दुनियाभर में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच कई देशों में लॉकडाउन चल रहा है। हालांकि अब धीरे-धीरे इसमें ढील दी जा रही है। भारत में लॉकडाउन को दो महीने से ज्यादा समय हो गया है और इस दौरान बच्चे भी घरों में कैद रहे हैं। इस वैश्विक महामारी को बच्चे भी अपने-अपने नजरिए से समझने की कोशिश कर रहे हैं। कहीं कोई इसके बारे में जानने के लिए उत्सुक है तो कहीं बच्चों के मन में इस संक्रामक बीमारी से पैदा हुए हालात की चिंता है। कनाडा के दूर दराज उत्तरी इकलुइट शहर में एक लड़का कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ जानने के लिए हर दम खबरों से चिपका रहता है। कई बच्चों के साथ यही स्थिति है।
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बंगलूरू में ट्रेन पर सवार होने के लिए परिवार के साथ कतार में खड़ी बच्ची।(File Photo)
- फोटो : PTI
ऑस्ट्रेलिया में एक लड़की मरने वाले लोगों के लिए दुखी होने के साथ ही इसके बाद उज्ज्वल भविष्य देख रही है। रवांडा में एक लड़के को डर है कि देश में लॉकडाउन खत्म होने के बाद सेना अपने नागरिकों पर हिंसक कार्रवाई करेगी।
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Child Stress
- फोटो : Pixabay
इस बीमारी ने उदासी और ऊबाउपन तथा चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। लोगों के घरों में अचानक से रिश्तेदारों का आना बंद हो गया है और दोस्त केवल वीडियो स्क्रीन पर ही दिखते हैं।
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न्यूयॉर्क में बच्चे (File Photo)
- फोटो : social media
कुछ बच्चे सुरक्षित महसूस करते हैं जबकि कुछ डरे हुए हैं। फिर भी ज्यादातर बच्चे खेल में व्यस्त हैं। हालांकि कई जगह बच्चे लॉकडाउन का आनंद भी उठा रहे हैं।
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इस अमेरिकी रैपर की तरह कई बच्चे रैपर होना चाहते हैं(File Photo)
उत्तरी कैलिफोर्निया के दूरदराज के जंगलों में करुक जनजाति के एक लड़के ने महज 5,000 की आबादी वाले अपने समुदाय के इस वैश्विक महामारी से बचने को लेकर अपनी चिंता जताते हुए एक रैप गीत लिखा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : social media
भारत में लॉकडाउन के दौरान नौ साल का अद्वैत वल्लभ सांवरिया अपने छोटे भाई के साथ खेलता है। उसने कहा, ‘‘हम खेलते हैं, फिल्में देखते हैं, फोन का इस्तेमाल करते हैं और स्काइप पर कॉल्स करते हैं।’’
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प्रतीकात्मक तस्वीर
अद्वैत ने एक कमरे को क्रिकेट पिच बना लिया है जिसमें एक भाई गेंद फेंकता है और दूसरा बल्लेबाजी करता है। कई बार वे शतरंज और ऊनो जैसे शांत खेल भी खेलते हैं।स्कूलों के अनिश्चितकाल तक बंद होने से खुश दोनों भाई हालांकि बाहर जाकर खेलने को याद करते है।
कुछ बच्चे चाहते हैं कि स्कूल न खुले और लॉकडाउन चलता रहे
- फोटो : पेक्सेल्स
इन सबके बावजूद दोनों भाई चाहते हैं कि लॉकडाउन एक साल तक लागू रहना चाहिए। छोटे भाई उद्धव प्रताप ने कहा, ‘‘लॉकडाउन तब तक नहीं खुलना चाहिए जब तक कि संक्रमण के मामले शून्य न हो जाए।’’