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क्यों मनाया जाता है अल्पसंख्यक अधिकार दिवस, कौन से दायित्व निभाती है सरकार?

Wed, 18 Dec 2019 12:46 PM IST
निलेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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Minority Day - फोटो : Amar ujala
अपने लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए दुनिया भर में अलग पहचान रखने वाला हमारा देश भारत अल्पसंख्यक समुदायों के विकास के प्रति गंभीर रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए शुरू किया गया अल्पसंख्यक अधिकार दिवस हर साल 18 दिसंबर को मनाया जाता है। इसके तहत अल्पसंख्यक क्षेत्र विशेष में उनकी जाति, धर्म, संस्कृति, भाषा, परंपरा आदि की सुरक्षा सुनिश्चित करना मुख्य उद्देश्य होता है। भारतीय संविधान में अल्पसंख्यक होने का आधार धर्म और भाषा को माना गया है। भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 19 फीसदी अल्पसंख्यक समुदाय हैं। आइए जानते हैं इस दिवस के बारे में विस्तार से:
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अल्पसंख्यक अधिकार दिवस की शुरुआत साल 1992 में हुई। - फोटो : Pixabay
कब शुरू हुआ अल्पसंख्यक अधिकार दिवस
अल्पसंख्यक अधिकार दिवस की शुरुआत साल 1992 में हुई। भारत में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय अल्पसंख्यकों से संबंधित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है और अल्पसंख्यक समुदाय के हितों के लिए समग्र नीति के निर्माण, इनकी योजना, समन्यव, मूल्यांकन व नियामक रूपरेखा और नियामक विकास कार्यक्रमों की समीक्षा भी करता है।
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सिख(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
अल्पसंख्यक वर्ग में कौन-कौन आते हैं
अल्पसंख्यक समुदाय से तात्पर्य है- किसी राष्ट्र-राज्य में रहने वाले ऐसे समुदाय, जो संख्या में कम हों और सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हों। जिनकी प्रजाति, भाषा, धर्म या परंपरा बहुसंख्यकों से अलग हो और राष्ट्र के निर्माण, विकास, एकता, संस्कृति और परंपरा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान हो। भारत में मुस्लिम, सिख, बौध, इसाई, पारसी और जैन समुदाय को अल्पसंख्यक के तौर पर अधिसूचित किया गया है।
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अल्पसंख्यकों के लिए भारत में अलग से मंत्रालय है। - फोटो : PIB
अल्पसंख्यकों के लिए क्या करती है सरकार
अल्पसंख्यकों के लिए भारत में अलग से मंत्रालय है। यह मंत्रालय अल्पसंख्यकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करता है और उनकी रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करता है। जैसे शिक्षा का अधिकार, संवैधानिक अधिकार, आर्थिक सशक्तिकरण, महिला सशक्तीकरण, समान अवसर, कानून के तहत सुरक्षा और संरक्षण आदि। देखा जाता है कि शिक्षा या रोजगार के अवसर, वित्तीय समावेशन आदि क्षेत्रों में अल्पसंख्यक पीछे रह जाते हैं, तो इस स्थिति में उन्हें मार्गदर्शन और सहायता दी जाती है।
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