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गणेश चतुर्थी विशेष: उल्लास और उत्साह का प्रतीक बप्पा का आगमन, गणपति उत्सव देता है ये खास संदेश

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गणपति उत्सव देता है ये खास संदेश - फोटो : Istock
विघ्नहर्ता श्री गणेश के साथ कई सारे रंग लेकर आएगा 10 दिवसीय गणेश चतुर्थी का त्योहार। ये सच है कि महामारी के दौर में इस त्योहार को मनाने के लिए कई सारे प्रोटोकॉल्स का पालन करना जरूरी है। भले ही पहले जैसे पंडाल और गतिविधियां न हों लेकिन उल्लास वही होगा। ज्यादातर लोग घरों में गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना करेंगे। लेकिन इस कठिन दौर में गणपति का आगमन मन में सकारात्मकता का भाव भी जगाएगा। बाजार में जगह जगह सजी श्री गणेश की प्रतिमाएं इसी बात का प्रतीक हैं कि हर चुनौती का बप्पा सहज रहकर सामना करने की प्रेरणा देते हैं। गणपति बप्पा की स्थापना के कई अलग अलग नियम और कायदे होते हैं। कहीं 3 दिन के लिए गणपति जी की मूर्ति की स्थापना की जाती है तो कहीं 5-7 दिन। इसी प्रकार अलग अलग दिनों के मुताबिक, स्थापना और फिर विसर्जन होता है। खास बात यह कि इन दिनों के लिए घर में बच्चों से बूढ़ों तक एक उत्साह बना रहता है। जैसे- गणपति जी के लिए क्या नया प्रसाद बनाना है, सबको मिलकर आरती करनी है, आदि।
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गणेश चतुर्थी 2021 - फोटो : Istock
प्रकृति के करीब

बीते कुछ सालों में गणपति प्रतिमा को लेकर लोगों में बहुत जागरूकता आई है। आजकल ज्यादातर लोग शुद्ध मिट्टी की प्रतिमा की स्थापना करना चाहते हैं। साल दर साल तालाबों या पानी के अन्य छोटे स्रोतों में निरादर पाती, खंडित मूर्तियां इस बात को स्पष्ट करती हैं कि ऐसे किसी पदार्थ से बनी मूर्तियां जो पानी में घुलनशील या बायोडिग्रेडेबल नहीं है, वह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के साथ ही, आस्था पर भी प्रहार करता है। इसलिए मिट्टी से बनी, पानी में घुलनशील मूर्तियों को ही आजकल प्राथमिकता दी जाती हैं।
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गणेश चतुर्थी 2021 - फोटो : Istock
पर्यावरण के साथी गणेश

केवल मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा ही चलन में नहीं है। इसके अलावा आजकल सब्जियों और फूलों आदि के बीज रखकर भी गणेश प्रतिमाओं की रचना की जाती है। इन प्रतिमाओं को भी मिट्टी से ही बनाया जाता है और इनके भीतर बीज रखे जाते हैं। ताकि जब मूर्ति को घर में ही विसर्जित किया जाए तो वे बीज गमले या क्यारी में गिरें और फूलें। पर्यावरण के प्रति लोगों की इस तरह बढ़ती जिम्मेदारी त्योहारों को और भी सार्थक रूप देती हैं।

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गणेश चतुर्थी - फोटो : Istock
रोजगार का अवसर

गणेश चतुर्थी का यह समय कई छोटे उद्योगों और घर से काम करने वालों के लिए सुनहरा मौका भी लाता है। विशेषकर अभी कोरोना महामारी के आने के बाद से रोजी-रोटी के चले जाने से परेशान कई लोगों को गणेश चतुर्थी ने रोजगार देने का काम किया है। इसमें छोटी प्रतिमाएं बनाने वाले, फूल-माला वाले, पूजन सामग्री के पैकेट्स बेचने वाले, घर पर ही मोदक तैयार करके बेचने वाले आदि लोग शामिल हैं।
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गणेश चतुर्थी - फोटो : Istock
बच्चों के प्रिय गणपति बप्पा

गणपति बप्पा का आना बच्चों के लिए खास खुशी का पल होता है। सबसे बड़ा आकर्षण होते हैं बप्पा को भोग लगाने के लिए तैयार किये गए लड्डू। उसमें भी मोतीचूर के लड्डू सबसे बड़ा आकर्षण होते हैं। गणपति बप्पा इसलिये भी बच्चों के फेवरेट होते हैं क्योंकि उनसे जुड़ी कथाएं और बप्पा का स्वरूप उनमें उत्सुकता पैदा करते हैं। यही कारण है कि इन दस दिनों का इंतज़ार बच्चे साल भर करते हैं।

 
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गणेश चतुर्थी - फोटो : Istock
पिछले साल से अब तक गणपति बप्पा के आने के समय माहौल में डर, असमंजस, घबराहट आदि फैले हुए थे लेकिन विघ्नहर्ता श्री गणेश ने आकर माहौल में उमंग जगाई। इस वर्ष भी रिद्धि-सिद्धि के दाता श्री गणेश लोगों के जीवन में उसी उमंग का संचार करेंगे, यह लोगों की आस है।
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