Guru Gobind Singh, Patna sahib, Gurudwara - फोटो : Instagram
सिख धर्म के अनुयाइयों के लिए स्वर्ण मंदिर श्री हरिमंदिर साहिब के बाद तख्त श्री पटना साहिब का स्थान सबसे पवित्र स्थलों में दूसरे नंबर पर है। पटना साहिब का सिख पंथ के मानने वालों में विशेष महत्व इसलिए है, क्योंकि सिखों के 10वें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह का जन्म हुआ था। इस गुरुद्वारा का निर्माण महाराजा रणजीत सिंह ने कराया था, जिन्होंने भारत और पाकिस्तान में कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे बनवाया है।
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गुरु गोबिंद सिंह से संबंधित प्रमाणिक वस्तुएं - फोटो : अमर उजाला
पटना स्थित इस गुरुद्वारे में गुरु गोबिंद सिंह से संबंधित कई प्रमाणिक वस्तुएं रखी हुई है। गुरु गोबिंद सिंह ने जीवन जीने के पांच सिद्धांत दिए हैं, जिन्हें पंच ककार कहा जाता है। सिखों में इन पांच चीजों को अनिवार्य माना जाता है। ये पांच चीजें हैं- केश, कड़ा, कृपाण, कंघा और कच्छा।

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गुरु गोबिंद सिंह की तलवार, तीर (File Photo) - फोटो : अमर उजाला
बिहार के पटना साहिब गुरुद्वारा में वो सभी चीजें मौजूद हैं, जिनका गुरु गोविंद सिंह उपयोग करते थे। यहां गुरु गोविंद की छोटी कृपाण भी मौजूद है, जिसे वो हमेशा अपने पास रखते थे। इसके अलावा यहां उनकी खड़ाऊं और कंघा भी रखा हुआ है। यहां मौजूद कुआं के बारे में बताया जाता है कि इसका इस्तेमाल गुरु गोविंद सिंह की मां पानी भरने के लिए किया करती थीं।
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File Photo - फोटो : अमर उजाला
पटना में सिख गुरुओं से जुड़े कई धार्मिक स्थल
पटना सिटी स्थित तख्त श्री हरिमंदिर के अलावा यहां सिख गुरुओं से जुड़े छह और गुरुद्वारे हैं। गुरुद्वारा गायघाट में सिखों के प्रथम गुरु नानक देव ठहरे थे, जबकि नौवें गुरु तेगबहादुर ने सपरिवार यहा प्रवास किया था। माता गुजरी का जाता सहित कई स्मृतिया यहां हैं। गुरु का बाग, सुनारटोली साहिब का भी अपना महत्व है। देश भर से सिख अनुयायी जब भी पटना पहुंचते हैं तो इन सभी गुरुद्वारों में दर्शन करने पहुंचते हैं।
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File Photo - फोटो : अमर उजाला
यहां बीता था गुरु गोविंद सिंह का बचपन
गुरुद्वारा बाललीला मैदान मैनी गुरु गोविंद सिंह का बचपन में क्रीड़ा स्थल होने के कारण यह धार्मिक महत्व का स्थल है। उनके बाल जीवन से जुड़ीं कई वस्तुएं यहां संरक्षित हैं। जूता, दुर्लभ चित्र, करौंदे का एक दुर्लभ पेड़ यहां संरक्षित है। कंगनघाट गुरुद्वारा गंगा के तट पर है। यहा बालक गुरु गोविंद सिंह ने अपने सोने का कंगन फेंका था। यहा गंगा स्नान के लिए वे आया करते थे।
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sikh - फोटो : अमर उजाला
सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह जी ने साल 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की थी, जो सिखों के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। गुरु गोबिंद सिंह ने ही गुरु ग्रंथ साहिब को सिखों का गुरु घोषित किया था। गुरु गोबिंद सिंह की शिक्षाएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं।

यहां पढ़ें: गुरु गोबिंद सिंह के 10 अनमोल वचन

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