फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खुशहाल जिंदगी चाहिए तो जरूर सुनिए घर पर बीवी की बात, शोध में हुआ खुलासा

Sun, 09 Sep 2018 09:36 AM IST
पूजा दास
विज्ञापन
1 of 6
खुशहाल शादीशुदा जीवन के लिए आपसी संवाद बेहत जरूरी है। रिश्ते को चाहे कितने ही साल क्यों न बीत गए हों, पति-पत्नी को बात करनी चाहिए और एक-दूसरे की सुननी चाहिए।निशा और सिद्धार्थ की शादी को चार हो गए हैं। दोनों का प्रेम विवाह है। दोनों एक ही कंपनी में काम करते थे। तीन साल एक-दूसरे को जानने-समझने के बाद ही शादी का फैसला लिया। यानी दोनों सात सालों से एक-दूसरे को जानते हैं। वैसे तो दोनों की जिंदगी ठीक चल रही है, लेकिन दोनों के बीच अब झगड़े बहुत होने लगे हैं। छोटी-छोटी बातें झगड़े का कारण बन रही हैं। निशा की शिकायत है कि सिद्धार्थ उसकी बातों पर ध्यान नहीं देता।

ऑफिस से आते ही टीवी, लैपटॉप या फिर अखबार खोलकर बैठ जाता है। वह उसके सामने लाख बड़बड़ाती रहे, लगता ही नहीं कि वह कुछ सुन भी रहा है। जबकि सिद्धार्थ को लगता है कि ऐसी बातें सुनकर कोई क्या करेगा। प्रेस वाले ने कपड़े गुमा दिए या फिर सब्जी वाला नहीं आया या फिर कामवाली ने चार दिनों की छुट्टी ले ली है। ये सारी चीजें निशा खुद मैनेज कर सकती है। उसका इससे कोई लेना-देना नहीं। निशा को लगता है कि बात बड़ी हो या छोटी, उसकी बात सुनने वाला कोई है ही नहीं। उसकी उपेक्षा की जा रही है और छोटी सी बात से शुरू हुई बहस कई बार गंभीर झगड़े तक पहुंच जाती है। 
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 6
निशा और सिद्धार्थ जैसी समस्या कई लोगों की है। महिलाओं को अक्सर लगता है कि उनकी बात सुनी नहीं जा रही है। जबकि पुरुष उन बातों को इतना महत्वपूर्ण नहीं मानते कि उन पर ध्यान दिया जाए। यह स्थिति उलट भी हो सकती है। राजीव और रंजना का मामला कुछ ऐसा ही है। राजीव के पास ऐसी कई सारी बातें होती हैं, जिसे वह अपनी पत्नी के साथ साझा करना चाहता है। लेकिन घर और ऑफिस के कामों में उलझी रंजना के पास अपनी पति को सुनने का वक्त न के बराबर होता है। और शायद यही वजह है कि एक-दूसरे को समझने की बजाय अब उनके पास एक-दूसरे के लिए शिकायतें ही बची हैं। दोनों को लगता है कि उनके बीच वैसा भावनात्मक जुड़ाव भी नहीं है, जैसा एक पति-पत्नी के बीच होना चाहिए।

श्रद्धा और दीपक की स्थिति थोड़ी अलग है, लेकिन समस्या ऐसी ही है। शादी के पांच साल बाद भी श्रद्धा को लगता है कि वह दीपक के साथ बहुत सी बातें शेयर नहीं कर पाती है। श्रद्धा बताती हैं कि दीपक तो अपनी बात आराम से कह देते हैं, लेकिन उनकी बात कभी पूरी नहीं सुनते। बात समाप्त होने से पहले ही निष्कर्ष निकाल लेते हैं। श्रद्धा को लगता है कि दीपक उसकी बात कभी नहीं समझता, बल्कि बातों को अपने ही तरीके से समझाने की कोशिश करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, खुशहाल शादीशुदा जीवन के लिए आपसी बातचीत होना जरूरी है। शादी चाहे नई हो या फिर रिश्ते को कितने ही साल क्यों न बीत गए हों, पति-पत्नी को एक-दूसरे से बात करनी चाहिए और एक-दूसरे की सुननी चाहिए। 
विज्ञापन

3 of 6
कठिन समय में, पति-पत्नी के बीच घनिष्ठता और निकटता की भावना ही रिश्ते को खींच सकती है और रिश्ता अच्छा होने पर ही पति-पत्नी हर स्थिति में आगे बढ़ने का हौसला पाते हैं। अपने रिश्ते में बेहतर संबंध बनाने का एक तरीका है, अपने विचारों और भावनाओं को एक-दूसरे के साथ साझा करना और फिर उन बातों पर प्रतिक्रिया देना, जिससे आप दोनों अच्छा महसूस कर सकें। संबंधों के शोध में, इसे "आपके साथी की जरूरतों के प्रति उत्तरदायी" कहा जाता है। पति-पत्नी के बीच अच्छे और बेहतर रिश्ते के लिए बेहतर संवाद और निकटना होना बेहद जरूरी है।
सुनना है जरूरी

पति-पत्नी के बीच बेहतर संवाद होने का मतलब केवल यह नहीं कि हम क्या बोल रहे हैं या कैसे बोल रहे हैं। बेहतर संवाद करने में एक अच्छा श्रोता होना भी शामिल है। दरअसल, अगर हम दूसरों की बातें ठीक से सुन नहीं रहे तो हम कभी बेहतर संवाद करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं।

अध्ययन कहता है कि एक औसत व्यक्ति, दिन का 45 से 70 फीसदी दूसरों को सुनने में खर्च करता है। लेकिन प्रत्येक 24 घंटे की अवधि में, आपके पार्टनर के साथ, आपके लिए गुणवत्ता समय बहुत कम होता है। अधिकांश जोड़े प्रतिदिन औसतन नौ मिनट के लिए अर्थपूर्ण रूप से बातचीत करते हैं। यदि आप सुनने में समय नहीं दे रहें हैं तो शायद आप सूक्ष्म संकेतों को समझने का अवसर खो रहे हैं कि आपका पार्टनर कैसा महसूस कर रहा है, जो शायद आप दोनों को और करीब ला सकता है। 

4 of 6
सुनना एक कौशल है, जिसे विकसित किया जा सकता है। यह एक ऐसा कौशल है जो न केवल आपको यह बताता है कि क्या कहा जा रहा है, बल्कि प्रभावी ढंग से प्रक्रिया को भी बताता है, जैसे कि बात कैसे कही गई है। भाषा का प्रकार और इस्तेमाल किए गए आवाज की टोन और यहां तक कि आपके साथ बात करने वाला व्यक्ति कैसी बॉडी लैंग्वेेज का उपयोग कर रहा है, यह भी बताता है।आप अधिक ध्यान से सुनना सीख सकती हैं और अगर आप एक अच्छी श्रोता हैं, तो आपका पार्टनर आपके सामने खुलकर अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकता है। ऐसा कर आप उसे महसूस करा सकती हैं कि आपके लिए वह उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितनी आप उनके लिए हैं। 

बात को सुनें 
बातचीत के दौरान अपके दिमाग में कई तरह के ख्याल आना स्वाभाविक है, लेकिन अगर आप अपनी इस आदत के बारे में जानती हैं, तो प्रवृत्ति का मुकाबला करना आसान है। हम जितनी तेजी से बात करते हैं, उससे ज्यादा तेजी से सुनते हैं। कुछ अध्ययन के मुताबिक, औसत व्यक्ति 125 से 180 शब्द प्रति मिनट की दर से बात करता है, जबकि हम प्रति मिनट लगभग 400 से 500 शब्द की दर से सुन सकते हैं।

वक्ता की तुलना में श्रोता हमेशा एक बेहतर स्थिति में होता है और यही कारण है कि आप काम करने या खाना पकाने के बारे में सोचते हुए भी वक्ता की बात को सुन और समझ सकती हैं। 
एक और महत्वपूर्ण बात जिसे आमतौर पर लोग अनदेखा करते हैं। अगर आपका पार्टनर बात करना चाहता है और आप ध्यान नहीं दे सकती हैं तो ईमानदारी से न बोलें और बाद में बात करने के लिए समय निर्धारित करें। फिर टीवी बंद करें, अपने स्मार्टफोन दूर रखें और एक साथ बैठें। ये बातें दिखाती हंै कि आप अपने साथी का सम्मान करती हैं और उसे सुनने के लिए समर्पित हैं।
विज्ञापन

5 of 6
बीच में न बोलें
 ऐसा अक्सर होता है कि जब कोई सामने बोल रहा होता है, तो उसकी पूरी बात सुने बगैर हम अपनी बात कहने की कोशिश करने लगते हैं। बीच में टोकना समस्या को और बढ़ा सकता है। अपनी बात ठीक से न रख पाने की स्थिति में सामने वाले के आक्रमक होने की संभावना बढ़ जाती है। बातों को आराम से कहने की बजाय, चिल्लाकर या जोर से रखने की कोशिश की जाती है। इसलिए जब सामने वाला अपनी बात रख रहा हो, तो बीच में बात काटने की गलती न करें। पहले उसकी बात समाप्त होने दें, उसके बाद ही अपनी बात रखें। ऐसा करने से सामने वाले को महसूस होता है कि उसकी बात को ध्यान से सुना गया है और वह खुलकर अपनी बात कर सकता है। 
सिर्फ सुनें
कनेक्ट करने के लिए, बिना किसी हस्तक्षेप के, बिना कोई प्रासंगिक या गैर-प्रासंगिक मुद्दा उठाए आपको सिर्फ सुनने की जरूरत है। शांत होकर केवल आप बात सुनें। यदि आपका पार्टनर किसी कठिन समय से गुजर रहा है, तो उसे अपने दर्द को बयां करने का पूरा मौका दें। जब तक वह खुद को अपने नकारात्मक विचारों से बाहर नहीं निकाल लेते, तब तक अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने का प्रयास न करें। 
कोई सलाह नहीं
आप समझती हैं कि आप दोस्तों को 'अच्छी सलाह' देती हैं, इसका मतलब है कि आपने उनकी समस्याओं को सुना है, उनकी परिस्थिति को समझ लिया है इसलिए, आप उन्हें सलाह देने के योग्य हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि, इसे सुनना नहीं कहते हैं। सलाह देने की आदत की प्रवृत्ति को रोकना चाहिए। भले ही वे अच्छे इरादे से ही क्यों न दिए गए हों। कई बार आपकी सलाह आपके पार्टनर के मनोबल को गिरा सकती है और वह अपनी भावनाओं को पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
बात करते समय बंद रखें गैजेट
यदि आप अपने सुनने के कौशल को मजबूत करना चाहती हैं, तो इसके बीच में आने वाले विचलन को समाप्त करना होगा। जब आप अपने साथी को सुन रही हों, तो किसी भी तरह की ध्यान भटकाने वाली चीज दूर रखें। इसलिए जब आप अपने साथी के साथ चर्चा के लिए बैठते हैं, तो अपने स्मार्टफोन और अन्य गैजेट को बंद कर दें।

जवाब देने से पहले सोचें
आप यह सुनिश्चित करें कि सामने वाला क्या कह रहा है, आपने उसे समझ लिया है। मानसिक रूप से नोट्स लें। जिस मुद्दे पर बात की जा रही है, उस पर जवाब देने से पहले सोचें। सामने वाले की बात समाप्त होने के बाद ही अपनी दुविधा या शंका स्पष्ट करें। 

अक्सर देखा जाता है कि जोड़े अपने अंदर की गहरी इच्छाओं और सबसे  चुनौतीपूर्ण विचारों को आवाज देने से बचते हैं, क्योंकि उन्हें डर होता है कि इसे अस्वीकार कर दिया जाएगा या फिर उनके और पार्टनर के बीच दूरी आ सकती है। कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखा जाए, तो हम बेहतर संचार कर सकते हैं और रिश्तों को घनिष्ट बना सकते हैं। 

सामने वाले की बात बिना आलोचनात्मक हुए सुनें। पहले से ही दिमाग में धारणा न बना लें कि यह बात छोटी है या महत्वपूर्ण नहीं है। अगर आप छोटी-छोटी बातों को भी ध्यान से सुनते हैं तो सामने वाला आपके साथ कंफर्टेबल हो जाता है और अपनी किसी भी बात को आराम से आपके साथ बांट सकता है।

शब्दों को ध्यान से सुनें और समझने की कोशिश करें कि वक्ता क्या कहना चाह रहा है। आपके दिमाग को दी गई जानकारी का एक मानसिक मॉडल बनाने की अनुमति दें। बाधा न डालें और बीच में ही अपने समाधानों को न थोपें। स्पष्ट प्रश्न पूछने के लिए वक्ता की बात खत्म होने का इंतजार करें। 

‘आप मेरी बात कभी नहीं सुनते’, रिश्ते में यह शिकायत आम है। हमारे पास लोग ऐसी समस्या के साथ अक्सर आते हैं। हमने कई लोगों से जनाना चाहा कि वे अपने पारस्परिक बातचीत में और क्या चाहते हैं। अधिकांश लोगों की इच्छा होती है कि उन्हें उन लोगों द्वारा समान रूप से देखा, सुना और प्यार किया जाए, जिसके लिए वे हैं। हालांकि, अच्छे श्रोता होने का कौशल सीखा जा सकता है और प्रभावी दिखने के लिए अभ्यास की भी आवश्यकता है।

- डॉ. शिवानी मिश्री साधो, मनोवैज्ञानिक और विवाह सलाहकार
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें