देव उठनी ग्यारस अर्थात तुलसी विवाह का त्योहार आ रहा है। इसके साथ ही पिछले कुछ महीनों से विवाह जैसे पुण्य प्रसंग पर लगी रोक हट जाएगी और बड़े पैमाने पर विवाह के आयोजन होने लगेंगे। यह विशेषकर हिन्दू तिथि के अनुसार एक पर्व है। वैसे अन्य धर्मों में सालभर भी विवाह आयोजन होते हैं। मुख्य बात यह है कि धर्म चाहे कोई भी हो, विवाह वह रस्म है जो दो लोगों के साथ-साथ दो परिवारों को भी जोड़ती है। ऐसे में अगर इस रिश्ते की शुरुआत में ही समस्याएं सामने आने लगे तो? इसके लिए हमारे देश में कुछ धर्म और समाजों में विवाह पूर्व कुंडली मिलाने की परंपरा है। कुंडली मिलान को कई लोग प्राथमिकता देते हैं और यह माना जाता है कि अच्छी कुंडली मिलाने से रिश्ते ज्यादा टिकते हैं। अब यह दावे कितने सटीक हैं, यह इतर बात है क्योंकि शादियां तो उनकी भी होती हैं और लंबी चलती है जो कुंडलियां नहीं मिलाते।
कुंडली मिलान होना जरूरी है लेकिन गुणों और ग्रहों वाली कुंडली की बजाय मेडिकल कुंडली का मिलान ज्यादा जरूरी है। यह न केवल भविष्य के रिश्तों की नींव को मजबूत बनाती है बल्कि एक दम्पत्ति के बीच भरोसे को भी सशक्त करती है। इसलिए विवाह से पहले मेडिकल कुंडली का मिलान जरूरी है।