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Relationship Tips: शादी से पहले आर्थिक स्थितियों की जांच है जरूरी, जीवनसाथी से मांग लें ये दस्तावेज

Wed, 07 Dec 2022 05:23 PM IST
स्वाति शैवाल लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नई शुरुआत के पहले हो पूरी बात - फोटो : istock
विवाह दो लोगों के बीच का वह बंधन है जिसकी नींव आपसी विश्वास पर टिकी होती है। इस रिश्ते में पारदर्शिता का भी बहुत महत्व है। पारदर्शिता का न होना भावनाओं को तो ठेस पहुंचाता ही है, हमेशा के लिए विश्वास को तोड़ देता है। इसकी वजह से रिश्ते में दरार आ सकती है और रिश्ता टूटने की कगार पर आ जाता है। खासकर अगर किसी बात को जानबूझकर छुपाया गया है तो।  

यही पारदर्शिता रिश्ते की शुरुआत के दौरान भी कई स्थितियों को लेकर रखी जानी चाहिए, जिनमें से एक है वित्तीय स्थिति। आजकल लड़का हो या लड़की, आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्वतन्त्रता को लेकर दोनों ही स्पष्ट सोच रखते हैं। अपने करियर के प्रति समर्पण और भविष्य को लेकर सजगता भी रखते हैं। ऐसे में चाहे लव मैरिज हो या अरेंज, जरूरी है कि दोनों एक-दूसरे से उन सभी जानकारियों को साझा अवश्य करें जो उनके रिश्ते और भविष्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। 
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स्पष्ट रखें वित्त संबंधी बातें - फोटो : istock
क्यों है जरूरी फाइनेंस पर बात करना 

फाइनेंस की बातें यानी आर्थिक स्थिति से संबंधित बातें। भावनात्मक तौर पर यह कहा जा सकता है कि रिश्तों के बीच पैसों को क्या लाना! लेकिन असल में अक्सर आर्थिक झगड़े ही रिश्तों में दरार आने का बड़ा कारण बनते हैं। किसने, किसपर, कैसे, क्या खर्च किया, कौन किस तरह से खर्च करेगा, शादी के बाद क्या नई जिम्मेदारियां जुड़ेंगी और किस पर कितना भार आएगा।

यह सब बातें अगर पहले से ही स्पष्ट हों तो रिश्तों की गर्माहट हमेशा बनी रहेगी। इसलिए इन सभी बातों को पहले से ही शांति से बैठकर समझें और तय करें। इससे यह फायदा होगा कि आगे किसी भी तरह की असमंजसता और उलझन नहीं होगी और दूसरे आपको सामने वाले की एप्रोच भी समझ आ जाएगी।
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शुरूआती मुलाकातों में ही साझा करें विचार - फोटो : istock
इन बातों को करें क्लियर 

सैलरी और खर्चे


आजकल ज्यादातर दम्पति कामकाजी होते हैं। चाहे वे किसी फर्म से जुड़े हों या कोई निजी काम करते हों। वर्तमान जीवनशैली के लिहाज से दो लोगों का कमाना गलत भी नहीं लेकिन विवाह के पूर्व यह जरूरी है कि लड़का-लड़की दोनों अपनी सैलरी और खर्चों के बारे में खुलकर बात करें।

अगर आप यह सोचते हैं कि सैलरी अभी ज्यादा बता देता हूँ या खर्चे अभी कम बताती हूँ, बाद में तो सब एडजस्ट हो जाएगा। तो आप सबसे बड़ी गलती करते हैं। यह एक तरह का धोखा होता है जो आप सामने वाले को दे रहे होते हैं। बाद में सच्चाई सामने आने पर रिश्ता निभाया भी जाए तो अविश्वास की छाया उसपर बनी रहती है। 

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कर्जे न बनें मुसीबत - फोटो : pixabay
लोन पर भी करें बातचीत 

युवावस्था में लिए गए लोन अधिकांशतः एजुकेशन संबंधी ही होते हैं, जो कि नौकरी के शुरूआती सालों में चुक भी जाते हैं। यदि शादी तय होने तक आप इसे चुका नहीं पाए हैं तो सबसे पहले इसे ही पूरा करें। यदि शादी के समय आपके पास कोई भी लोन है तो अतिरिक्त खर्चों या लोन से बचें। याद रखें कि शादी के बाद आपकी जिम्मेदारियां (लड़का-लड़की दोनों की) बढ़ेंगी ही। ऐसे में नया लोन दिक्क़तें खड़ी कर सकता है।

दिखने में ईएमआई भले ही आसान लगें लेकिन हर महीने नियत समय पर इसे चुकाना आसान नहीं होता। इसलिए कर्जों और लोन को लेकर पूरा स्पष्टीकरण रखें। यदि आपके परिवार (दोनों तरफ) में भी कोई बड़ा लोन सिर पर है तो इसको लेकर भी पहले से बात स्पष्ट करें, ताकि शादी में होने वाले सामान्य खर्चों को लेकर भी बाधा न आये।
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बहस का कारण न बने आर्थिक व्यवहार - फोटो : istock
लेन-देन व्यवहार

ये वह स्थिति है जो शादी के बाद बहुत सारे रिश्तों के टूटने का कारण बन सकती है। यह केवल शादी में दिए जाने वाले उपहारों तक ही सीमित नहीं रहती, शादी के बाद होने वाले व्यवहार पर भी इसका असर दिखाई देता है।

उदाहरण के लिए आपने पहले यह स्पष्ट नहीं किया कि आप शादी के बाद एक-दूसरे के रिश्तेदारों या परिचितों के मामले में किसी तरह की आर्थिक मदद करेंगे या नहीं। शादी के बाद अचानक ऐसी कोई स्थिति बनी तो ये बहस का मसला बन सकता है। इसलिए शादी तय होते समय ही तय कीजिए कि क्या शादी के बाद ऐसी कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी रहेगी। यदि रहेगी तो उसे कैसे हैंडल करना है। 
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कुछ चीजों का सीक्रेट रहना भी है जरूरी - फोटो : getty images
सेविंग्स और सीक्रेट्स 

अगर बात विश्वास की हो तो बातों को छुपाना या किसी को धोखे में रखना गलत है लेकिन वर्तमान स्थितियों में हर आर्थिक जानकारी शादी तय होने के पहले या शुरुआती दौर में ही एक-दूसरे को देना भी गलत है। कुछ आर्थिक सीक्रेट्स थोड़े समय के लिए सीक्रेट्स ही रहने चाहिए। इसका यह मतलब नहीं कि इनके बारे में कभी भी बात न करें लेकिन एकदम से इन्हें सामने न लाएं।

उदाहरण के लिए आपकी पर्सनल सेविंग्स और प्लानिंग। एक-दूसरे के साथ रहते रहते आप जब समझने लग जाएँ, विश्वास पुख्ता होने लगे तब जरूरत पड़ने पर ही इसका जिक्र करें। इसी तरह अपनी पर्सनल सेविंग्स पर भी केवल आपका अधिकार है और रहेगा, इस बात को भी शुरू से ही स्पष्ट रखें।  
 
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आपसी समझ से लें फैसले - फोटो : istock
जॉइंट खाता और बचत 

ये स्थिति अधिकांश जोड़ों के साथ होती है कि शादी के बाद वे जॉइंट अकाउंट या कोई निवेश शुरू करते हैं। यदि आप ऐसे किसी अकाउंट या बचत के तरीके के बारे में सोच रहे हैं तो पहले इसकी पूरी जानकारी  मिलकर, एक-दूसरे से साझा करें।

किसी प्रोफेशनल से इस बारे में राय लें और सोच समझकर फैसला करें। आपका फैसला किसी भी एक के हक़ में न होते हुए, संतुलित होना चाहिए, ताकि भविष्य में इसको लेकर कोई दिक्कत न आये। इसी तरह किसी पॉलिसी या अकाउंट में नॉमिनी बनाने को लेकर भी स्पष्ट निर्णय लें, न कि भावुकता से। यह बात लड़का-लड़की दोनों पर लागू होती है। 
 
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