शिक्षक दिवस पर अनमोल विचार
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गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढि गढि काढैं खोट ।
अंतर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट ।।
इस दोहे में कबीर दास जी शिक्षक की महत्वता बताते हुए कहते हैं कि शिष्य कच्चे घड़े के समान होता है, जिस तरह से कुम्हार घड़े को सुंदर और सही आकार देने के लिए अंदर से थाप मारता है, उसी तरह से गुरु भी अपने शिष्य को अनुशासन में रखकर उसे सही और गलत का मार्ग दिखाकर समाज में जीवन जीना सिखाता है।
किसी के भी जीवन में गुरु ही होता है जो अपने शिष्य को अज्ञान रुपी अंधकार से निकाल कर प्रकाश रुपी ज्ञान की ओर लेकर जाता है। शिक्षक ही छात्र को जीवन में संघर्षों से लड़कर जीतना सिखाता है। एक सफल व्यक्ति वही होता है, जो अपने शिक्षक की हर बात को सही से आत्मसात करता है। अगर आप किसी भी सफल व्यक्ति के बारे में जानेंगे तो पाएंगे की उसकी सफलता के पीछे एक शिक्षक द्वारा दी गई शिक्षा होती है।