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प्री मेनोपॉजल सिम्टम्स या मेनोपॉज के पहले आने वाले लक्षण, डॉ. से जानें कैसे बिताएं स्वस्थ जीवन

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
Medically Reviewed by Ms. Namita shukla

डॉ. नमिता शुक्ला,
एमएस. ऑब्सटीट्रिक्स एंड गायनोकोलॉजी


क्या है प्रक्रिया: मेनोपॉज का मतलब है मासिक चक्र की प्रक्रिया का रुक जाना। आमतौर पर ये स्थिति 45-50 वर्ष की उम्र के दौरान सामने आती है और इसी समय लक्षण सामने आते हैं। कुछ महिलाओं में 40 वर्ष के बाद से ही प्री मेनोपॉजल सिम्टम्स भी दिखाई दे सकते हैं। प्री मेनोपॉजल सिम्टम्स या मेनोपॉज के पहले आने वाले लक्षण इस बात का इशारा होते हैं कि कुछ समय मे मासिक चक्र बन्द हो सकता है। इन लक्षणों में शामिल हो सकते हैं-

* मासिक चक्र ने अनियमितता जैसे जल्दी जल्दी मासिक आ जाना, अधिक रक्तस्राव आदि
* मासिक के समय अधिक तकलीफ बढ़ना
* थकान, कमजोरी होना
* जोड़ों और हड्डियों में दर्द और जकड़न
* हॉट फ्लैशेज़ यानी गर्मी या शरीर में जलन का तेज एहसास।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
* रात में तेज पसीना आना

* जल्दी नींद का टूटना या अनिद्रा
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
* बालों का झड़ना, बालों और त्वचा का रूखा होना

* चिड़चिड़ापन, गुस्सा आना या एंग्जायटी

* वैजाइनल ड्रायनेस या निजी अंगों का रूखापन, उनमे खुजली आदि

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सलाह जरूर लें

मासिक चक्र की ही तरह मेनोपॉज भी महिलाओं की ज़िंदगी का महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसका सही तरीके से होना भी स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत मायने रखता है। इसलिए इस संदर्भ में कुछ चीजों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे-
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
* 40 की उम्र के बाद डॉक्टर से मेनोपॉज के बारे में पूरी जानकारी लें और साल में एक बार अपना चैकअप अवश्य कराएं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
* अगर आपको किसी भी प्रकार के शारीरिक लक्षण परेशान कर रहे हैं तो तुरन्त डॉक्टर से सम्पर्क करें।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pexels.com
* नींद, पोषक तत्वों से भरपूर भोजन और एक्सरसाइज को जीवन मे शामिल करें।

* योग व ध्यान से आप व्यवहारगत समस्याओं पर नियंत्रण कर सकती हैं। इन्हें अपनाएं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
* एचआरटी यानी हार्मोन थैरेपी के बारे में जानकारी लें। चूंकि मेनोपॉज के दौरान और उसके बाद शरीर में हार्मोन्स का असंतुलन हो जाता है। ऐसे में डॉक्टर आपको कुछ हार्मोन्स प्रिस्क्राइब कर सकते हैं। लेकिन अपने मन से इन हार्मोन्स या सप्लीमेंट्स का सेवन न करें। इन हार्मोन्स के अधिक सेवन से भी बहुत तकलीफ हो सकती है। डॉक्टर आपको इन दवाइयों के सेवन का तरीका, कब तक इन्हें लेना है और क्या सावधानियां रखनी हैं, ये बताएंगे। उसी हिसाब से इनका सेवन करें।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
* व्यवहार में समस्याओं के लिए यदि जरूरत पड़े तो आप प्रोफेशनल से काउंसिलिंग भी ले सकती हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
* इस पूरे दौर में परिवार का सहयोग बहुत मायने रखता है। महिलाओं की इस स्थिति को समझना बहुत जरूरी है। इसलिए इसे नजरअदांज करने की बजाय जितना हो सके सपोर्ट करें।

नोट: डॉक्टर नमिता शुक्ला, एमएस हैं और वे एक ऑब्सटीट्रिक्स एंड गायनोकोलॉजी डॉक्टर हैं। मेडिकल क्षेत्र में इनके पास एक लंबा अनुभव है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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