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Chaitra Navratri 2023: विदेशों में स्थित है मां दुर्गा के प्रसिद्ध मंदिर, इस नवरात्रि कर सकते हैं दर्शन

Wed, 22 Mar 2023 12:23 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मंदिर में प्रवेश से पहले क्यों बजाई जाती है घंटी? - फोटो : iStock
Chaitra Navratri 2023: चैत्र नवरात्रि 22 मार्च 2023 से शुरू हो रही है। नवरात्रि माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का पर्व है। इस पर्व में लोग घर और मंदिर में कलश स्थापना कर माता का आह्वान करते हैं। देवी दुर्गा की पूजा के लिए मंदिर जाते हैं और दर्शन करते हैं। भारत में कई प्रसिद्ध और लोकप्रिय दुर्गा माता मंदिर हैं, जहां दर्शन के लिए जा सकते हैं। माता सती के शरीर के अंग और आभूषण धरती पर जिन जगहों पर गिरे, वह जगहें शक्तिपीठ बन गईं। ऐसे 52 शक्तिपीठ हैं, जो अलग अलग जगहों पर स्थित है और अलग अलग नामों से प्रसिद्ध हैं। देवी के सभी शक्तिपीठ भारत में स्थित नहीं हैं। कई शक्तिपीठों के दर्शन के लिए विदेश जाना पड़ता है। आइए जानते हैं भारत से बाहर स्थित देवी के शक्तिपीठों के बारे में, जहां आप दर्शन के लिए जा सकते हैं।
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हिंगलाज मंदिर - फोटो : सोशल मीडिया
पाकिस्तान में स्थित शक्तिपीठ

भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में देवी का प्रसिद्ध शक्तिपीठ स्थित है। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हिंगुला शक्तिपीठ है, जो देश के प्राचीन मंदिरों में से एक है। यहां माता हिंगलाज की पूजा होती है। मान्यता है कि यहां माता सती का सिर गिरा था। इसे नानी का मंदिर या नानी का हज कहते हैं। कहा जाता है कि इस शक्तिपीठ पर कई बार आतंकी हमले हुए लेकिन मंदिर को कोई नुकसान नहीं हुआ।
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लंका शक्तिपीठ - फोटो : facebook
श्रीलंका में शक्तिपीठ

भारत के दक्षिण में श्रीलंका है। इस देश में इंद्राक्षी शक्तिपीठ बसा है। यहां माता सती की पायल गिरी थी। पौराणिक कथा के मुताबिक, देवराज इंद्र और भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम ने इस शक्तिपीठ पर जाकर पूजा की थी। श्रीलंका के जाफना नल्लूर में माता को इंद्राक्षी पुकारा जाता है।

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नेपाल शक्तिपीठ - फोटो : facebook
नेपाल में तीन शक्तिपीठ
  • नेपाल में तीन शक्तिपीठ है। पहला गंडक नदी के पास आद्या शक्तिपीठ है, जहां माता सती का बायां गाल गिरा था। यहां माता को गंडकी पुकारा जाता है।
  • दूसरा शक्तिपीठ पशुपतिनाथ मंदिर के कुछ दूरी पर बागमती नदी के किनारे स्थित है। इस मंदिर का नाम गुहेश्वरी शक्तिपीठ है। मान्यता है कि यहां माता सती के दोनों जानु यानी घुटने गिरे थे। यहां देवी की महामाया रूप में पूजा की जाती है।
  • नेपाल का तीसरा शक्तिपीठ बिजयापुर गांव में बसा है। दन्तकाली शक्तिपीठ के नाम से लोकप्रिय इस जगह पर माता सती के दांत गिरे थे।
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देवी माता - फोटो : facebook
तिब्बत में स्थित शक्तिपीठ

भारत के करीब बसे तिब्बत में देवी सती की दाईं हथेली गिरी थी, जो मनसा देवी शक्तिपीठ के नाम से प्रसिद्ध है। यह शक्तिपीठ तिब्बत में मानसरोवर नदी के तट पर स्थित है।
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बांग्लादेश शक्तिपीठ - फोटो : facebook
बांग्लादेश में पांच शक्तिपीठ
  • बांग्लादेश में माता के पांच शक्तिपीठ है। पहला उग्रतारा शक्तिपीठ, जहां माता सती की नाक गिरी थी।
  • दूसरा अपर्णा शक्तिपीठ, जहां माता सती के बाएं पैर की पायल गिरी थी।
  • तीसरा सिलहट जिले में शैल नाम के स्थान श्रीशैल शक्तिपीठ है। यहां माता सती का गला गिरा था।
  • चौथा शक्तिपीठ चिट्टागोंग जिले में सीता कुंड स्टेशन के पास चंद्रनाथ पर्वत शिखर पर छत्राल में स्थित है। चट्टल भवानी शक्तिपीठ में माता सती की दायीं भुजा गिरी थी।
  • पांचवा शक्तिपीठ यशोरेश्वरी माता शक्तिपीठ है, जहां माता की बाईं हथेली गिरी थी।
  • बांग्लादेश का छठा शक्तिपीठ सिलहट जिले के खासी पर्वत पर जयंती शक्तिपीठ के नाम से बसा है। यहां माता सती की बाईं जांघ गिरी थी।
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