प्रतीकात्मक तस्वीर
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बढ़ता स्क्रीन टाइम, बढ़ती मुसीबतें
तेजी से दौड़ रहे समय में कोरोना के आने के बाद एकदम से लगाम लगी थी। लेकिन इंसान हर मुश्किल का हल निकालने की जद्दोजहद में रहता है। कुछ ही समय में इंटरनेट और वर्चुअल दुनिया ने सारी दुनिया को एकसूत्र में बांध दिया। दिक्कत यह बढ़ी कि लोग इस वर्चुअल दुनिया को ही असली दुनिया में बैठे हैं और असली दुनिया से दूर हो गए।
'लॉकडाउन की शुरुआत से ही मैं समझ गई थी कि अब सब अपने अपने फोन लेकर खो जाएंगे और फिर मैं पूरे घर में अकेली घूमती फिरूंगी।' कहती हैं मणिका। उनके अनुसार-'मैं जानती हूं कि काम तो करना ही होगा इसलिए उस समय तो गैजेट्स का यूज करने से किसी को नहीं रोक सकती। लेकिन बाकी समय के लिए कोशिश कर सकती हूं। इसलिए मैंने पहले हफ्ते में ही रूल्स बना दिए, जिन्हें पूरे घर को फॉलो करना ही होगा। जैसे कि काम के अलावा कितना एक्स्ट्रा टाइम फोन या लैपटॉप को देना है, खाना सबको एक जगह ही खाना है, संडे को फोन को कम से कम उपयोग में लाना है और सबसे बड़ी बात रात को उसी टाइम पर सोना है और सुबह उसी टाइम पर उठना है, जिस टाइम पर कोरोना आने के पहले उठा करते थे।'