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Teachers Day 2020: जानते हैं शिक्षा से ज्यादा महत्वपूर्ण क्यों हैं शिक्षक

Sat, 05 Sep 2020 06:39 AM IST
Shashi Shashi लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शिक्षक दिवस 2020 - फोटो : Pixabay
5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है। शिक्षक दिवस भारत के पूर्व राषट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के दिन मनाते हैं। यह दिन शिक्षा के क्षेत्र शिक्षकों के योगदान और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। किसी भी सफल व्यक्ति की सफलता के पीछे उसके शिक्षक की मेहनत होती है। आइए जानते हैं कि शिक्षा से ज्यादा क्यों महत्वपूर्ण हैं शिक्षक...
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Teacher's day 2020 - फोटो : Facebook/Shanti Juniors-M.G Road
शिक्षक या गुरु का किसी भी इंसान के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है। शिक्षक छात्र को एक गीली मिट्टी से घड़े का आकार देता है। कबीर दास जी ने अपने इस दोहे में कहा है,
पंडित यदि पढि गुनि मुये, गुरु बिना मिलै न ज्ञान।
ज्ञान बिना नहिं मुक्ति है, सत्त शब्द परमान॥

 कबीरदास जी कहते है कि बड़े-बड़े विद्वान शास्त्रों को पढ़कर अपने आप को ज्ञानी होने का समझते हैं, परंतु गुरु के बिना ज्ञान नहीं मिलता और ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं मिलती है।
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शिक्षक दिवस पर अनमोल विचार - फोटो : Pixabay/Amarujala
गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढि गढि काढैं खोट ।
अंतर हाथ सहार दै, बाहर बाहै  चोट ।।


इस दोहे में कबीर दास जी शिक्षक की महत्वता बताते हुए कहते हैं कि शिष्य कच्चे घड़े के समान होता है, जिस तरह से कुम्हार घड़े को सुंदर और सही आकार देने के लिए अंदर से थाप मारता है, उसी तरह से गुरु भी अपने शिष्य को अनुशासन में रखकर उसे सही और गलत का मार्ग दिखाकर समाज में जीवन जीना सिखाता है।  

किसी के भी जीवन में गुरु ही होता है जो अपने शिष्य को अज्ञान रुपी अंधकार से निकाल कर प्रकाश रुपी ज्ञान की ओर लेकर जाता है। शिक्षक ही छात्र को जीवन में संघर्षों से लड़कर जीतना सिखाता है। एक सफल व्यक्ति वही होता है, जो अपने शिक्षक की हर बात को सही से आत्मसात करता है। अगर आप किसी भी सफल व्यक्ति के बारे में जानेंगे तो पाएंगे की उसकी सफलता के पीछे एक शिक्षक द्वारा दी गई शिक्षा होती है।  
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शिक्षक दिवस 2020 - फोटो : Pixabay
गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय।
बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय।।
 
कबीर जी इस दोहे में कहते हैं कि गुरू और गोबिंद (भगवान) एक साथ खड़े है तो किसे प्रणाम करना चाहिए।  ऐसी स्थिति में गुरू के श्रीचरणों में शीश झुकाना चाहिए क्योंकि उन्हीं की कृपा से गोविन्द का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इस तरह से कबीरदास जी ने शिक्षक की महिमा का वर्णन किया है। 

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