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Smartphone Addiction: क्या बार-बार फोन चेक करने की है आदत? दिमाग पर होता है गहरा असर, दिखने लगते हैं ये लक्षण

Sat, 18 Feb 2023 02:19 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शोध में पता चला कि हर उम्र के लोगों का स्क्रीन टाइम बढ़ता जा रहा है और बार बार फोन चेक करना उतना ही खतरनाक होता जा रहा है।
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फोन का मस्तिष्क पर असर - फोटो : Istock
आजकल की लाइफस्टाइल ने लोगों के जीवन पर बुरा असर डाला है। सुबह जागने से लेकर रात में सोने तक लोग कई ऐसी गलत एक्टिविटी में शामिल होते हैं, जिसके कारण उनके मस्तिष्क और शरीर पर असर पड़ता है। कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो जाती है। इन्हीं गलत गतिविधियों में से एक फोन की लत है। लोग अपने मोबाइल फोन से इस कदर जुड़ चुके हैं उन्हें सुबह उठते ही सबसे पहले अपना फोन चेक करना होता है। बार-बार फोन चेक करने की आदत के कारण उनके मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी ने बार-बार स्मार्टफोन चेक करने के कारण दिमाग पर होने वाले असर पर शोध किया। शोध में पता चला कि हर उम्र के लोगों का स्क्रीन टाइम बढ़ता जा रहा है और बार बार फोन चेक करना उतना ही खतरनाक होता जा रहा है।
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फोन का मस्तिष्क पर असर - फोटो : Pixabay
आइफोन उपयोगकर्ताओं पर हुआ शोध

ब्रिटिश जर्नल ऑफ साइकोलॉजी में छपी शोध रिपोर्ट के मुताबिक, बार-बार फोन चेक करने से दैनिक जीवन में आने वाली छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान निकालने की क्षमता को कम कर सकता है। फोन चेक करने की आदत के कारण प्रॉब्लम सॉल्विंग एटीट्यूड को कमजोर बना सकता है।
 
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फोन का मस्तिष्क पर असर - फोटो : social media
स्मार्टफोन को बार-बार चेक करने से ध्यान केंद्रित नहीं रहता

अध्ययन में पता चला कि लोग छोटी छोटी समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए फोन का इस्तेमाल करने लगे हैं। चाहे उन्हें बोरियत कम करनी हो या टाइम पास करना हो, वह अपने स्मार्टफोन में व्यस्त हो जाते हैं। इस कारण उनका मस्तिष्क पर नियंत्रण कम होता जा रहा है और ध्यान भटकने, काम अधूरे छूटने जैसी स्थिति बढ़ने लगी है। स्मार्टफोन के इस्तेमाल की आदत के कारण लोग बात करते करते शब्द भूलने लगते हैँ।

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फोन का मस्तिष्क पर असर - फोटो : pixabay
बात करते समय भूलने लगते हैं शब्द

इस शोध के प्रमुख शोधकर्ता एंड्री हैरटैंटो की मानें तो भले ही स्मार्टफोन ने कुछ कामों का आसान बना दिया है लेकिन अब लोग अनजाने में बिना जरूरत के भी स्मार्टफोन को चेक करने के आदी हो गए हैं। अध्ययन के लिए यूनिवर्सिटी ने आईफोन उपयोगकर्ताओं को चुना। इन लोगों के मोबाइल इस्तेमाल करने के तरीके, समय और कितनी बार मोबाइल का उपयोग करते हैं, इसकी जांच की गई। एक हफ्ते तक ऐप के जरिए उनके मोबाइल की माॅनिटरिंग की गई और पाया गया कि बार बार फोन चेक करने वाले लोगों के बहुत से काम अधूरे रह जाते हैं। इसका कारण उनका ध्यान केंद्रित न हो पाना है। ऐसे लोग बातचीत के दौरान सही शब्दों का उपयोग नहीं कर पाते, क्योंकि वह बात करते करते शब्द भूल जाते हैं।
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फोन का मस्तिष्क पर असर - फोटो : pixabay
बच्चों में मायोपिया का खतरा

इसके अलावा स्मार्टफोन के इस्तेमाल से बच्चों में मायोपिया का खतरा भी बढ़ता है। जर्नल आफ मेडिकल इंटरनेट रिसर्च में छपी रिपोर्ट के अनुसार स्मार्टफोन के अधिक इस्तेमाल से दुनियाभर में 5 से 8 साल की आयु के 49.8 फीसदी बच्चे मायोपिया के शिकार हो सकते हैं। स्मार्टफोन के अधिक उपयोग से आंखों की रोशनी भी जा सकती है और एस्थेनोपिया जैसी बीमारी भी हो सकती है।
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