भारत में हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा भले ही न प्राप्त हो, लेकिन आधे से ज्यादा देश को इसी भाषा ने जोड़ रखा है। देश के कई हिस्सों में हिंदी मातृभाषा है तो बाकी जगह कार्यभाषा है। यूं शासकीय स्तर पर ऑफिशियल लैंग्वेज का दर्जा हिंदी को दिया गया है लेकिन असल में हिंदी जन जन की भाषा है क्योंकि हिंदी का जो स्वरूप आमतौर पर अपनाया जाता है उसमें कई सारी भाषाओं और बोलियों की मिठास मिली हुई है। और असल में हिंदी के इसी स्वरूप को अपनाने की जरूरत भी है। जानिए कैसे कुछ सामान्य बातों को समझकर आप आसानी से हिंदी को अपना सकते हैं।
जैसी बोलें वैसी लिखें:
ये हिंदी का सबसे बड़ा गुण है। आप हिंदी को जैसे बोलेंगे वैसे ही उसको लिख सकते हैं। अब यहां गड़बड़ इसलिए होती है क्योंकि हमारे यहां प्रांतीय स्तर पर अलग भाषाओं और बोलियों का असर हिंदी पर हो जाता है। इसी वजह से बोली गई हिंदी जब लिखी जाती है तो गड़बड़ हो जाती है। जैसे बांग्ला में पानी को भी खाने का अनुरोध किया जाता है और चाय को भी। इसी तरह दक्षिण भारतीय भाषाओं में स्त्रीलिंग और पुल्लिंग के लिए जिन शब्दों का प्रयोग होता है उसे हिंदी में बदलते समय वे असमंजस में आ जाते हैं। यदि आप सही हिंदी लिखना चाहते हैं तो सिर्फ सही हिंदी बोलने पर ध्यान केंद्रित करें।